पंजाब में AI लैब-स्विमिंग पूल, UP में बच्चे बरामदे में पढ़ते मिले; CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ में अब गुजरात की बारी?
CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान कई राज्यों तक पहुंच चुका है। पंजाब में टीम ने AI लैब और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की तारीफ की, जबकि UP समेत दूसरे राज्यों में स्कूलों की बदहाली पर सवाल उठाए। अब अभिजीत दीपके ने गुजरात जाने का संकेत दिया है।
15 अगस्त को महाराष्ट्र से शुरू हुआ CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। अभियान में कहीं टूटे शौचालय, जर्जर भवन और बेंच की कमी जैसे मुद्दे सामने आए, तो पंजाब के School of Eminence में स्विमिंग पूल, AI लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाओं की तारीफ भी हुई। UP के नोएडा में CJP और शिक्षा विभाग के दावे आमने-सामने आए। अब CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुजरात का जिक्र कर अगले स्कूल ऑडिट का संकेत दिया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 16 सितंबर 2026
CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों की अलग-अलग तस्वीर सामने आई है।
खबर में खास
15 अगस्त को महाराष्ट्र से शुरू हुआ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान
पंजाब में AI लैब और स्विमिंग पूल की तारीफ
UP के नोएडा में स्कूलों की स्थिति पर उठे सवाल
अब अभिजीत दीपके ने गुजरात जाने का दिया संकेत
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब एक राज्य से निकलकर देश के कई हिस्सों तक पहुंच गया है।
इस अभियान में CJP की टीमों को हर जगह एक जैसी तस्वीर नहीं मिली।
कहीं सरकारी स्कूलों में टूटे शौचालय, जर्जर भवन और बच्चों के बैठने की समस्या सामने आई तो पंजाब में CJP ने सरकारी स्कूल की AI लैब, कंप्यूटर लैब और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की खुलकर तारीफ भी की।
अब CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुजरात का जिक्र किया है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या अभियान का अगला बड़ा पड़ाव गुजरात होगा।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ था ‘स्कूल ठीक करो’
CJP ने इस अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से की थी।
अभिजीत दीपके अपने गांव के जिला परिषद स्कूल पहुंचे थे।
उन्होंने वहां शौचालय में पानी नहीं होने, टूटी खिड़कियों और बच्चों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं होने जैसे मुद्दे उठाए।
इसके बाद अभियान दूसरे इलाकों और राज्यों तक फैलता गया।
पंजाब में CJP को दिखी अलग तस्वीर
पंजाब पहुंचने पर अभियान की तस्वीर कुछ अलग नजर आई।
सौरव दास के नेतृत्व में CJP टीम ने लुधियाना के तीन सरकारी स्कूलों का दौरा किया।
इनमें एक School of Eminence भी शामिल था।
टीम ने वहां स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप, AI लैब और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधाएं देखीं।
सौरव दास ने स्कूल के infrastructure की तारीफ की और कुछ सुविधाओं को निजी स्कूलों से भी बेहतर बताया।
हालांकि CJP ने पंजाब के स्कूलों में कुछ कमियां भी बताईं और उन्हें राज्य के शिक्षा मंत्री के सामने रखने की बात कही।
पंजाब वाले ऑडिट पर CJP से भी हुए सवाल
पंजाब के दौरे के बाद CJP खुद भी सवालों में घिर गई।
आलोचकों ने सवाल उठाया कि BJP शासित राज्यों में खराब स्थिति वाले स्कूलों को दिखाने वाली टीम ने पंजाब में एक प्रमुख School of Eminence को क्यों चुना।
पंजाब के कुछ अन्य स्कूलों में पुराना infrastructure और दूसरी कमियां भी CJP ने दर्ज की थीं। इस ऑडिट के तरीके और स्कूलों के चयन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस हुई।
इसलिए पंजाब दौरे को केवल “CJP ने पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों को शानदार बताया” कहना सही नहीं होगा।
UP पहुंची CJP तो खड़ा हुआ नया विवाद
15 सितंबर को CJP का अभियान नोएडा पहुंचा।
सौरव दास की टीम ने गौतम बुद्ध नगर के गरही चौखंडी स्थित सरकारी प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया।
CJP ने स्कूल में गंदे शौचालय, पुरानी इमारत और खराब हालत वाले कमरे मिलने का दावा किया। टीम ने यह भी कहा कि पर्याप्त classrooms नहीं होने के कारण कुछ बच्चे बरामदे में पढ़ रहे थे।
इसके बाद CJP ने आरोप लगाया कि आसपास के दूसरे स्कूलों में टीम को प्रवेश नहीं दिया गया।
स्कूल बंद होने के दावे पर प्रशासन ने क्या कहा?
इस मामले में प्रशासन का पक्ष CJP से बिल्कुल अलग है।
गौतम बुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने CJP के उस दावे का खंडन किया कि जिले के सरकारी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया था।
शिक्षा विभाग के मुताबिक स्कूल सामान्य timetable के अनुसार चल रहे थे और जिले में स्कूल बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ था।
अधिकारियों ने CJP टीम को कुछ स्कूलों में प्रवेश नहीं देने के पीछे बड़ी भीड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका बताई।
इसलिए यहां CJP के आरोप और प्रशासन के जवाब—दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
दूसरे राज्यों में क्या सामने आया?
अभियान महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों तक पहुंचा है।
CJP और उसके volunteers ने अलग-अलग जगह जर्जर infrastructure, toilets, drinking water, classrooms और teachers की कमी जैसे मुद्दे उठाए हैं।
राजस्थान में सरकारी audit से भी 611 स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं होने की जानकारी सामने आई थी।
यानी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में सामने आने वाली तस्वीर केवल एक राजनीतिक दल की सरकार वाले राज्यों तक सीमित नहीं रही है।
अब गुजरात क्यों आया चर्चा में?
CJP पर पहले आरोप लगाए गए कि उसका अभियान BJP शासित राज्यों पर ज्यादा केंद्रित है।
इसके जवाब में संगठन की टीम पंजाब, कर्नाटक और झारखंड जैसे गैर-BJP शासित राज्यों में भी पहुंची।
अब अभिजीत दीपके ने खुद गुजरात का जिक्र किया है।
उन्होंने सवाल किया कि पंजाब, झारखंड और कर्नाटक जाने के बाद भी उनसे कोई यह क्यों नहीं पूछ रहा कि वह गुजरात कब जाएंगे?
इस बयान को गुजरात दौरे की आधिकारिक तारीख या घोषणा नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन इससे वहां स्कूल ऑडिट की संभावना का संकेत जरूर मिलता है।
सरकारी स्कूलों को लेकर बढ़ती बहस
CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान अब केवल खराब स्कूलों की तस्वीरें दिखाने तक सीमित नहीं है।
पंजाब जैसे उदाहरण में अच्छे infrastructure की तारीफ और UP जैसे मामलों में प्रशासन के counter-response ने अभियान को एक व्यापक राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि CJP वास्तव में गुजरात पहुंचती है या नहीं और अगर वहां स्कूलों का social audit होता है तो टीम को कैसी स्थिति देखने को मिलती है।