RMLNLU के दीक्षांत समारोह में CM योगी बोले- वकील सिर्फ केस न लड़ें, विकसित भारत के निर्माण में निभाएं भूमिका

लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून के छात्रों से न्याय, संविधान और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।

RMLNLU के पांचवें दीक्षांत समारोह में CM योगी आदित्यनाथ ने कानून के छात्रों से कहा कि अधिवक्ता का दायित्व सिर्फ मुकदमा लड़ना नहीं, बल्कि समाज में न्याय, कानून के शासन और राष्ट्र निर्माण को मजबूत करना भी है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 17 अक्टूबर 2026
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डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को उनके भविष्य की जिम्मेदारियों का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे से जुड़े युवाओं की भूमिका केवल अदालत में मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें न्याय व्यवस्था, कानून के शासन और देश के विकास में भी योगदान देना होगा। 

खबर में खास

  • RMLNLU का पांचवां दीक्षांत समारोह लखनऊ में आयोजित
  • 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधियां दिए जाने का कार्यक्रम
  • CM योगी ने विकसित भारत 2047 को कानूनी उदाहरण से समझाया
  • कानून के छात्रों से तथ्य, साक्ष्य और तर्क को महत्व देने की अपील
  • न्याय व्यवस्था और Rule of Law को मजबूत करने पर जोर
  • युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान

‘विकसित भारत 2047’ को मुकदमे के उदाहरण से समझाया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों से संवाद करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य को एक काल्पनिक मुकदमे के उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी केस का नंबर 2047 हो और उसका विषय ‘विकसित भारत’ हो, तो इसमें देश के 140 करोड़ नागरिकों को याचिकाकर्ता के रूप में देखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह किसी मामले में अधिवक्ता को अपने पक्ष में तथ्य, साक्ष्य और ठोस तर्क रखने पड़ते हैं, उसी तरह विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। 

कानून के छात्रों से क्या बोले CM योगी?

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि कानून का पेशा समाज में बड़ी जिम्मेदारी वाला क्षेत्र है। एक अधिवक्ता सिर्फ अपने मुवक्किल का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि उसका काम न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने से भी जुड़ा होता है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का इस्तेमाल ऐसे समाज के निर्माण में करें, जहां कानून सर्वोपरि हो और हर व्यक्ति को न्याय मिलने का भरोसा रहे।

‘Rule of Law’ पर दिया जोर

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून के शासन को मजबूत लोकतंत्र का आधार बताया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश में कानून के शासन को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने अपने संबोधन में 2017 से पहले की स्थिति पर भी टिप्पणी की और कहा कि उस समय प्रदेश में माफिया का प्रभाव अधिक था, जबकि उनकी सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में काम किया है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक और प्रशासनिक दावा है। 

260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए खास दिन

विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधियां दिए जाने का कार्यक्रम रखा गया था। इसके साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में न्यायपालिका, शिक्षा और राज्य सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हुए। 
दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए सिर्फ शैक्षणिक उपलब्धि का अवसर नहीं रहा, बल्कि उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत का भी प्रतीक बना।

नए वकीलों के सामने क्या होगी जिम्मेदारी?

कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के सामने अब अदालत, कॉरपोरेट कानून, न्यायिक सेवाओं, शिक्षण और सार्वजनिक नीति जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। मुख्यमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि जिस भी क्षेत्र में छात्र जाएं, उन्हें संविधान, न्याय और कानून के शासन के मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के लक्ष्य में अपनी भूमिका तय करने और पेशेवर जीवन में जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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