बिहार के 8.27 लाख परिवारों को मिलेंगे ₹7000, लिस्ट में नाम नहीं तो क्या करें? जानें किसे मिलेगा पैसा
बिहार के 8.27 लाख परिवारों को मिलेंगे ₹7000, लिस्ट में नाम नहीं तो क्या करें? जानें किसे मिलेगा पैसा
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बिहार सरकार बाढ़ से प्रभावित 8.27 लाख से अधिक परिवारों को ₹7000 प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता दे रही है। कुल ₹579.23 करोड़ DBT के जरिए बैंक खातों में भेजे जाने हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है—पैसा किसे मिलेगा, क्या आवेदन करना होगा और अगर सूची में नाम नहीं है तो क्या होगा? यहां बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए पूरी जानकारी आसान भाषा में समझिए।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | पटना | 15 सितंबर 2026
खबर में खास
- ₹7000 प्रति बाढ़ प्रभावित परिवार
- 8,27,472 परिवार फिलहाल चिह्नित
- कुल ₹579.23 करोड़ की सहायता
- लिस्ट से छूटे पात्र परिवारों के लिए प्रक्रिया जारी रह सकती है
अगर आपका परिवार बिहार में आई बाढ़ से प्रभावित हुआ है तो यह खबर आपके लिए सीधे काम की है।
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को ₹7000 प्रति परिवार आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की है।
फिलहाल राज्य के 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों का विवरण सरकार के पास पहुंच चुका है और इनके लिए कुल ₹579.23 करोड़ की अनुग्रह सहायता तय की गई है।
लेकिन यहां कई सवाल हैं।
₹7000 किसे मिलेगा?
क्या इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा?
पैसा किस बैंक खाते में आएगा?
और सबसे महत्वपूर्ण—अगर बाढ़ आई लेकिन आपका नाम लिस्ट में नहीं है तो क्या होगा?
आइए एक-एक सवाल का जवाब समझते हैं।
₹7000 किसे मिलेगा?
यह सहायता हर व्यक्ति को अलग-अलग नहीं दी जा रही।
सरकार प्रति प्रभावित परिवार (Household) ₹7000 की अनुग्रह सहायता दे रही है।
इसके लिए उन परिवारों को पात्र माना जा रहा है जिन्हें स्थानीय प्रशासन के सर्वे में बाढ़ प्रभावित पाया गया है।
इसलिए एक परिवार में पांच सदस्य होने का अर्थ ₹35,000 मिलना नहीं है।
राशि ₹7000 प्रति पात्र परिवार है।
सरकार कैसे तय कर रही है कि कौन बाढ़ प्रभावित है?
लाभार्थियों की सूची प्रशासनिक सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
प्रभावित जिलों में अंचलाधिकारियों की रिपोर्ट और स्थानीय प्रशासन के सर्वे के जरिए परिवारों की पहचान की गई।
इसमें घर में बाढ़ का पानी आने और परिवार पर बाढ़ के प्रभाव जैसी स्थितियों को देखा गया है।
यानी केवल बाढ़ प्रभावित जिले में रहने से अपने-आप ₹7000 मिलने की गारंटी नहीं है।
परिवार का प्रशासनिक सर्वे में पात्र पाया जाना महत्वपूर्ण है।
क्या ₹7000 के लिए आवेदन करना पड़ेगा?
मौजूदा प्रक्रिया में लाभार्थियों की पहचान स्थानीय प्रशासन के सर्वे और अंचलाधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
इसी विवरण के आधार पर लाभार्थियों का डेटाबेस तैयार किया गया है।
उदाहरण के लिए लखीसराय में पात्र परिवारों की सूची संपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कर बैंक खाते और आधार का सत्यापन कराया गया।
बिहार सरकार का आपदा संपूर्ति पोर्टल भी 2026 बाढ़ राहत के लिए सक्रिय है।
बिहार आपदा संपूर्ति पोर्टल देखें
पैसा कैसे मिलेगा?
₹7000 की सहायता DBT यानी Direct Benefit Transfer के माध्यम से पात्र परिवार के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
इसलिए बैंक खाते से संबंधित विवरण का सही और सत्यापित होना महत्वपूर्ण है।
कई जिलों में प्रशासन ने भुगतान से पहले बैंक खाते, आधार और अन्य विवरणों का सत्यापन कराया है।
अगर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या होगा?
यही इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा है कि कोई भी पात्र बाढ़ प्रभावित परिवार अनुग्रह सहायता से वंचित नहीं रहेगा।
इसका मतलब यह है कि अभी घोषित 8,27,472 परिवारों की संख्या अंतिम सीमा जरूरी नहीं है।
सत्यापन में छूटे वास्तविक पात्र परिवारों को बाद की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। जागरण की रिपोर्ट में भी लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना बताई गई है।
हालांकि यहां एक बात महत्वपूर्ण है—“नाम नहीं है तो अपने-आप बाद में ₹7000 आ जाएगा” ऐसा मानना सही नहीं होगा।
पात्रता और प्रशासनिक सत्यापन जरूरी रहेगा।
किन 15 जिलों के लोग प्रभावित?
इस साल बाढ़ से बिहार के 15 जिलों के 88 प्रखंड और 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित बताई गई हैं।
इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।
करीब 49.46 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।
क्या हर प्रभावित व्यक्ति को ₹7000 मिलेगा?
नहीं।
इस अंतर को समझना जरूरी है।
करीब 49.46 लाख की संख्या प्रभावित आबादी की है, जबकि ₹7000 की सहायता प्रति पात्र परिवार दी जा रही है।
अभी 8,27,472 परिवार भुगतान के लिए चिह्नित किए गए हैं।
सिर्फ ₹7000 ही मिल रहा है?
बाढ़ राहत केवल नकद सहायता तक सीमित नहीं है।
15 सितंबर की उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में 1,260 सामुदायिक रसोई संचालित थीं और इनके माध्यम से 1.19 करोड़ से अधिक बार भोजन उपलब्ध कराया जा चुका था।
13 राहत शिविरों में 11,060 लोगों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।
आपके खाते में ₹7000 नहीं आए तो क्या देखें?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि केवल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहना पर्याप्त नहीं है।
आपके परिवार का स्थानीय प्रशासन के सर्वे में शामिल और पात्र होना जरूरी है।
इसके बाद बैंक खाते और पहचान से संबंधित विवरण भी सही होने चाहिए।
यदि आप वास्तव में प्रभावित हैं लेकिन सूची में नाम नहीं है, तो स्थानीय अंचल/प्रखंड प्रशासन से अपने परिवार के सर्वे और सत्यापन की स्थिति की जानकारी लेना व्यावहारिक अगला कदम है, क्योंकि लाभार्थियों की सूची इन्हीं प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार हुई है।
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