धनंजय सिंह का ऐलान: 2027 में निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव, लेकिन 7 साल की सजा का क्या होगा

जौनपुर के पूर्व सांसद ने कहा कि वह अब जदयू में नहीं हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा के बीच 2024 की दोषसिद्धि और हाईकोर्ट के फैसले ने कानूनी पात्रता का सवाल खड़ा किय

धनंजय सिंह ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 निर्दलीय लड़ने की बात कही है। लेकिन सात साल की सजा और हाईकोर्ट के पुराने फैसले के बाद उनकी पात्रता पर क्या सवाल है? जानिए।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/सिद्धार्थनगर | 5 नवंबर 2026
dhananjay-singh-up-election-2027-independent-candidate.webp
जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह (फाइल फोटो)। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरने की बात कही है।
dhananjay-singh-up-election-2027-independent-candidate.webp
जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह (फाइल फोटो)। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अहम घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वह अगला विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ेंगे और फिलहाल जनता दल यूनाइटेड (JDU) में नहीं हैं। हालांकि उनकी इस घोषणा के साथ एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी जुड़ा है। साल 2024 में एक आपराधिक मामले में मिली सात साल की सजा के बाद क्या वह चुनाव लड़ने के पात्र होंगे?

खबर में खास

  • धनंजय सिंह ने 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़ने की बात कही।
  • पूर्व सांसद के अनुसार, अब उनका जदयू से कोई संबंध नहीं है।
  • 2024 में अपहरण और रंगदारी मामले में सात साल की सजा सुनाई गई थी।
  • हाईकोर्ट ने जमानत दी थी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया था।
  • किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सिद्धार्थनगर में धनंजय सिंह ने क्या कहा?

धनंजय सिंह सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां पत्रकारों ने उनसे 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल पूछा।
उन्होंने कहा कि एक राजनीतिक व्यक्ति चुनाव क्यों नहीं लड़ेगा? उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में वह जदयू में नहीं हैं और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे।
उनका यह बयान 4 नवंबर की रात प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में सामने आया।

जदयू से दूरी, लेकिन कौन-सी सीट चुनेंगे?

धनंजय सिंह उत्तर प्रदेश की रारी विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। परिसीमन के बाद इस क्षेत्र की पहचान मल्हनी विधानसभा सीट के रूप में है।
वह 2002 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2007 में जदयू के टिकट पर विधानसभा पहुंचे और 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा चुनाव जीता।
उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव और 2020 के मल्हनी उपचुनाव में भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हिस्सा लिया था, हालांकि दोनों चुनावों में जीत नहीं मिली।
अब उनकी नई घोषणा से यह सवाल उठा है कि क्या वह फिर मल्हनी से चुनाव लड़ेंगे या कोई दूसरी सीट चुनेंगे। अभी सीट को लेकर उनकी ओर से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।

सात साल की सजा का मामला क्या है?

मार्च 2024 में जौनपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने नमामि गंगे परियोजना के प्रबंधक से जुड़े अपहरण और रंगदारी मामले में धनंजय सिंह तथा उनके एक सहयोगी को सात-सात साल की कैद की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ धनंजय सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
यहीं से उनकी भविष्य की चुनावी पात्रता का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

जमानत मिली तो क्या चुनाव लड़ सकते हैं?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, दो साल या उससे अधिक कारावास की सजा वाली दोषसिद्धि पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता लागू होती है।
सिर्फ जमानत मिलने या अपील लंबित होने से यह अयोग्यता समाप्त नहीं होती। हालांकि सक्षम अपीलीय अदालत दोषसिद्धि पर रोक लगा दे, तो उस रोक के प्रभावी रहने के दौरान अयोग्यता निलंबित हो सकती है।
धनंजय सिंह के मामले में 2024 का हाईकोर्ट आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसके बाद उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने वाला कोई नया प्रमाणित आदेश इस रिपोर्ट की तैयारी के दौरान सामने नहीं आया है।

अब आगे क्या देखना होगा?

धनंजय सिंह ने चुनाव लड़ने की इच्छा सार्वजनिक कर दी है, लेकिन दो सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
पहला, वह किस विधानसभा सीट से मैदान में उतरेंगे? दूसरा, चुनाव के समय उनकी न्यायिक स्थिति क्या होगी?
इसलिए चुनाव लड़ने की घोषणा को चुनाव लड़ने की कानूनी अनुमति नहीं माना जा सकता। उनकी उम्मीदवारी की स्थिति अंतिम न्यायिक आदेशों और निर्वाचन संबंधी कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।

About The Author

Advertisement

LatestNews

राहुल की रैली में नहीं पहुंचे तो यूथ कांग्रेस के 215 पदाधिकारी निलंबित! 200 और को पत्र, ऐप वाली हाजिरी पर भी सवाल
दिल्ली में वोट कटवाने की 787 अर्जियां, BJP के 16 बूथ एजेंटों ने कहा—हमने फॉर्म भरे ही नहीं! SIR पर नया विवाद
विजय की सरकार गिराने के लिए ₹70 करोड़ का ऑफर? तमिलनाडु में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप, DMK-AIADMK का पलटवार
बिहार में डिप्टी CM बदलने की चर्चा! नीतीश के बेटे निशांत का नाम, JDU की बैठक के बीच दो अलग दावे
‘10 साल में 12 बच्चे, एक घर में 132 लोग?’ SIR पर अमित शाह ने राहुल गांधी को दी खुली बहस की चुनौती
ज्ञानेश कुमार का मुखौटा, हथकड़ी और नकली जेल! बेंगलुरु में INDIA गठबंधन का अनोखा प्रदर्शन, SIR पर फिर घमासान
राहुल गांधी पर FIR की मांग हाईकोर्ट ने खारिज की! सिखों पर अमेरिका में दिए बयान को लेकर वाराणसी से प्रयागराज तक चला विवाद