सपा नेता पवन यादव की हत्या का 24 घंटे में खुलासा, 42 CCTV खंगालकर तीन गिरफ्तार; पुलिस ने बताई वजह
प्रयागराज में सपा नेता पवन यादव की हत्या का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। करीब 42 CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए। पुलिस के मुताबिक हत्या के पीछे व्यक्तिगत रंजिश थी।
प्रयागराज के हंडिया में सपा के गंगापार जिला सचिव और पूर्व प्रधान पवन यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक लल्ला यादव ने पवन यादव पर गोली चलाई थी, जबकि निहाल अली बाइक चला रहा था और बृजेश यादव बीच में बैठा था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे भी बरामद करने का दावा किया है। शुरुआती पूछताछ में व्यक्तिगत रंजिश को हत्या की वजह बताया गया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | प्रयागराज | 16 सितंबर 2026
प्रयागराज पुलिस ने सपा नेता पवन यादव हत्याकांड में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या के खुलासे का दावा किया है।
खबर में खास
पवन यादव हत्याकांड में तीन आरोपी गिरफ्तार
करीब 42 CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने का दावा
पुलिस के मुताबिक लल्ला यादव ने चलाई थी गोली
हत्या की शुरुआती वजह व्यक्तिगत रंजिश बताई गई
प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के नेता पवन कुमार यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात के खुलासे का दावा किया है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लल्ला यादव, बृजेश यादव और निहाल अली के रूप में हुई है। इनमें लल्ला यादव को रिपोर्टों में हिस्ट्रीशीटर बताया गया है।
पुलिस का दावा है कि तीनों एक ही बाइक से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे।
42 CCTV कैमरों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
हत्या के बाद पुलिस ने हंडिया टोल प्लाजा और आसपास लगे करीब 42 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।
फुटेज में एक बाइक पर सवार तीन संदिग्ध दिखाई दिए। इसी आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और तीनों आरोपियों को पकड़ने का दावा किया।
पुलिस के मुताबिक निहाल अली बाइक चला रहा था, बृजेश यादव बीच में बैठा था और लल्ला यादव बाइक पर सबसे पीछे था।
किसने चलाई थी पवन यादव पर गोली?
पुलिस के अनुसार पवन यादव पर गोली चलाने वाला आरोपी लल्ला यादव था।
तीनों आरोपी बाइक से पवन यादव के पास पहुंचे और गोली मारने के बाद मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे बरामद करने का भी दावा किया है।
₹20 हजार में खरीदे गए थे तमंचे और कारतूस
पुलिस की शुरुआती जांच में एक और जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक वारदात में इस्तेमाल किए गए दो तमंचे और कारतूस करीब ₹20 हजार में खरीदे गए थे।
हालांकि हथियार किससे खरीदे गए और हत्या की तैयारी कितने समय पहले शुरू हुई थी, इन पहलुओं पर आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने बताई हत्या की वजह
हत्या के पीछे राजनीतिक कारण था या व्यक्तिगत विवाद—वारदात के बाद यह बड़ा सवाल बना हुआ था।
पुलिस के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में आरोपी लल्ला यादव ने पवन यादव से व्यक्तिगत दुश्मनी/पुरानी रंजिश की बात बताई है।
कुछ रिपोर्टों में प्रधानी चुनाव और स्थानीय विवादों के एंगल का भी जिक्र है, लेकिन पुलिस की आगे की जांच पूरी होने तक इसे हत्या की स्थापित वजह नहीं माना जाना चाहिए।
मंगलवार शाम कैसे हुई थी हत्या?
पवन कुमार यादव मंगलवार शाम प्रयागराज के हंडिया इलाके में थे।
वह एक परिचित की दुकान पर कुछ समय रुकने के बाद करीब साढ़े पांच बजे अपनी कार की ओर जा रहे थे।
इसी दौरान बाइक सवार तीन हमलावर पहुंचे। हमलावरों में से एक ने पवन यादव को पीछे से गोली मारी और तीनों बाइक से फरार हो गए।
गोली लगने के बाद पवन यादव को अस्पताल ले जाया गया। बाद में एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कौन थे पवन यादव?
पवन कुमार यादव हंडिया थाना क्षेत्र के मुगरांव गांव के रहने वाले थे।
वह समाजवादी पार्टी गंगापार के जिला सचिव थे और गांव के पूर्व प्रधान भी रह चुके थे। रिपोर्टों के मुताबिक वर्तमान में वह कनकपुर गांव से BDC सदस्य थे।
हत्या की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में सपा नेता और समर्थक अस्पताल पहुंचे थे।
पहले भी हमले का दावा
पवन यादव के परिवार के हवाले से कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वर्ष 2018 में भी उन पर बम और गोली से हमला हुआ था।
परिवार पुराने विवादों को मौजूदा हत्याकांड से जोड़कर देख रहा है। हालांकि पुलिस अभी इन पुराने मामलों और मौजूदा हत्या के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है।
आगे की जांच जारी
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या के खुलासे का दावा जरूर किया है, लेकिन जांच अभी समाप्त नहीं हुई है।
पुरानी रंजिश, स्थानीय विवाद और हत्या की पूरी योजना से जुड़े पहलुओं की पड़ताल जारी है।
इसलिए फिलहाल “व्यक्तिगत रंजिश” पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आई वजह है, इसे अदालत से साबित अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।