‘जनवरी के बाद आचार संहिता, फिर 1 लाख नौकरियां कैसे?’ योगी के मेगा ऐलान पर अखिलेश ने पूछा पूरा हिसाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह महीने में एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र देने का लक्ष्य रखा है। अखिलेश यादव ने समयसीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनवरी के बाद चुनाव आचार संहिता लग सकती है, ऐसे में सरकार अपना वादा कैसे पूरा करेगी?

योगी आदित्यनाथ के एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र के ऐलान पर सवाल उठाते अखिलेश यादव

यूपी में एक लाख सरकारी नियुक्तियों के ऐलान पर सियासी संग्राम शुरू हो गया है। अखिलेश यादव ने आचार संहिता का हवाला देकर योगी सरकार से भर्ती का पूरा रोडमैप मांगा। जानिए सरकार ने क्या वादा किया और सपा अध्यक्ष ने किन मुद्दों पर घेरा।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी नौकरियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अगले छह महीने में युवाओं को एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र देने का लक्ष्य रखा है। अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घोषणा की समयसीमा और इसे पूरा करने की सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए हैं।

 

अखिलेश यादव ने कहा कि जनवरी के बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की संभावना है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के छह महीने में एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र देने के लक्ष्य पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आचार संहिता और भर्ती की समयसीमा को लेकर सवाल उठाए हैं।

ऐसे में सरकार छह महीने के भीतर एक लाख नियुक्तियां कैसे पूरी करेगी? सपा अध्यक्ष ने इसे चुनाव से पहले किया गया बड़ा वादा बताते हुए सरकार से भर्ती प्रक्रिया, खाली पदों और विभागवार नियुक्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

 

योगी सरकार के ऐलान पर अखिलेश का सीधा सवाल

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “जनवरी के बाद तो आचार

संहिता लग जाएगी, कैसे देंगे एक लाख नौकरी?”

 

उन्होंने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। यह अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का राजनीतिक आरोप है। सरकार की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है।

अखिलेश का मुख्य सवाल यह है कि एक लाख नियुक्ति-पत्र जारी करने के लिए सरकार के पास कितने पद चिह्नित हैं, कितनी भर्तियों की अधिसूचना जारी हो चुकी है और चयन प्रक्रिया को निर्धारित समय में किस तरह पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी ने क्या घोषणा की थी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 अगस्त को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार अगले छह महीने के भीतर युवाओं को एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार में भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि चयन में किसी प्रकार की सिफारिश, भेदभाव या भ्रष्टाचार को जगह नहीं दी जाएगी।

द प्रिंट की पीटीआई आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने और नियुक्ति-पत्र वितरित करने की बात कही थी।

सरकार इसे रोजगार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसकी समयसीमा और जमीनी तैयारी पर सवाल उठा रहा है।

‘नौकरी’ और ‘नियुक्ति-पत्र’ में क्या अंतर है?

सरकार की घोषणा को समझने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मुख्यमंत्री ने एक लाख नई नौकरियों का विज्ञापन जारी करने के बजाय छह महीने में एक लाख सरकारी नियुक्ति-पत्र देने की बात कही है।

इस संख्या में वे भर्तियां भी शामिल हो सकती हैं जिनकी परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन अथवा चयन प्रक्रिया पहले से चल रही है। हालांकि, विभागवार विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें कितनी भर्तियां नई हैं और कितनी पहले से जारी चयन प्रक्रियाओं से जुड़ी हैं।

इसी बिंदु को लेकर विपक्ष सरकार से विस्तृत रोडमैप की मांग कर रहा है। अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी भर्ती की अधिसूचना, पदों की संख्या, परीक्षा की तारीख और नियुक्ति की वास्तविक समयसीमा होगी।

पुलिस भर्ती को उदाहरण बना रही सरकार

योगी सरकार इससे पहले 60,244 पुलिस कांस्टेबलों को नियुक्ति-पत्र देने के कार्यक्रम को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर चुकी है। भर्ती प्रक्रिया में 48 लाख से ज्यादा आवेदन आने की जानकारी दी गई थी और चयनित अभ्यर्थियों में 12 हजार से अधिक महिलाएं शामिल थीं।

सरकार का दावा रहा है कि भर्ती बिना सिफारिश और पूरी पारदर्शिता से हुई। अब एक लाख अतिरिक्त नियुक्ति-पत्र देने की घोषणा को इसी अभियान के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, विपक्ष का कहना है कि केवल नियुक्तियों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि अलग-अलग विभागों में कितने स्वीकृत पद खाली हैं और भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर क्या है।

रक्षाबंधन की मुफ्त बस सेवा पर भी उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने सरकारी नौकरियों के साथ रक्षाबंधन पर महिलाओं को मुफ्त बस सेवा देने के दावे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की महिलाएं मुफ्त बसों का इंतजार करती रह गईं और कई स्थानों पर उन्हें यह सुविधा नहीं मिली।

यह समाजवादी पार्टी का दावा है। मुफ्त यात्रा की वास्तविक उपलब्धता अलग-अलग रूट और परिवहन सेवाओं के आधार पर भिन्न हो सकती है। इस पर परिवहन विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आना आवश्यक है।

अस्पताल और स्कूलों को लेकर भी साधा निशाना

सपा अध्यक्ष ने सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाइयों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए। इसके साथ उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 26 हजार स्कूल बंद किए गए और इससे विशेष रूप से PDA तथा आदिवासी समाज के विद्यार्थियों पर असर पड़ा।

स्कूलों की संख्या और उन्हें बंद अथवा विलय किए जाने को लेकर सरकार तथा विपक्ष के दावे अलग-अलग रहे हैं। इसलिए सपा अध्यक्ष के इस आंकड़े को राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना रहा है कि कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों के समायोजन का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग करना है।

2027 से पहले रोजगार बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा

उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी, पेपर लीक, लंबित भर्तियां और सरकारी पद लंबे समय से महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए भाजपा और समाजवादी पार्टी—दोनों रोजगार के सवाल पर अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं।

योगी सरकार एक लाख नियुक्ति-पत्र देने की घोषणा को युवाओं के लिए बड़े अवसर के रूप में पेश कर रही है। दूसरी तरफ अखिलेश यादव इसे चुनाव से पहले किया गया ऐसा वादा बता रहे हैं, जिसकी समयसीमा और प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार आचार संहिता लागू होने से पहले भर्ती प्रक्रिया पूरी करके एक लाख युवाओं को नियुक्ति-पत्र दे पाएगी? इसका जवाब राजनीतिक भाषणों से नहीं, आने वाले महीनों में जारी होने वाले विभागवार विज्ञापनों, परीक्षाओं और वास्तविक नियुक्तियों से मिलेगा।

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