मेरठ सेंट्रल मार्केट में चला बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण; भारी फोर्स तैनात
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई है। 44 चिन्हित संपत्तियों में नियमों का पालन न करने वाले निर्माणों पर एक्शन हो रहा है। इलाके में पुलिस-PAC तैनात है।
मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार सुबह आवास एवं विकास परिषद ने पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को 44 चिन्हित व्यावसायिक परिसरों/भवनों में अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। भवन स्वामियों को खुद अवैध हिस्सा हटाने का समय भी दिया गया था। जिन स्थानों पर आदेश का पालन नहीं हुआ, वहां अब परिषद कार्रवाई कर रही है। 21 सितंबर को कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जानी है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | मेरठ | 16 सितंबर 2026
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बुधवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई।
खबर में खास
सेंट्रल मार्केट में सुबह से बुलडोजर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रहा ध्वस्तीकरण
44 चिन्हित और सील संपत्तियों से जुड़ा है मामला
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में देनी है कार्रवाई रिपोर्ट
मेरठ के सबसे चर्चित बाजारों में शामिल शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में बुधवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई।
सुबह से ही आवास एवं विकास परिषद की टीम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। भारी संख्या में पुलिस बल और PAC तैनात की गई और नई सड़क से सेक्टर-6 तक बैरिकेडिंग की गई।
कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है।
आखिर क्यों चल रहा है बुलडोजर?
सेंट्रल मार्केट का विवाद मुख्य रूप से उन संपत्तियों से जुड़ा है जिनका निर्धारित उपयोग आवासीय था, लेकिन उनमें व्यावसायिक गतिविधियां और स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण पाए जाने का मामला अदालत तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अप्रैल में रखी गई रिपोर्ट में 859 संपत्तियों में से 44 की विस्तृत सूची दी गई थी।
इसके बाद 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इन 44 सील भवनों से जुड़े अवैध निर्माण हटाकर उन्हें नियमानुसार करने के निर्देश दिए।
भवन मालिकों को खुद हटाने का मिला था समय
आवास एवं विकास परिषद ने संबंधित संपत्ति मालिकों को अवैध निर्माण खुद हटाने के लिए समय दिया था।
इसके बाद कई भवन मालिकों ने अपने स्तर पर सेटबैक और अन्य अवैध हिस्से हटाने शुरू भी कर दिए।
लेकिन जिन चिन्हित परिसरों में तय समय में आदेश का पालन नहीं किया गया, वहां अब परिषद की तरफ से ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
सुबह-सुबह सेंट्रल मार्केट बनी छावनी
बुधवार सुबह कार्रवाई से पहले इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
नई सड़क से सेक्टर-6 तक बैरिकेडिंग लगाई गई। पुलिस और PAC के जवानों के साथ प्रशासन और आवास विकास के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
दैनिक जागरण की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक पांच निर्माणों पर कार्रवाई शुरू हुई थी और रिपोर्ट प्रकाशित होने तक तीन को ध्वस्त किया जा चुका था, जबकि दो पर कार्रवाई जारी थी।
चूंकि कार्रवाई जारी है, इसलिए अंतिम संख्या दिन में बदल सकती है।
व्यापारी लंबे समय से कर रहे विरोध
सेंट्रल मार्केट के व्यापारी इस कार्रवाई का लंबे समय से विरोध कर रहे हैं।
बुधवार को भी विरोध को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। Live Hindustan की लाइव रिपोर्ट के अनुसार कुछ विपक्षी और व्यापारी नेताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
कुछ भवन मालिकों ने प्रशासनिक कार्रवाई से पहले अपने स्तर पर भी अवैध हिस्सों को हटाया है।
मामला नया नहीं, वर्षों से चल रहा विवाद
सेंट्रल मार्केट का यह विवाद वर्षों पुराना है।
एक प्रमुख मामला भवन संख्या 661/6 से जुड़ा था। इस संपत्ति का आवंटन आवासीय उपयोग के लिए हुआ था, लेकिन बाद में यहां व्यावसायिक निर्माण का मामला सामने आया।
हाई कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अलग-अलग चरणों में अदालत ने आवासीय संपत्तियों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
सिर्फ 44 भवन या पूरा सेंट्रल मार्केट?
यह अंतर समझना जरूरी है।
आज की कार्रवाई का तत्काल फोकस 44 चिन्हित और सील संपत्तियों में से आदेश का पालन नहीं करने वाले निर्माण हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आज पूरे सेंट्रल मार्केट की हर दुकान तोड़ी जा रही है।
व्यापक मामले में सैकड़ों आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल और सेटबैक से जुड़े सवाल अलग से अदालत और प्रशासन के सामने रहे हैं। हाल की रिपोर्ट में 859 भवनों में से लगभग 350 में सेटबैक खाली किए जाने की प्रक्रिया होने की बात सामने आई थी।
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में जाएगी रिपोर्ट
इस कार्रवाई के बाद प्रशासन और आवास विकास परिषद को 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी है।
ऐसे में बुधवार की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिनभर में कितने निर्माणों पर कार्रवाई होती है और 21 सितंबर को प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या रिपोर्ट पेश करता है।