कानपुर में पुलिस चौकी पर 8 घंटे डटे SP विधायक अमिताभ बाजपेई, ACP से भिड़े; आखिर में छोड़ा गया युवक
कानपुर में चोरी के शक में हिरासत में लिए गए युवक को लेकर SP विधायक अमिताभ बाजपेई सिरकी मोहाल पुलिस चौकी पर 8 घंटे धरने पर बैठे। उन्होंने पुलिस पर युवक को पट्टे से पीटने का आरोप लगाया। पुलिस ने आरोप नकारे और पर्याप्त सबूत न मिलने पर युवक को छोड़ दिया।
कानपुर में चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए युवक को लेकर SP विधायक अमिताभ बाजपेई और पुलिस आमने-सामने आ गए। विधायक ने पुलिस पर युवक को पट्टे से पीटने और झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए सिरकी मोहाल पुलिस चौकी पर करीब आठ घंटे धरना दिया। ACP से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने मारपीट के आरोप को गलत बताया और कहा कि पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के बाद युवक को छोड़ दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कानपुर | 15 सितंबर 2026
कानपुर की सिरकी मोहाल पुलिस चौकी पर युवक की रिहाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे SP विधायक अमिताभ बाजपेई।
खबर में खास
पुलिस चौकी पर करीब 8 घंटे चला विधायक का धरना
पुलिस पर युवक को पट्टे से पीटने का आरोप
ACP और अमिताभ बाजपेई के बीच तीखी नोकझोंक
पर्याप्त सबूत न मिलने पर पुलिस ने युवक को छोड़ा
कानपुर में चोरी के शक में हिरासत में लिए गए एक युवक को लेकर सोमवार को पुलिस और समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई आमने-सामने आ गए।
मामला इतना बढ़ा कि विधायक सिरकी मोहाल पुलिस चौकी के बाहर धरने पर बैठ गए और करीब आठ घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा।
इस दौरान विधायक की ACP कोतवाली अमित कुमार पांडेय से तीखी बहस भी हुई।
आखिरकार पुलिस ने युवक को छोड़ दिया, जिसके बाद विधायक ने अपना धरना खत्म किया।
चोरी के किस मामले से शुरू हुआ विवाद?
घुमनी बाजार निवासी और द्वारिकाधीश मंदिर के मैनेजर राजेश अग्रवाल के घर शनिवार रात चोरी हुई थी।
शिकायत के मुताबिक घर से ₹3.50 लाख नकद और करीब डेढ़ किलो चांदी समेत लगभग सात लाख रुपये का सामान चोरी हुआ।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
CCTV फुटेज की जांच के आधार पर इलाके के अमन अग्रवाल को संदिग्ध मानते हुए पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
युवक को पीटने का आरोप, चौकी पहुंचे विधायक
अमिताभ बाजपेई का आरोप है कि पूछताछ के दौरान अमन को पुलिस ने पट्टे से पीटा।
युवक के परिजनों और स्थानीय लोगों से इसकी जानकारी मिलने के बाद विधायक सिरकी मोहाल पुलिस चौकी पहुंच गए।
उन्होंने युवक को निर्दोष बताते हुए उसे छोड़ने और कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग की।
हालांकि पुलिस ने युवक के साथ मारपीट करने के आरोप को खारिज किया है।
हाथ में पट्टा लेकर बोले- ‘प्रजातंत्र नहीं, पट्टातंत्र’
धरने के दौरान अमिताभ बाजपेई हाथ में एक पट्टा लेकर बैठे दिखाई दिए।
उन्होंने BJP सरकार पर निशाना साधते हुए इसे ‘प्रजातंत्र नहीं, पट्टातंत्र’ बताया और पुलिस सहायता केंद्र को कथित तौर पर प्रताड़ना केंद्र बनाने का आरोप लगाया।
विधायक का आरोप था कि उन्हें चौकी पर पट्टा मिला और युवक ने इसी पट्टे से पिटाई किए जाने की बात कही।
यह आरोप विधायक और युवक की तरफ से लगाया गया है; पुलिस इससे इनकार कर रही है।
₹5000 और दो चांदी के सिक्के लेकर क्यों बैठे विधायक?
इस पूरे घटनाक्रम का एक और असामान्य पहलू सामने आया।
अमिताभ बाजपेई ने दावा किया कि चौकी प्रभारी ने कथित तौर पर ₹5000 और दो चांदी के सिक्कों की बरामदगी दिखाकर मामला खोलने की बात कही थी।
इसके विरोध में विधायक खुद ₹5000 और दो चांदी के सिक्के लेकर धरने पर बैठ गए।
जागरण के मुताबिक विधायक ने इसे पुलिस के कथित तरीके के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध के रूप में पेश किया।
इस आरोप पर पुलिस की ओर से स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
‘ACP साहब, ज्ञान मत दीजिए’
धरने के बीच ACP कोतवाली अमित कुमार पांडेय मौके पर पहुंचे।
इसके बाद विधायक और ACP के बीच तीखी बहस हुई।
ACP ने पुलिस जांच और संदिग्धों से पूछताछ की प्रक्रिया का पक्ष रखा।
इस पर विधायक ने उन्हें टोकते हुए कहा कि उन्हें “ज्ञान” न दिया जाए और सवाल किया कि युवक के खिलाफ ऐसा कौन-सा सबूत था जिसके आधार पर उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
SP विधायक के समर्थन में BJP पार्षद भी
इस घटना का एक दिलचस्प राजनीतिक पहलू यह भी रहा कि धरने में केवल समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग नहीं पहुंचे।
रिपोर्ट के मुताबिक व्यापारिक संगठनों और बार एसोसिएशन से जुड़े लोगों के साथ BJP के कुछ पार्षद और कार्यकर्ता भी समर्थन में धरने पर पहुंचे।
यही point इस खबर को केवल SP बनाम BJP की राजनीतिक लड़ाई से अलग बनाता है।
पुलिस ने क्या कहा?
ACP अमित कुमार पांडेय ने विधायक के आरोपों से इनकार किया।
पुलिस का कहना है कि युवक को चोरी के मामले में संदेह के आधार पर पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
पुलिस ने मारपीट के आरोप को गलत बताया।
ACP के मुताबिक युवक के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया।
यानी युवक की रिहाई को यह लिखना कि “विधायक ने पुलिस से जबरन छुड़ा लिया” पूरी तरह संतुलित framing नहीं होगी।
सही तथ्य यह है कि विधायक ने उसकी रिहाई की मांग को लेकर धरना दिया और पुलिस का कहना है कि पर्याप्त सबूत न मिलने के बाद युवक को छोड़ दिया गया।
8 घंटे बाद खत्म हुआ धरना
करीब आठ घंटे तक चले प्रदर्शन और बातचीत के बाद पुलिस ने अमन को छोड़ दिया।
इसके बाद अमिताभ बाजपेई ने अपना धरना खत्म किया।
अब इस मामले में दो अलग पक्ष हैं—विधायक युवक के साथ पुलिस मारपीट और उसे गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पुलिस मारपीट से इनकार कर रही है।