रातभर तनाव, सुबह 5 बजे चला बुलडोजर: सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद क्यों ढहाई गई? जानिए पूरा विवाद

जिला अदालत से मस्जिद समिति की अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच की कार्रवाई; सोशल मीडिया पर DM के कथित आश्वासन को लेकर उठे सवाल

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार तड़के बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर बने इस ढांचे को हटाने की कार्रवाई अदालत के फैसले और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एक दिन पहले अधिकारियों ने केवल परिसर सील करने का भरोसा दिया था। जानिए मस्जिद विवाद की पूरी कहानी और दोनों पक्षों का दावा।

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि वर्षों से परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने की नौबत क्यों आई और प्रशासन ने सुबह-सुबह कार्रवाई क्यों की?

प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। कलेक्ट्रेट परिसर की जमीन पर मस्जिद के कथित अवैध निर्माण और कब्जे को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में ढांचे को सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जा मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था।

जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद हुई कार्रवाई

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ढांचे को जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्त किया गया।

मस्जिद प्रबंधन समिति ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 4 सितंबर को जिला अदालत ने समिति की अपील खारिज कर दी और पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर की सुबह प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर मस्जिद के ढांचे को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।

सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित पाया था। उन्होंने बताया कि मस्जिद समिति की अपील भी खारिज हो गई, जिसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की गई। क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से सुरक्षात्मक कदम उठाए गए थे। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

कितनी जमीन पर बनी थी मस्जिद?

नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के जुलाई 2026 के आदेश के अनुसार, मस्जिद का निर्माण कलेक्ट्रेट परिसर की लगभग 315 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर किया गया था। आदेश उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत जारी हुआ था।

तत्कालीन आदेश में कब्जाधारियों को परिसर खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इसके साथ ही कथित रूप से करीब 70 वर्षों तक सरकारी जमीन का अनधिकृत इस्तेमाल करने के बदले लगभग 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

शिकायत के बाद शुरू हुआ था मामला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में वर्ष 2024 में बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने शिकायत की थी। शिकायत में कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके मस्जिद बनाए जाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच और कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ी।

मस्जिद पक्ष ने दावा किया था कि यह धार्मिक स्थल बहुत पुराना है और लंबे समय से कलेक्ट्रेट कर्मचारियों तथा स्थानीय लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है। अलग-अलग रिपोर्टों में मस्जिद की उम्र करीब 70 से 150 वर्ष तक बताई गई है। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर जमीन को सरकारी संपत्ति माना। स्रोत: अमर उजाला

वायरल पोस्ट में DM पर क्या आरोप लगाया गया?

सोशल मीडिया पर पत्रकार अंजार अफाक की पोस्ट में दावा किया गया कि कार्रवाई से पहले लोगों ने मस्जिद की जमीन से संबंधित कागजात अधिकारियों को दिखाए थे। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि रात में अधिकारियों ने केवल मस्जिद को सील करने की बात कही, लेकिन सुबह ढांचा ध्वस्त कर दिया गया।

हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों या प्रशासन के आधिकारिक बयान में इस कथित आश्वासन की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय सोशल मीडिया पर किया गया दावा मानना उचित होगा। प्रशासन का दर्ज पक्ष यही है कि जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। वायरल पोस्ट देखें

तड़के कार्रवाई और भारी पुलिस बल की तैनाती

संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कार्रवाई सुबह करीब पांच बजे किए जाने की बात सामने आई है। बुलडोजर से ढांचा हटाने के दौरान लोगों को कलेक्ट्रेट परिसर की ओर जाने से रोका गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई।

कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें फैलने लगी थीं। प्रशासन ने संभावित विरोध को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती। फिलहाल प्रशासन की ओर से क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही गई है।

इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप

कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास पर पुलिस तैनात करके नजरबंद किया गया। प्रशासन की ओर से इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया गया है।

मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष और कुछ राजनीतिक नेता कार्रवाई के तरीके तथा समय पर सवाल उठा रहे हैं।

पुराने धार्मिक स्थल और सरकारी जमीन—अब आगे क्या?

इस मामले में तीन बातें स्पष्ट हैं—नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण माना था, समिति की अपील जिला अदालत से खारिज हुई और उसके बाद प्रशासन ने ढांचा हटाया। वहीं, अधिकारियों द्वारा मस्जिद नहीं तोड़ने का आश्वासन दिए जाने का दावा अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मस्जिद प्रबंधन समिति इस कार्रवाई के विरुद्ध किसी उच्च न्यायालय का रुख करती है या नहीं। फिलहाल ध्वस्तीकरण पूरा हो चुका है, लेकिन इससे जुड़ी कानूनी और राजनीतिक बहस समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही।

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