मायावती ने आनंद कुमार के बेटों को BSP में पद देने से इनकार किया, जबकि बेटी दीपिका आनंद को भविष्य में जिम्मेदारी मिल सकती है।
मायावती ने BSP में परिवारवाद को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ किया कि भाई आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में कोई राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। जरूरत पड़ने पर उनकी बेटी दीपिका आनंद को योग्यता और निष्ठा के आधार पर मौका मिल सकता है।
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UP Election 2027 से पहले BSP में नेतृत्व और नई पीढ़ी को लेकर बड़ा संकेत मिला है। मायावती ने कहा है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा, जबकि उनकी बेटी दीपिका आनंद भविष्य में योग्यता के आधार पर जिम्मेदारी संभाल सकती हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 12 सितंबर 2026
खबर में खास
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आनंद कुमार के बेटों को BSP में राजनीतिक पद नहीं देने का ऐलान
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बेटी दीपिका आनंद को भविष्य में जिम्मेदारी मिलने की संभावना
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संगठन में करीब 50% युवा भागीदारी पर मायावती का जोर
BSP में नेतृत्व को लेकर मायावती का बड़ा संदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में नई पीढ़ी, परिवार और नेतृत्व को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संकेत सामने आया है।
BSP प्रमुख मायावती ने साफ किया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में किसी छोटे या बड़े राजनीतिक पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद पार्टी के काम में मदद कर सकती हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में मायावती के भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद BSP के भविष्य के नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।
आनंद कुमार के बेटों पर मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परिवारवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अपने भाई-बहनों और परिवार के दूसरे युवाओं को सांसद, विधायक, मंत्री या दूसरे राजनीतिक पदों से दूर रखती रही हैं।
मायावती के मुताबिक उनके छोटे भाई आनंद कुमार उनके साथ लंबे समय से पार्टी संगठन में जिम्मेदारी निभाते रहे हैं, लेकिन उनके दोनों बेटों को BSP में किसी राजनीतिक पद पर काम करने का मौका नहीं दिया जाएगा।
दीपिका आनंद को क्यों मिल सकता है मौका?
यहीं पर मायावती ने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद का नाम लिया।
दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती ने कहा कि भविष्य में अगर आनंद कुमार को पार्टी के काम में सहयोग की जरूरत पड़ती है तो उनकी बेटी मदद कर सकती हैं।
हालांकि उन्होंने यह जिम्मेदारी सीधे देने की घोषणा नहीं की। मायावती ने इसे ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता से जोड़ा है। यानी दीपिका को पार्टी में भूमिका तभी मिल सकती है जब नेतृत्व उन्हें इस योग्य माने।
दीपिका तैयार न हुईं तो क्या होगा?
मायावती ने इसके लिए दूसरा विकल्प भी खुला रखा है।
उनके मुताबिक अगर दीपिका आनंद यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी की सहमति से दलित समाज के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को यह भूमिका दी जा सकती है।
यानी मायावती यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि BSP में किसी पद का फैसला केवल पारिवारिक रिश्ते के आधार पर नहीं होगा।
आकाश आनंद के बाद क्यों बढ़ी नेतृत्व की चर्चा?
BSP के भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि मायावती ने हाल ही में अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था।
आकाश आनंद लंबे समय तक BSP के प्रमुख युवा चेहरे के रूप में आगे बढ़ाए गए। उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया और एक समय उन्हें मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी माना जाने लगा था।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई बार जिम्मेदारी दी गई और फिर हटाया गया। सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें संगठनात्मक भूमिका से अलग कर दिया गया।
इसी वजह से अब दीपिका आनंद का नाम सामने आना BSP के भीतर नई पीढ़ी की राजनीति को लेकर दिलचस्पी बढ़ा रहा है।
50% तक युवाओं को संगठन में जगह
मायावती का यह बयान केवल परिवार तक सीमित नहीं है।
उन्होंने BSP में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की नीति पर भी जोर दिया है। उनके मुताबिक पार्टी लंबे समय से संगठन में नई पीढ़ी को करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की दिशा में काम कर रही है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में भी मेहनती और योग्य युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
इसके जरिए BSP Gen-Z और Gen-Alpha जैसी नई पीढ़ी तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
महिला और युवा चेहरों पर भी जोर
मायावती ने यह भी कहा कि संगठन और चुनावी राजनीति में युवा पुरुषों के साथ महिला चेहरों को भी अवसर दिया जाना चाहिए।
यह रणनीति BSP के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश में अपने पुराने जनाधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
नई पीढ़ी और महिला नेतृत्व को आगे लाने की बात इस बदलाव का हिस्सा मानी जा सकती है।
परिवारवाद के सवाल पर मायावती का जवाब
मायावती ने अपने फैसले को कांशीराम की राजनीतिक सोच से भी जोड़ा।
उनका कहना है कि BSP को परिवारवाद से मुक्त रखना जरूरी है ताकि बहुजन समाज और मिशन से जुड़े दूसरे लोगों को भी संगठन में आगे बढ़ने का अवसर मिले।
यही वजह है कि आनंद कुमार के बेटों को राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं देने और दीपिका के मामले में भी योग्यता की शर्त रखने को वह परिवारवाद से दूरी के संदेश के रूप में पेश कर रही हैं।
निष्कासित नेताओं की वापसी पर भी साफ संदेश
मायावती ने उन खबरों को भी गलत बताया जिनमें BSP से बाहर किए गए नेताओं की वापसी की चर्चा की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निकाले गए लोगों को वापस लेने की कोई योजना नहीं है।
इससे साफ है कि 2027 चुनाव से पहले मायावती संगठनात्मक अनुशासन के मामले में नरमी दिखाने के मूड में नहीं हैं।
2027 से पहले BSP में किस दिशा में हो रहा बदलाव?
BSP के लिए 2027 का चुनाव बेहद अहम होने वाला है।
एक तरफ पार्टी संगठन में करीब 50 प्रतिशत युवा भागीदारी की बात कर रही है, दूसरी तरफ आकाश आनंद जैसे प्रमुख युवा चेहरे को जिम्मेदारियों से अलग किया गया है। अब दीपिका आनंद के लिए संभावित रास्ता खुला रखा गया है।
इसलिए सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या दीपिका आनंद आने वाले समय में BSP की नई युवा नेता के रूप में सामने आएंगी, या मायावती परिवार के बाहर किसी मिशनरी कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी देकर नया संदेश देंगी?
फिलहाल मायावती ने किसी उत्तराधिकारी का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। इसलिए दीपिका के नाम को अभी संभावित भूमिका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
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