दिल्ली पुलिस पर राहुल गांधी के गंभीर आरोप, बोले- छात्राओं के कपड़े खींचे, निजी अंगों पर हमला किया

राहुल गांधी ने महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचने और निजी अंगों पर हमले के आरोप लगाए, हालांकि इन दावों पर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रही महिलाओं और छात्राओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं के साथ बर्बरता की गई।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी ने दिल्ली में महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ पुलिस की कथित कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचने और निजी अंगों पर हमला जैसी घटनाएं हुईं।
राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखी आपत्ति जताई और कहा कि लोकतांत्रिक विरोध में शामिल महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और दिल्ली पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

खबर में खास

  • राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
  • महिला छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया
  • यौन उत्पीड़न और कपड़े खींचने जैसे आरोप लगाए
  • छात्र प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी
  • दिल्ली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा
  • आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस के विस्तृत पक्ष का इंतजार

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाली छात्राओं और महिलाओं के साथ पुलिस की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न हुआ, उनके कपड़े खींचे गए और निजी अंगों पर हमला किया गया। उन्होंने इसे पुलिस की बर्बरता बताते हुए इसकी आलोचना की। ये राहुल गांधी के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। 

छात्र प्रदर्शन का मामला क्या है?

दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से छात्र संगठनों और दूसरे प्रदर्शनकारी समूहों के विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा में हैं।
प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों को लेकर हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में कई छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया है।
16 अक्टूबर को भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने हमला किया और उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई। उन्होंने दो महिला छात्राओं का विशेष रूप से जिक्र किया था। 

राहुल गांधी पहले भी उठा चुके हैं पुलिस कार्रवाई का मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
कुछ दिन पहले उन्होंने घायल छात्र प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी और उनके साथ खड़े होने की बात कही थी। उस दौरान भी उन्होंने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का समर्थन किया था। 

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच क्यों बढ़ा तनाव?

दिल्ली में कई स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने निषेधाज्ञा और अनुमति न होने का हवाला देकर कार्रवाई की है।
कनॉट प्लेस में हुए हालिया ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और कई FIR दर्ज की गईं। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहा था। 
दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए जरूरत से ज्यादा पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।

महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा क्यों गंभीर है?

अगर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न, कपड़े खींचने या निजी अंगों पर हमले के आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस कार्रवाई और महिला सुरक्षा दोनों से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
इसी वजह से राहुल गांधी ने इन आरोपों की ओर सार्वजनिक रूप से ध्यान खींचा है।
हालांकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, शिकायतों और पुलिस के आधिकारिक बयान जैसे साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

सुप्रीम कोर्ट भी देख रहा है प्रदर्शन से जुड़ा मामला

दिल्ली में प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है।
कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और Jantar Mantar को protest site के रूप में हटाने के फैसले से जुड़े मामले की सुनवाई पर सहमति जताई है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया है। 
इससे आने वाले दिनों में पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर कानूनी बहस और तेज हो सकती है।

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