UP Election 2027: BSP का बड़ा ‘Gen-Z दांव’, संगठन में करीब 50% युवाओं की भागीदारी; टिकट में भी मिलेगी प्राथमिकता

मायावती ने 2027 चुनाव से पहले युवाओं को लेकर BSP की रणनीति साफ कर दी है। पार्टी संगठन में Gen-Z को करीब 50% भागीदारी देने के साथ यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव में युवा व योग्य चेहरों को टिकट में प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

यूपी चुनाव 2027 से पहले BSP की Gen-Z रणनीति पर मायावती

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मायावती ने BSP में युवा भागीदारी बढ़ाने का बड़ा संदेश दिया है। पार्टी संगठन में Gen-Z को करीब 50% प्रतिनिधित्व देने और यूपी समेत तीन राज्यों के चुनाव में युवा प्रतिभाओं को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम हो रहा है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 12 सितंबर 2026

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2027 से पहले मायावती ने चला बड़ा Gen-Z दांव!

खबर में खास

  • BSP संगठन में Gen-Z को करीब 50% भागीदारी देने की नीति
  • यूपी, उत्तराखंड और पंजाब चुनाव में युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता
  • रोजगार, शिक्षा और Gen-Z के मुद्दों को चुनावी एजेंडे में आगे लाने की तैयारी

2027 से पहले मायावती का बड़ा युवा दांव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी ने अपनी रणनीति में युवाओं को बड़ी जगह देने का फैसला किया है। BSP प्रमुख मायावती ने कहा है कि पार्टी लंबे समय से संगठन में Gen-Z यानी नई पीढ़ी को करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की नीति पर काम कर रही है।
अब इसी रणनीति को चुनावी टिकट तक भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
मायावती के मुताबिक उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव में भी सर्वसमाज के मेहनती और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

संगठन में करीब 50% युवाओं की भागीदारी

मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लेकर पार्टी की रणनीति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि BSP देशभर में और खासकर उत्तर प्रदेश में नई पीढ़ी को संगठन में आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। इसी के तहत Gen-Z को पार्टी संगठन में करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की प्रक्रिया अपनाई गई है।
पार्टी की कोशिश है कि युवा केवल कार्यकर्ता तक सीमित न रहें, बल्कि संगठन और चुनावी राजनीति में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले।
यही वजह है कि विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान भी योग्य युवा चेहरों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

सिर्फ युवा नहीं, महिलाओं को भी प्राथमिकता

मायावती ने उम्मीदवार चयन को लेकर एक और संदेश दिया है।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि उम्मीदवार तय करते समय सर्वसमाज के योग्य लोगों के साथ युवाओं और महिलाओं को भी प्राथमिकता दी जाए।
इससे संकेत मिलता है कि BSP 2027 में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ नए और युवा मतदाताओं तक भी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

Gen-Z पर अचानक इतना फोकस क्यों?

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में युवा मतदाता लगभग सभी प्रमुख पार्टियों के केंद्र में आ गए हैं।
हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज के coaching hubs से लेकर नोएडा और दूसरे शहरी इलाकों तक करीब 100 विधानसभा सीटें ऐसी मानी जा रही हैं, जहां युवा मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रोजगार, भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा और migration जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए अहम हैं।
BJP भी रोजगार और युवा योजनाओं पर जोर बढ़ा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने छात्र संगठन और युवा अभियान के जरिए इस वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में BSP का करीब 50 प्रतिशत युवा भागीदारी वाला संदेश सीधे इसी चुनावी मुकाबले से जुड़ता दिखाई देता है।

पहले भी Gen-Z को लेकर बयान दे चुकी हैं मायावती

यह पहली बार नहीं है जब मायावती ने Gen-Z और Gen-Alpha के मुद्दे उठाए हैं।
कुछ दिन पहले उन्होंने पार्टी की राज्य इकाइयों से कहा था कि युवाओं और छात्रों की समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों तक जाएं और शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कराने का प्रयास करें।
हालांकि उन्होंने कार्यकर्ताओं को धरना-प्रदर्शन और आंदोलन से दूरी बनाए रखते हुए संगठन और चुनावी काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी।
यानी BSP युवाओं के मुद्दे उठाना चाहती है, लेकिन उसकी रणनीति सड़क के आंदोलन के बजाय प्रशासनिक हस्तक्षेप और चुनावी संगठन पर केंद्रित है।

नौकरी, शिक्षा और रोजगार पर मायावती का फोकस

मायावती ने अपने पिछले शासनकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि BSP सरकारों के दौरान सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी, रोजगार और शहरी-ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया गया था।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की मूल जरूरतों को भी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ पूरा करने की जरूरत है।
यानी BSP की कोशिश Gen-Z की राजनीति को केवल सोशल मीडिया या युवा चेहरों तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों से जोड़ने की है।

आंबेडकरवादी राजनीति से जोड़ा युवा अभियान

मायावती ने संगठन में युवाओं को आगे लाने की रणनीति को बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की राजनीति और संवैधानिक मूल्यों से भी जोड़ा है।
उनका कहना है कि नई पीढ़ी के जरिए आंबेडकरवादी राजनीति और समानता आधारित संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
यह संदेश खास तौर पर ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में दलित और युवा मतदाताओं को लेकर BSP और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती दिखाई दे रही है।

अखिलेश भी ‘नीले’ रंग से बढ़ा रहे दलित-युवा संपर्क

समाजवादी पार्टी ने हाल में अपनी छात्र इकाई के लिए नीली टी-शर्ट और जींस वाला नया ड्रेस कोड अपनाया है।
अखिलेश यादव इसे आंबेडकर, संविधान और बहुजन विचार से जोड़ रहे हैं। दूसरी ओर BSP इस तरह के प्रतीकात्मक बदलावों पर सवाल उठा चुकी है।
यानी 2027 से पहले दलित + युवा वोट को लेकर सपा और BSP दोनों की सक्रियता बढ़ रही है।

आकाश आनंद के बाद युवाओं की रणनीति पर और नजर

BSP में युवा नेतृत्व का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि मायावती ने हाल में अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया था।
इसके बाद पार्टी में भविष्य के युवा नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है। रिपोर्टों में उनके छोटे भाई ईशान आनंद की बढ़ती सक्रियता का भी जिक्र किया गया है।
ऐसे समय में मायावती की ओर से संगठन में करीब 50 प्रतिशत युवा भागीदारी की बात करना केवल चुनावी रणनीति ही नहीं, बल्कि BSP के भविष्य के संगठनात्मक ढांचे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

परिवार की राजनीति पर भी मायावती ने दिया संदेश

मायावती ने अपने परिवार को लेकर भी कहा कि उन्होंने कांशीराम की तरह अपने भाई-बहनों, परिवार के युवाओं और करीबी रिश्तेदारों को पार्टी के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक या मंत्री जैसे पदों का लाभ नहीं दिया।
यह बयान उस समय आया है जब आकाश आनंद को लेकर BSP के भीतर कई दिनों से राजनीतिक चर्चा चल रही है।
इसलिए इसे पार्टी में अनुशासन और व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर संगठन को रखने के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या Gen-Z BSP की 2027 की तस्वीर बदल पाएगा?

BSP की असली चुनौती केवल युवा नेताओं को संगठन में शामिल करना नहीं होगी।
पार्टी को यह भी साबित करना होगा कि वह रोजगार, परीक्षा, सरकारी भर्ती, शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर बाकी राजनीतिक दलों से अलग क्या पेश करती है।
2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में BJP सत्ता की हैट्रिक की तैयारी कर रही है, समाजवादी पार्टी PDA और युवा मतदाताओं पर फोकस बढ़ा रही है और कांग्रेस भी सामाजिक न्याय व रोजगार के मुद्दे उठा रही है।
ऐसे में मायावती ने Gen-Z को करीब 50% संगठनात्मक भागीदारी और टिकट में प्राथमिकता का संदेश देकर BSP की तरफ से नया चुनावी दांव चल दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नई पीढ़ी को संगठन और टिकट में बड़ी हिस्सेदारी देकर मायावती BSP के पुराने वोट बैंक के साथ नए युवा मतदाताओं को भी जोड़ पाएंगी?

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