सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति YouTubers की एंट्री पर रोक रहेगी बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने PIL सुनने से किया इनकार

यूपी और राजस्थान के आदेशों को दी गई थी चुनौती; पत्रकारों, सोशल मीडिया यूजर्स और बाहरी लोगों को रिकॉर्डिंग से पहले लेनी होगी अनुमति

सरकारी स्कूलों में YouTubers और पत्रकारों की एंट्री पर पाबंदी से संबंधित सुप्रीम कोर्ट मामला

सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers और दूसरे बाहरी लोगों की बिना अनुमति एंट्री तथा वीडियो रिकॉर्डिंग पर लागू पाबंदियों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिका में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के आदेशों को चुनौती देते हुए कहा गया था कि बच्चों की निजता की रक्षा जरूरी है, लेकिन स्कूलों की बदहाल सुविधाओं की स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

सरकारी स्कूलों में YouTubers की एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश संबंधी पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया यूजर्स तथा दूसरे बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर लागू अनुमति व्यवस्था को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने प्रिय मिश्रा की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार किया। इसके बाद संबंधित राज्यों और जिलों में पहले से जारी निर्देश फिलहाल प्रभावी बने रहेंगे।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों में YouTubers या पत्रकारों के प्रवेश पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया है। अदालत ने केवल उत्तर प्रदेश और राजस्थान में जारी पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिका सुनने से इनकार किया है।

किन गतिविधियों के लिए जरूरी होगी अनुमति?

संबंधित आदेशों के अनुसार, सरकारी स्कूल परिसर में प्रवेश करने वाले बाहरी व्यक्ति को पहले स्कूल के प्रधानाचार्य अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

स्कूल के अंदर फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियां भी बिना पूर्व अनुमति नहीं की जा सकेंगी। ये निर्देश पत्रकारों, YouTubers, सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वाले व्यक्तियों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों पर लागू होते हैं।

आदेशों का उद्देश्य स्कूल के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित होने से बचाना तथा बच्चों की निजता, पहचान और सुरक्षा की रक्षा करना बताया गया है।

यूपी के किन जिलों में जारी हुए निर्देश?

याचिका में उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 अगस्त 2026 को जारी आदेश का उल्लेख किया गया था। इसमें सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना बाहरी लोगों, YouTubers और सोशल मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को परिषदीय स्कूलों में प्रवेश करने तथा वीडियो बनाने से रोकने की बात कही गई थी।

याचिका में दावा किया गया कि आजमगढ़, बलिया, बस्ती, बलरामपुर, शामली और आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इसी तरह के निर्देश जारी किए गए हैं।

इसका अर्थ यह नहीं है कि पत्रकार या YouTuber कभी किसी सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकते। निर्धारित अनुमति मिलने के बाद स्कूल परिसर में जाकर रिपोर्टिंग अथवा रिकॉर्डिंग की जा सकती है।

राजस्थान के आदेश को भी दी गई थी चुनौती

जनहित याचिका में राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 16 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर को भी चुनौती दी गई थी। इस आदेश के अनुसार, सरकारी स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश करने से पहले प्रधानाचार्य की अनुमति लेना अनिवार्य है।

फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, बच्चों या कर्मचारियों के इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए पूर्व लिखित अनुमति की व्यवस्था भी की गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि स्कूल के प्रधानाचार्य को अनुमति देने अथवा आवेदन अस्वीकार करने का बहुत व्यापक अधिकार दिया गया है, लेकिन फैसले के लिए स्पष्ट और पारदर्शी मानक तय नहीं किए गए।

‘School Thik Karo’ अभियान से जुड़ा है मामला

यह विवाद ‘School Thik Karo’ अभियान की पृष्ठभूमि में सामने आया। इस अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों में भवन, कक्षाओं, शौचालयों, पेयजल, बिजली, मिड-डे मील और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को वीडियो तथा सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

अभियान से जुड़े लोगों का तर्क है कि सरकारी स्कूल सार्वजनिक धन से चलने वाले संस्थान हैं। इसलिए वहां उपलब्ध सुविधाओं और सरकारी शिक्षा योजनाओं की जमीनी स्थिति को लोगों के सामने लाना सार्वजनिक हित की पत्रकारिता का हिस्सा है।

वहीं, शिक्षा विभाग का पक्ष है कि बिना जानकारी के बाहरी लोगों का स्कूल में प्रवेश करना और बच्चों की रिकॉर्डिंग करना उनकी सुरक्षा, गरिमा तथा पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर सकता है।

याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ता ने कहा कि बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना सरकार की वैध जिम्मेदारी है। लेकिन इसी आधार पर सरकारी स्कूलों की इमारतों, शौचालयों, पेयजल व्यवस्था और दूसरी सुविधाओं की स्वतंत्र रिकॉर्डिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।

याचिका में किसी पहचान योग्य बच्चे का वीडियो बनाने और स्कूल की भौतिक स्थिति को रिकॉर्ड करने के बीच अंतर बताया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि बच्चों के चेहरे, नाम और निजी जानकारी दिखाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, लेकिन खाली कक्षाओं या खराब सुविधाओं का वीडियो बनाने पर पूर्ण रोक अनुचित है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि जिन अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के काम की जांच की जानी है, उन्हीं से अनुमति लेने की अनिवार्यता जवाबदेही और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है।

मौलिक अधिकारों का दिया गया हवाला

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19(1)(a), अनुच्छेद 19(1)(g), अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 21-A के तहत मिलने वाले अधिकारों का हवाला दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में सार्वजनिक संस्थानों की स्थिति पर वैध पत्रकारिता और लोगों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना भी शामिल है।

इसमें मांग की गई थी कि स्कूलों में प्रवेश और रिकॉर्डिंग से संबंधित नियम तार्किक, आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए। सरकार बच्चों की सुरक्षा के लिए उचित प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन प्रतिबंध इतना व्यापक नहीं होना चाहिए कि स्वतंत्र जांच और रिपोर्टिंग ही संभव न हो।

बच्चों के इंटरव्यू और वीडियो पर क्यों उठे सवाल?

स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र नाबालिग होते हैं। किसी बच्चे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने से उसकी पहचान, स्थान और निजी परिस्थितियां सार्वजनिक हो सकती हैं।

बच्चों से संवेदनशील विषयों पर सवाल पूछना अथवा बिना अभिभावक और स्कूल की सहमति के इंटरव्यू करना उनकी निजता तथा मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। किसी वीडियो के वायरल होने पर बच्चे को उपहास, ट्रोलिंग या दूसरे खतरों का सामना भी करना पड़ सकता है।

इसी कारण स्कूल प्रशासन का कहना है कि बाहरी लोगों की रिकॉर्डिंग और बच्चों के इंटरव्यू को नियंत्रित करना आवश्यक है। दूसरी ओर, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि स्पष्ट नियम बनाकर निजता एवं पारदर्शिता दोनों की रक्षा की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस जनहित याचिका को सुनने की इच्छुक नहीं है। इसके बाद याचिका पर आगे विचार नहीं किया गया।

अदालत का सुनवाई से इनकार करना यह साबित नहीं करता कि संबंधित सभी प्रतिबंध संवैधानिक रूप से सही या गलत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन आदेशों की वैधता पर विस्तार से कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।

याचिकाकर्ता संबंधित हाई कोर्ट या किसी दूसरे उपलब्ध कानूनी विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए इसे देशभर में लागू सुप्रीम कोर्ट का नया प्रतिबंध कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

क्या अब पत्रकार स्कूल की रिपोर्टिंग नहीं कर सकते?

पत्रकारों और YouTubers पर स्कूलों से जुड़ी खबर प्रकाशित करने की पूरी तरह रोक नहीं लगी है। वे अनुमति लेकर स्कूल परिसर में प्रवेश कर सकते हैं और निर्धारित शर्तों के तहत रिपोर्टिंग कर सकते हैं।

स्कूल के बाहर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी, अभिभावकों के बयान, शिक्षा विभाग के दस्तावेज, सरकारी पोर्टल, आरटीआई और अधिकारियों की प्रतिक्रिया के आधार पर भी रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

यदि स्कूल के अंदर रिकॉर्डिंग करनी हो तो संबंधित अधिकारी से लिखित अनुमति लेना सुरक्षित रहेगा। बच्चों की पहचान दिखाने से पहले अभिभावकों की सूचित सहमति लेना और संवेदनशील निजी जानकारी छिपाना आवश्यक है।

बच्चों की सुरक्षा बनाम सरकारी स्कूलों की जवाबदेही

इस मामले ने बच्चों की सुरक्षा और सरकारी संस्थानों की पारदर्शिता के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है। बच्चों की अनुमति के बिना वीडियो बनाना उचित नहीं है, लेकिन स्कूलों की खराब सुविधाओं को जनता से छिपाया जाना भी सार्वजनिक हित में नहीं होगा।

ऐसी स्थिति में स्पष्ट और समान नियम सबसे बेहतर समाधान हो सकते हैं। इनमें अनुमति के लिए समयसीमा, आवेदन खारिज करने का लिखित कारण, बच्चों की पहचान छिपाने और पढ़ाई के समय रिकॉर्डिंग नहीं करने जैसी शर्तें शामिल की जा सकती हैं।

फिलहाल उत्तर प्रदेश और राजस्थान के संबंधित आदेश प्रभावी हैं। इसलिए पत्रकारों, YouTubers और दूसरे बाहरी लोगों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश अथवा रिकॉर्डिंग करने से पहले सक्षम अधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

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