UP Voter List: पीलीभीत में 10,470 संदिग्ध एंट्री के बाद बड़ा आदेश, यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर वोटर लिस्ट की जाँच

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 10 अप्रैल के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्म 6, 7 और 8 की जाँच के निर्देश दिए। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी।

UP Voter List में पीलीभीत और आजमगढ़ की गड़बड़ियों के बाद सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म की जाँच के निर्देश। जानिए क्या है पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 26 अक्टूबर 2026
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पीलीभीत और आजमगढ़ में अनियमितताओं के बाद यूपी में मतदाता सूची की जाँच के निर्देश।

खबर में खास

  • उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड की जाँच होगी।
  • पीलीभीत सदर में 10,470 एंट्री में अनियमितताएं सामने आई थीं।

  • आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विकास यादव नाम की 13 एंट्री मिली थीं।

  • 10 अप्रैल से 24 अक्टूबर तक कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्म 6, 7 और 8 की जाँच के निर्देश हैं।

  • निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

यूपी की वोटर लिस्ट को लेकर चुनाव अधिकारियों का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चुनाव प्रशासन ने व्यापक जाँच के निर्देश दिए हैं।
पीलीभीत और आजमगढ़ में मतदाता सूची से जुड़ी अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज मतदाता फॉर्म की जाँच कराने को कहा है।
यह जाँच उन फॉर्म 6, 7 और 8 पर केंद्रित है, जिनकी एंट्री 10 अप्रैल 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समाप्त होने के बाद की गई थी।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि पीलीभीत जैसी गड़बड़ियां दूसरे जिलों में न दोहराई जाएं।
पीलीभीत में क्या गड़बड़ी सामने आई?
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची की जाँच के दौरान 10,470 एंट्री में अनियमितताएं पाई गईं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच कंप्यूटर सहायक ने फॉर्म 8 की कुल 13,779 एंट्री दर्ज की थीं।
इनमें 10,470 एंट्री स्वीकृत और 3,309 अस्वीकृत हुई थीं। जाँच में स्वीकृत एंट्री से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं।
रिपोर्ट में एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या (EPIC) के साथ अलग-अलग विवरण दिखने की शिकायत का भी उल्लेख किया गया।
इसके बाद संबंधित कंप्यूटर सहायक की सेवाएं समाप्त करने और दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के खिलाफ कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए।
आजमगढ़ में भी सामने आया मामला
पीलीभीत के अलावा आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी मतदाता सूची में संदिग्ध एंट्री मिली थीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र संख्या 347 की मतदाता सूची में विकास यादव नाम की 13 एंट्री सामने आईं।
इन मामलों के बाद चुनाव अधिकारियों ने जाँच का दायरा केवल दो जिलों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश भर में बढ़ाने का निर्देश दिया है।
अब फॉर्म 6, 7 और 8 की जाँच क्यों?

निर्वाचन प्रक्रिया में तीनों फॉर्म अलग-अलग कार्यों के लिए इस्तेमाल होते हैं।

फॉर्म
उपयोग
फॉर्म 6
नया नाम मतदाता सूची में जुड़वाना
फॉर्म 7
नाम शामिल करने पर आपत्ति या हटाने का अनुरोध
फॉर्म 8
मतदाता के विवरण में सुधार या बदलाव
अधिकारियों को इन फॉर्म की संदिग्ध एंट्री की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब कागज पर प्राप्त आवेदनों की डिजिटल एंट्री कंप्यूटर सहायकों के बजाय बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से BLO App पर की जाएगी।
निर्वाचन अधिकारियों को अपने ERONET लॉगिन और पासवर्ड सुरक्षित रखने तथा लंबित शिकायतों का समय पर निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सपा और कांग्रेस की शिकायतें भी आई थीं सामने
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही हैं।
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र को लेकर कांग्रेस ने भी मतदाताओं के विवरण में कथित बड़े पैमाने पर बदलाव का आरोप लगाया था।
चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया के माध्यम से आई शिकायतों की जाँच के दौरान मिली गड़बड़ियां दोबारा नहीं होनी चाहिए।
हालांकि पीलीभीत में अनियमित एंट्री मिलने का अर्थ यह नहीं है कि प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर गड़बड़ी सिद्ध हो गई है। राज्यव्यापी जाँच का उद्देश्य अन्य स्थानों पर ऐसी अनियमितताओं की पहचान करना और उन्हें रोकना है।
लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) और कंप्यूटर सहायकों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी निगरानी में लापरवाही के मामलों में जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
मंडलायुक्तों को मतदाता सूची के काम की निगरानी मजबूत करने को कहा गया है। वहीं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत चुनावी कर्तव्यों के उल्लंघन के कानूनी प्रावधानों की जानकारी अधिकारियों को दी गई है।
अब देखना होगा कि प्रदेशव्यापी समीक्षा में कितनी एंट्री में त्रुटियां मिलती हैं और उन पर क्या कार्रवाई होती है।

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