अपनी ही सरकार में दूसरी बार धरने पर बैठे संजय निषाद, लखनऊ के बाद गोंडा में मोर्चा; जानिए किस मामले ने बढ़ाई नाराजगी
गोंडा के विनोद साहनी की मौत के मामले में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने पहले लखनऊ के KGMU और फिर गोंडा में धरना दिया। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन के बावजूद मंत्री ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा, नौकरी और कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद अधिकारियों के रवैये से नाराज दिखाई दिए। पार्टी से जुड़े विनोद साहनी की मौत के मामले में उन्होंने लखनऊ के बाद गोंडा में मोर्चा खोल दिया और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
लखनऊ/गोंडा। उत्तर प्रदेश में गोंडा के व्यापारी और निषाद पार्टी से जुड़े विनोद कुमार साहनी की मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अपनी ही सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को न्याय की मांग लेकर पहले लखनऊ और फिर गोंडा में धरने पर बैठना पड़ा। अधिकारियों के रवैये से नाराज मंत्री ने साफ कहा कि मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और पीड़ित परिवार को पूरा न्याय मिलना चाहिए।
विनोद साहनी की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत होने के बाद संजय निषाद गुरुवार देर शाम KGMU के शवगृह के बाहर धरने पर बैठ गए थे। इसके अगले दिन उन्होंने गोंडा पहुंचकर अपना विरोध जारी रखा। एक सत्तारूढ़ सहयोगी दल के प्रमुख और सरकार के कैबिनेट मंत्री का अधिकारियों के विरुद्ध सड़क पर उतरना अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
क्या है विनोद साहनी की मौत का मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र निवासी विनोद कुमार साहनी पर एक विवाद के बाद कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल विनोद को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद हमले के तरीके को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। संजय निषाद ने शुरुआत में गोली और धारदार हथियार से हमला किए जाने की बात कही थी। हालांकि, बाद में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली अथवा चाकू का घाव नहीं मिलने और लाठी-डंडों से लगी चोटों को मौत की वजह बताए जाने की जानकारी सामने आई। मामले की वास्तविक परिस्थितियों की जांच पुलिस कर रही है।
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद हुई पुलिस कार्रवाई से संजय निषाद पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखाई दिए और उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
लखनऊ के KGMU में क्यों दिया धरना?
विनोद साहनी की मौत के बाद उनका शव KGMU के शवगृह में रखा गया था। संजय निषाद पीड़ित परिवार के साथ वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआत से मामले में गंभीरता नहीं दिखाई और शिकायत मिलने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि सरकार में शामिल एक मंत्री को न्याय के लिए धरना देना पड़ रहा है, तो सामान्य व्यक्ति की शिकायतों पर अधिकारी कितना ध्यान देते होंगे। उन्होंने दोषी आरोपियों के साथ कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कठोर कार्रवाई की मांग की।
इस प्रदर्शन में विपक्षी नेताओं की उपस्थिति ने मामले को और राजनीतिक बना दिया। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
लखनऊ के बाद गोंडा में खोला मोर्चा
KGMU के बाहर विरोध दर्ज कराने के बाद संजय निषाद गोंडा पहुंचे। उनके आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट, पुलिस कार्यालय, सर्किट हाउस और मृतक के गांव के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय निषाद ने कलेक्ट्रेट के घेराव की चेतावनी दी थी। प्रशासन को आशंका थी कि विभिन्न क्षेत्रों से निषाद पार्टी के कार्यकर्ता और समुदाय के लोग बड़ी संख्या में गोंडा पहुंच सकते हैं।
तीन आरोपी गिरफ्तार, तीन पुलिसकर्मी निलंबित
मामले में पुलिस ने तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही कथित लापरवाही के आरोप में थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी और बीट प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन कार्रवाइयों के बावजूद संजय निषाद ने अपना विरोध समाप्त नहीं किया। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए सभी जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा मिल सके।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन की पुष्टि की गई है।
पीड़ित परिवार के लिए रखीं ये मांगें
संजय निषाद ने इस मामले में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के भविष्य से जुड़ी मांगें भी उठाई हैं। उनकी प्रमुख मांगों में परिवार को सुरक्षा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और मामले की निष्पक्ष जांच शामिल है।
मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला तो निषाद पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू कर सकती है। उन्होंने निषाद समुदाय के लोगों को लगातार निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप संजय निषाद के बयान का हिस्सा हैं और प्रशासन की जांच अभी जारी है।
अपनी सरकार में मंत्री का धरना क्यों बना बड़ा राजनीतिक सवाल?
उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी है और संजय निषाद योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ऐसे में पुलिस एवं प्रशासन के खिलाफ उनका सार्वजनिक धरना गठबंधन और सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
विपक्ष को भी इस घटना के जरिए सरकार पर हमला करने का अवसर मिल गया है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि जब सरकार में शामिल मंत्री को सुनवाई के लिए धरना देना पड़ रहा है, तो प्रदेश के आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार पीड़ित परिवार की मांगों पर क्या फैसला करती है और संजय निषाद अधिकारियों के खिलाफ अपना आंदोलन आगे बढ़ाते हैं या प्रशासन के आश्वासन के बाद इसे समाप्त करते हैं।
