राहुल की रैली में नहीं पहुंचे तो यूथ कांग्रेस के 215 पदाधिकारी निलंबित! 200 और को पत्र, ऐप वाली हाजिरी पर भी सवाल
दिल्ली की INDIA गठबंधन रैली में गैरहाजिरी पर आठ राज्यों में कार्रवाई; यूपी के पदाधिकारी भी शामिल, पारिवारिक मजबूरी और डिजिटल हाजिरी को लेकर कुछ नेताओं ने उठाए सवाल।
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राहुल गांधी की दिल्ली रैली में गैरहाजिरी पर युवा कांग्रेस के करीब 215 पदाधिकारी निलंबित हुए। 200 और को पत्र भेजे जा रहे हैं। डिजिटल हाजिरी पर भी सवाल उठे।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 5 नवंबर 2026
खबर में खास
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युवा कांग्रेस के करीब 215 पदाधिकारी निलंबित होने की नई रिपोर्ट।
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लगभग 200 अन्य पदाधिकारियों को निलंबन पत्र भेजने की प्रक्रिया जारी।
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मध्य प्रदेश में 60, गुजरात में 49 और उत्तर प्रदेश (मध्य) में 13 पदाधिकारियों पर कार्रवाई।
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रैली में मोबाइल ऐप और बारकोड स्कैनर से उपस्थिति दर्ज हुई।
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कुछ निलंबित पदाधिकारियों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के बाद कांग्रेस के भीतर बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई सामने आई है। रैली में अनुपस्थित रहने वाले युवा कांग्रेस पदाधिकारियों को निलंबित किया जा रहा है।
आठ राज्यों में करीब 215 पदाधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने लगभग 200 और पदाधिकारियों को निलंबन पत्र भेजे जाने की जानकारी दी है।
किन राज्यों में हुई कार्रवाई?
शुरुआती कार्रवाई में मध्य प्रदेश के 60 और गुजरात के 49 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14, उत्तर प्रदेश (मध्य) के 13, हिमाचल प्रदेश के 13 और हरियाणा के 10 पदाधिकारी शामिल थे।
बाद में झारखंड समेत अन्य राज्यों के नाम भी सामने आए। अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में कुल संख्या में अंतर है। TV9 की ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा करीब 215 बताया गया है।
निलंबित लोगों में प्रदेश उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और जिलाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी भी शामिल हैं।
मोबाइल ऐप से कैसे पकड़ी गई गैरहाजिरी?
इस रैली के लिए युवा कांग्रेस ने डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था की थी।
पदाधिकारियों को ‘With IYC’ मोबाइल ऐप और बारकोड स्कैनर के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करानी थी।
मिंटो रोड पर चेक-इन की व्यवस्था की गई थी। कार्यक्रम के बाद संगठन ने डिजिटल रिकॉर्ड की समीक्षा की।
हालांकि, कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट की धीमी गति और तकनीकी समस्याओं के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। इसलिए डिजिटल रिकॉर्ड में अनुपस्थित दिखना और वास्तव में रैली में न पहुंचना हर मामले में एक ही बात हो, यह जरूरी नहीं है।
‘चाचा की तेरहवीं थी, दिल्ली कैसे जाता?’
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया ने अपने निलंबन पर सवाल उठाए हैं।
, राजोरिया का कहना है कि उनके चाचा की तेरहवीं थी, जिसके कारण वह दिल्ली नहीं जा सके।
उन्होंने दावा किया कि संगठन को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी। राजोरिया ने बिना पर्याप्त सुनवाई के कार्रवाई करने पर आपत्ति जताई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की इच्छा व्यक्त की।
मैहर के जिलाध्यक्ष सौरभ शर्मा ने भी पारिवारिक आयोजन के कारण रैली में अनुपस्थित रहने की बात कही है।
ये संबंधित पदाधिकारियों के स्पष्टीकरण हैं; संगठन ने इन सभी मामलों में अंतिम पुनर्विचार का क्या निर्णय लिया है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
युवा कांग्रेस ने कार्रवाई के पक्ष में क्या कहा?
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने संगठनात्मक अनुशासन पर जोर दिया है।
उनके अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पदाधिकारियों की उपस्थिति अपेक्षित थी। उन्होंने रैली में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया।
संगठन का कहना है कि नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना करने वाले पदाधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी थी।
भाजपा ने भी उठाए सवाल
भाजपा ने इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है।
भाजपा नेताओं ने रैली में अनुपस्थित कार्यकर्ताओं के मुद्दे को कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति से जोड़ते हुए राहुल गांधी की आलोचना की।
दूसरी ओर, कांग्रेस इसे अनुशासन और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया बता रही है।
अब 200 और नेताओं के साथ क्या होगा?
युवा कांग्रेस लगभग 200 अतिरिक्त पदाधिकारियों को निलंबन पत्र भेजने की प्रक्रिया में है।
लेकिन पत्र भेजने की प्रक्रिया शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी 200 अतिरिक्त पदाधिकारियों का निलंबन अंतिम रूप से प्रभावी हो चुका है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि जिन पदाधिकारियों ने बीमारी, पारिवारिक शोक या तकनीकी समस्या का कारण बताया है, क्या संगठन उनकी अनुपस्थिति की दोबारा जांच करेगा?
यह मामला केवल एक रैली में उपस्थिति का नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन, डिजिटल निगरानी और कार्यकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर देने से भी जुड़ गया है।
