रायबरेली में राजा भैया का बड़ा बयान, बोले- Gen-Z आंदोलन में आतंकियों की जय-जयकार हुई; अब शास्त्र के साथ शस्त्र भी जरूरी

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में BJP ने 10 प्रमुख नगर निगमों में से 6 पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3 में सफलता मिली। जयपुर में BJP मजबूत रही, वहीं जोधपुर और पाली में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया। भरतपुर में निर्दलीयों ने समीकरण बदला।

Raja Bhaiya speaking in Raebareli on Gen-Z protest controversy

रायबरेली के ऊंचाहार में राजा भैया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP आंदोलन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में भारत विरोधी नारे और आतंकियों के समर्थन में नारे लगाए गए। राजा भैया ने Gen-Z शब्द, कथित विदेशी फंडिंग और प्रदर्शनकारियों की भाषा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब शास्त्र के साथ शस्त्र भी धारण करना होगा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | रायबरेली | 14 सितंबर 2026

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रायबरेली में राजा भैया ने Gen-Z आंदोलन को लेकर भारत विरोधी नारों और कथित विदेशी फंडिंग पर सवाल उठाए।

खबर में खास

  • Gen-Z आंदोलन को लेकर राजा भैया ने उठाए गंभीर सवाल
  • आरोप- प्रदर्शन में भारत विरोधी और आतंकियों के समर्थन में लगे नारे
  • कथित विदेशी फंडिंग और लंदन से खाने के ऑर्डर का किया जिक्र
  • बोले- अब शास्त्र के साथ शस्त्र भी धारण करना होगा
उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक और जनसत्ता दल के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ ने रायबरेली से ऐसा बयान दिया है, जिसने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
राजा भैया ने आरोप लगाया कि पर्चा लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान ऐसी भाषा और नारे सुनाई दिए, जिन्हें किसी भी लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन में भारत विरोधी नारे लगाए गए और आतंकियों के समर्थन में जय-जयकार हुई।

पर्चा लीक के विरोध से आपत्ति नहीं, नारों पर सवाल

राजा भैया ने कहा कि पर्चा लीक के खिलाफ आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्हें इस मुद्दे पर कोई आपत्ति नहीं है।
लेकिन उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल की गई भाषा और नारों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
राजा भैया के मुताबिक आंदोलन में ‘भारत मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए गए और आतंकियों के पक्ष में नारेबाजी हुई। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आरोप राजा भैया के बयान का हिस्सा हैं और इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उसी रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई है।

‘Gen-Z हमारी सभ्यता और संस्कृति से मेल नहीं खाता’

राजा भैया ने अपने भाषण में ‘Gen-Z’ शब्द पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि यह शब्द भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आदर्शों से मेल नहीं खाता।
उनका कहना था कि पश्चिमी शब्दों और सोच को बिना सवाल अपनाना भारतीय सामाजिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। इसी तरह की टिप्पणी का उल्लेख दूसरी रिपोर्ट में भी किया गया है।

विदेशी फंडिंग को लेकर क्या बोले राजा भैया?

राजा भैया ने आंदोलन की कथित फंडिंग को लेकर भी बड़ा आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन दिल्ली में हो रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के लिए पिज्जा और बर्गर का ऑर्डर लंदन से जोमैटो के जरिए कराया जा रहा था।
उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था के पीछे आखिर कौन लोग थे और आंदोलन को किस तरह की मदद मिल रही थी।
फिर भी इस कथित विदेशी फंडिंग या खाने के ऑर्डर से जुड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है, इसलिए इसे राजा भैया का आरोप ही माना जाना चाहिए।

‘शास्त्र के साथ शस्त्र भी धारण करना होगा’

राजा भैया ने अपने संबोधन में सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब केवल शास्त्र ही नहीं, शस्त्र भी धारण करना होगा।
उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को लेकर सजग रहने की अपील की।
उनका यह बयान अब चर्चा का विषय बन गया है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने इसे दिल्ली के हालिया आंदोलन और कथित भारत विरोधी नारों से जोड़कर देखा।

रायबरेली के ऊंचाहार में दिया बयान

राजा भैया शनिवार को रायबरेली के ऊंचाहार पहुंचे थे।
यहां मंत्री मनोज पांडेय के यहां आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में उन्होंने हिस्सा लिया।
उनके साथ उनके बेटे शिवराज प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
राजा भैया ने कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लेने के बाद मंच से दिल्ली के आंदोलन और मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों पर अपनी बात रखी।

आखिर CJP आंदोलन को लेकर विवाद क्या है?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP से जुड़े प्रदर्शन को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हुई है।
राजा भैया का कहना है कि आंदोलन का मूल मुद्दा पर्चा लीक था, लेकिन विरोध की भाषा और कथित नारे उस मुद्दे से अलग दिशा में चले गए।
यही वजह है कि उन्होंने आंदोलन की भाषा, विचार और कथित फंडिंग—तीनों पर सवाल उठाए।
हालांकि आंदोलन से जुड़े सभी दावों और आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है, क्योंकि राजनीतिक बयान और आधिकारिक निष्कर्ष अलग-अलग चीजें हैं।

बयान क्यों है राजनीतिक रूप से अहम?

राजा भैया पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और उनके बयानों का राजनीतिक असर अक्सर कुंडा से बाहर भी दिखाई देता है।
इस बार उन्होंने सीधे Gen-Z आंदोलन, कथित भारत विरोधी नारे और विदेशी प्रभाव जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़ा है।
इसलिए उनका यह बयान केवल एक धार्मिक मंच की टिप्पणी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अब यह युवा आंदोलनों, राष्ट्रवाद और विरोध की सीमाओं पर बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।
राजा भैया के आरोपों पर आंदोलन से जुड़े पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आती है तो इस पूरे विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।

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