UP चुनाव 2027: BJP छोड़ अखिलेश के पास लौटेंगे पूर्व मंत्री साहब सिंह सैनी! 3 नवंबर को सपा में वापसी का ऐलान, नकुड़ सीट को लेकर चर्चा
सहारनपुर के पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी ने 3 नवंबर को समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में लौटने की घोषणा की है। 12 अक्टूबर को उन्होंने भाजपा छोड़ने की अटकलों से इनकार किया था। अब नकुड़ विधानसभा सीट को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
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UP Election 2027: भाजपा नेता और पूर्व मंत्री साहब सिंह सैनी ने 3 नवंबर को अखिलेश यादव से मुलाकात कर सपा की सदस्यता लेने का ऐलान किया है। पश्चिमी यूपी में नकुड़ सीट और सपा-कांग्रेस के सीट-बंटवारे के बीच उनके फैसले पर चर्चा हो रही है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | सहारनपुर/लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी ने भाजपा छोड़कर सपा में लौटने की घोषणा की।
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3 नवंबर को अखिलेश यादव से मिलकर औपचारिक सदस्यता लेने का कार्यक्रम बताया।
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उनके साथ समर्थकों और सहयोगियों के भी सपा में शामिल होने की योजना।
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12 अक्टूबर को भाजपा छोड़ने की अटकलों को उन्होंने खारिज किया था।
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सहारनपुर की नकुड़ विधानसभा सीट को लेकर टिकट की चर्चा शुरू हुई है, लेकिन कोई घोषणा नहीं हुई।
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पिछले दिनों पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप और पूर्व सांसद राजपाल सैनी सहित अन्य नेता भी सपा में शामिल हुए हैं।
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी यूपी में दल-बदल का नया घटनाक्रम सामने आया है। सहारनपुर के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता साहब सिंह सैनी ने समाजवादी पार्टी में वापस लौटने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि 3 नवंबर को अपने समर्थकों के साथ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे और पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे।
यह घोषणा शुक्रवार देर रात प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में सामने आई। साहब सिंह सैनी पहले भी समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं और 2023 में भाजपा में शामिल हुए थे। अब दोबारा सपा में लौटने की उनकी घोषणा के बाद सहारनपुर की राजनीति में चर्चा शुरू हो गई है।
12 अक्टूबर को भाजपा में रहने की बात, अब वापसी का ऐलान
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है।
12 अक्टूबर को सहारनपुर में सैनी समाज की सभा के दौरान साहब सिंह सैनी ने भाजपा छोड़ने की अटकलों को खारिज किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि वह भाजपा में हैं और आगे भी प्रदेश में भाजपा सरकार देखना चाहते हैं।
इसी सभा में उन्होंने सैनी, शाक्य, मौर्य और कुशवाहा समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
लेकिन करीब 18 दिन बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी में लौटने का फैसला सार्वजनिक कर दिया।
इस बदलाव की वजह को लेकर उन्होंने कोई विस्तृत, सत्यापित स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इसलिए इसे भाजपा नेतृत्व से किसी विशेष नाराजगी का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।
3 नवंबर को अखिलेश यादव से होगी मुलाकात
साहब सिंह सैनी ने बताया कि वह 3 नवंबर को अपने समर्थकों और साथियों के साथ लखनऊ पहुँचेंगे।
यहाँ वह अखिलेश यादव से मुलाकात कर समाजवादी पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करने की योजना रखते हैं।
लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, सैनी का सपा नेतृत्व और यादव परिवार से पहले भी राजनीतिक जुड़ाव रहा है।
हालाँकि, 31 अक्टूबर तक उनकी नई औपचारिक सदस्यता पूरी होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए उन्हें अभी सपा में शामिल हो चुके नेता के रूप में नहीं, बल्कि वापसी की घोषणा करने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत करना सही होगा।
नकुड़ विधानसभा सीट पर क्यों शुरू हुई चर्चा?
साहब सिंह सैनी की वापसी की खबर के बाद सहारनपुर की नकुड़ विधानसभा सीट को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हुई हैं।
मीडिया रिपोर्टों में इस सीट से उनकी संभावित टिकट दावेदारी की चर्चा की गई है। नकुड़ क्षेत्र पहले भी प्रमुख नेताओं के बीच चुनावी मुकाबले के कारण चर्चा में रहा है।
हालांकि, साहब सिंह सैनी ने नकुड़ से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है। सपा ने भी उनके लिए कोई विधानसभा सीट घोषित नहीं की है।
इसलिए फिलहाल टिकट संबंधी चर्चा को संभावित दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
2023 में सपा छोड़ भाजपा में गए थे साहब सिंह सैनी
साहब सिंह सैनी का भाजपा से जुड़ने का फैसला जुलाई 2023 में सामने आया था।
24 जुलाई 2023 को लखनऊ में भाजपा मुख्यालय पर उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई थी। इससे पहले वह समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके थे।
अब करीब तीन साल बाद सपा में लौटने की घोषणा उनके राजनीतिक सफर का नया चरण है।
यहाँ यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि साहब सिंह सैनी और पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी अलग-अलग नेता हैं। दोनों का नाम सहारनपुर की राजनीति से जुड़ा रहा है, इसलिए खबर में इनकी पहचान को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।
भाजपा से सपा में आने वाले दूसरे नेताओं की भी चर्चा
साहब सिंह सैनी से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा और अन्य दलों से जुड़े कई नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली है।
16 अक्टूबर को पूर्व राज्यसभा सदस्य राजपाल सैनी समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनेक नेता सपा में शामिल हुए थे। वहीं 27 अक्टूबर को पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ग्रहण की थी।
इन घटनाओं से यह सामने आता है कि चुनाव से पहले विभिन्न दल अपने संगठनों में नए नेताओं को शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन किसी नेता के दल बदलने से चुनाव में कितने वोट स्थानांतरित होंगे, इसका अनुमान केवल सदस्यता कार्यक्रम से नहीं लगाया जा सकता।
सपा-कांग्रेस गठबंधन और टिकटों पर भी सवाल
सहारनपुर में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की आगामी चुनावी व्यवस्था अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
यदि साहब सिंह सैनी औपचारिक रूप से सपा में शामिल होते हैं और विधानसभा टिकट की दावेदारी करते हैं, तो पार्टी को पहले से सक्रिय उम्मीदवारों और सहयोगी दल के साथ सीट-बंटवारे को भी ध्यान में रखना होगा।
यह स्थिति किसी विशेष उम्मीदवार को टिकट मिलने की पुष्टि नहीं करती।
अब 3 नवंबर को क्या होगा?
साहब सिंह सैनी की घोषणा के अनुसार, मंगलवार, 3 नवंबर को लखनऊ में उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात और औपचारिक सदस्यता का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
उस दिन यह भी स्पष्ट हो सकता है कि उनके साथ कौन-कौन से समर्थक शामिल होते हैं और समाजवादी पार्टी उन्हें कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी देती है या नहीं।
फिलहाल इस घोषणा पर भाजपा के संबंधित प्रदेश नेतृत्व की कोई नई, सत्यापित आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दल बदल रहे नेताओं की भूमिका क्या होगी, और राजनीतिक दल नए तथा पुराने कार्यकर्ताओं के बीच टिकटों की दावेदारी कैसे तय करेंगे?
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