68500 शिक्षक भर्ती पर लखनऊ में उबाल, केशव मौर्य के आवास का घेराव; पुलिस से धक्का-मुक्की
68500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी शनिवार सुबह डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के आवास पहुंचे। आरक्षण विवाद और पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश को लागू करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस के रोकने पर धक्का-मुक्की भी हुई।
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उत्तर प्रदेश की 68500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सड़क पर पहुंच गया है। नियुक्ति और आरक्षण से जुड़ी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने लखनऊ में डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया और पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग उठाई।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 12 सितंबर 2026
खबर में खास
- डिप्टी CM केशव मौर्य के आवास पर पहुंचे शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी
- पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश को लागू करने की मांग
- प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई धक्का-मुक्की
लखनऊ में केशव मौर्य के आवास पर पहुंचे अभ्यर्थी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 68500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार सुबह बड़ी संख्या में शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लखनऊ स्थित आवास पहुंच गए।
अभ्यर्थियों ने आवास के बाहर करीब आधे घंटे तक नारेबाजी की। उनकी मांग थी कि भर्ती में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों का समाधान किया जाए और उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का अनुपालन किया जाए।
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर सक्रिय हो गई। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई।
इसी दौरान अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
सुबह 8 बजे ही पहुंच गए थे अभ्यर्थी
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारी सुबह करीब 8 बजे ही डिप्टी CM के आवास के पास पहुंच गए थे।
अभ्यर्थियों की मांग थी कि उनकी केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कराई जाए, ताकि वे भर्ती से जुड़े अपने मामले को सीधे उनके सामने रख सकें।
प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी CM से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर बातचीत कर मामले का समाधान कराने की भी मांग की।
आखिर क्या है अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग?
इस पूरे विवाद के केंद्र में OBC अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में पांच प्रतिशत छूट देने का मामला है।
उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 2026 में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े मामले में अपनी पहले की संस्तुति को बरकरार रखा था।
आयोग का कहना था कि OBC अभ्यर्थियों को अर्हता अंक में पांच प्रतिशत की छूट दी जानी चाहिए। इसके मुताबिक 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत या उससे अधिक अंक पाने वाले पात्र OBC अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण माना जाए। आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से इस पर कार्रवाई कर जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा था।
अब आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग इसी आदेश के अनुपालन को लेकर है।
'आयोग का आदेश लागू हो'
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों के कारण वे लंबे समय से प्रभावित हैं।
उनका दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से उनके पक्ष में स्पष्ट आदेश और संस्तुति आने के बावजूद अब तक उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
अभ्यर्थी संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र उम्मीदवारों को नियमानुसार नियुक्ति देने की मांग उठा रहे हैं।
पहले बेसिक शिक्षा मंत्री का भी घेर चुके हैं आवास
यह पहली बार नहीं है जब 68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी राजधानी में किसी मंत्री के आवास तक पहुंचे हैं।
इसी महीने 1 सितंबर को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का भी घेराव किया था। उस समय भी प्रदर्शनकारियों ने पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति लागू करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग उठाई थी।
यानि करीब दो सप्ताह के भीतर भर्ती अभ्यर्थियों का यह दूसरा बड़ा राजनीतिक घेराव है।
2018 की भर्ती, 2026 में भी क्यों जारी है विवाद?
68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा वर्ष 2018 से जुड़ी है।
इसके बाद से भर्ती के अलग-अलग पहलुओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चलता रहा है। मौजूदा प्रदर्शन खास तौर पर OBC अभ्यर्थियों के qualifying marks और आरक्षण संबंधी विवाद से जुड़ा है।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने जुलाई 2026 में अपने फैसले में पांच प्रतिशत की छूट की पुरानी संस्तुति को बरकरार रखते हुए विभाग को आगे की कार्रवाई करने को कहा था।
इसके बावजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि समाधान अभी तक जमीन पर नहीं उतरा है।
बार-बार प्रदर्शन, अब डिप्टी CM से उम्मीद
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें पहले भी समाधान के आश्वासन मिल चुके हैं, लेकिन उनका मामला लंबित बना हुआ है।
यही वजह है कि इस बार प्रदर्शनकारी सीधे डिप्टी CM के आवास तक पहुंचे और उनसे मुख्यमंत्री के स्तर पर हस्तक्षेप कराने की मांग करने लगे।
68500 शिक्षक भर्ती का मामला अब केवल भर्ती प्रक्रिया का विवाद नहीं रह गया है। लगातार हो रहे धरने और मंत्रियों के आवासों के घेराव ने इसे सरकार के लिए एक संवेदनशील युवा और रोजगार मुद्दा भी बना दिया है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में शिक्षक भर्ती और नौकरियों से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद आने वाले महीनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन सकते हैं।
फिलहाल अभ्यर्थियों की निगाह सरकार के अगले कदम पर है—क्या पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश के आधार पर भर्ती विवाद का समाधान निकलेगा या आंदोलन आगे और तेज होगा?
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