‘फर्जी सरकार’ चला रहे शहबाज शरीफ? फजलुर रहमान ने सेना के बढ़ते प्रभाव पर भी उठाए सवाल

JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के जनादेश पर सवाल उठाए और कहा कि सेना, नौकरशाही तथा निर्वाचित संस्थाओं को अपने संवैधानिक दायरे में रहकर काम करना चाहिए।

पाकिस्तान में जारी राजनीतिक संकट के बीच मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार की वैधता पर सवाल उठाया है। उन्होंने सेना के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई और सभी संस्थाओं से संवैधानिक सीमाओं में रहने को कहा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | इस्लामाबाद | 17 अक्टूबर 2026
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JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार के जनादेश और पाकिस्तान में सेना की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच Jamiat Ulema-e-Islam-Fazl (JUI-F) प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार और देश की शक्तिशाली सेना दोनों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार को “फर्जी सरकार” बताते हुए उसके चुनावी जनादेश पर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने कहा कि सेना, नौकरशाही और निर्वाचित संस्थाओं को अपने-अपने संवैधानिक दायरे में रहकर काम करना चाहिए। ये फजलुर रहमान के राजनीतिक आरोप और टिप्पणियां हैं। 

खबर में खास

  • फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार के जनादेश पर उठाए सवाल
  • सरकार को “फर्जी” बताया, यह उनका राजनीतिक आरोप है
  • सेना के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता
  • संस्थाओं से संवैधानिक सीमा में रहने की अपील
  • पाकिस्तान में सरकार और विपक्ष के बीच तनाव लगातार बढ़ा
  • खैबर पख्तूनख्वा में emergency/governor’s rule से संकट गहरा

फजलुर रहमान ने शहबाज सरकार पर क्या आरोप लगाया?

फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार वास्तविक जनादेश की प्रतिनिधि नहीं है।
उन्होंने इसे “फर्जी सरकार” कहा और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। यह उनका राजनीतिक दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। 
फजलुर रहमान पाकिस्तान की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली धार्मिक और विपक्षी नेता रहे हैं और हाल के महीनों में उन्होंने सरकार तथा सैन्य नेतृत्व दोनों की आलोचना तेज की है।

सेना की भूमिका पर क्या कहा?

फजलुर रहमान ने पाकिस्तान में सेना के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि सेना का अपना संवैधानिक दायरा है और राजनीति तथा शासन से जुड़े फैसलों में निर्वाचित संस्थाओं को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
इससे पहले भी उन्होंने सेना प्रमुख असीम मुनीर को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि उन्हें राजनीति करनी है तो वर्दी छोड़कर चुनाव लड़ना चाहिए। 

पाकिस्तान में अभी राजनीतिक संकट क्यों गहरा है?

पाकिस्तान में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक संकट तेज हुआ है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा को लेकर।
11 अक्टूबर को वहां emergency लागू की गई और PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया। संघीय सरकार ने बढ़ती आतंकी घटनाओं और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया, जबकि PTI ने इसे राजनीतिक कदम करार दिया। 
फजलुर रहमान ने भी governor’s rule और emergency का विरोध किया और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया। Moneycontrol

फजलुर रहमान ने पहले मध्यस्थता की कोशिश भी की थी

हाल के दिनों में फजलुर रहमान सरकार और PTI के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर खैबर पख्तूनख्वा में emergency लगाने के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देने की अपील की थी। बाद में उन्होंने सरकार पर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का आरोप लगाया। Dawn

सेना और सरकार के संबंध क्यों चर्चा में हैं?

पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। हाल के वर्षों में सेना प्रमुख असीम मुनीर की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावशीलता को लेकर बहस और तेज हुई है।
सरकार की कुछ नीतियों और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी यह सवाल उठता रहा है कि उनसे सैन्य नेतृत्व की भूमिका बढ़ सकती है।
हालांकि सरकार और सैन्य नेतृत्व आमतौर पर इन आरोपों को देश की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े फैसलों के संदर्भ में देखते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

पाकिस्तान में फिलहाल सरकार, PTI, JUI-F और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच शक्ति संतुलन को लेकर तनाव बना हुआ है।
खैबर पख्तूनख्वा में emergency, इमरान खान की कैद, विपक्षी प्रदर्शनों और सेना की भूमिका को लेकर जारी बहस आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी रह सकती है।

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