अभिजीत दिपके को बड़ी राहत, दिल्ली कोर्ट ने शर्तों के साथ दी जमानत; बॉन्ड भरने का आदेश

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली की SEM कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्हें ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में कोर्ट के सामने पेश किया गया।

दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने रिहाई के लिए संबंधित बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली की SEM कोर्ट ने जमानत देते हुए संबंधित बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली की एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शनिवार को उन्हें जमानत दे दी और रिहाई के लिए संबंधित बॉन्ड भरने का निर्देश दिया।
दिपके को एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने उस समय हिरासत में लिया था, जब वे कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे। इसके बाद उन्हें शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

खबर में खास

  • अभिजीत दिपके को दिल्ली की SEM कोर्ट से जमानत
  • रिहाई के लिए बॉन्ड भरने का निर्देश
  • ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हुई थी हिरासत
  • दिल्ली पुलिस ने BNSS की preventive धाराओं में कार्रवाई की थी
  • कनॉट प्लेस में निषेधाज्ञा लागू होने का पुलिस ने दिया था हवाला
  • यह एक सप्ताह में दिपके के खिलाफ दूसरी preventive action थी

अभिजीत दिपके को क्यों हिरासत में लिया गया था?

दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार कनॉट प्लेस इलाके में Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और बिना अनुमति बड़ी सभा करने पर रोक थी।
पुलिस का कहना था कि लोगों से इलाके में इकट्ठा न होने की अपील की गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस पहुंचे। इसके बाद दिपके के खिलाफ BNSS की धाराओं 126 और 170 के तहत preventive proceedings शुरू की गईं। Moneycontrol

कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

शनिवार को दिपके को Mandir Marg स्थित Special Executive Magistrate court के सामने पेश किया गया।
सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए बॉन्ड भरने का निर्देश दिया। बॉन्ड की औपचारिकता पूरी होने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया। 

दिपके की कानूनी टीम ने क्या कहा?

दिपके की कानूनी टीम ने उनकी हिरासत की वैधता पर सवाल उठाए थे।
उनकी ओर से कहा गया कि दिपके लोगों से सिर्फ तिरंगा फहराने की अपील कर रहे थे और इसके आधार पर हिरासत उचित नहीं थी। वकीलों ने due process और fundamental rights को लेकर भी आपत्ति जताई। ये दिपके के पक्ष की कानूनी दलीलें थीं। Moneycontrol

एक सप्ताह में दूसरी बार हुई कार्रवाई

यह अभिजीत दिपके के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर दूसरी preventive police action थी।
इससे पहले 10 अक्टूबर को भी उन्हें CJP के दो अन्य नेताओं के साथ preventive custody में लिया गया था। 11 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने उन्हें बॉन्ड पर रिहा किया था। उस समय पुलिस ने कहा था कि शांति और अच्छे व्यवहार को बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरा गया है। 

‘एक साल प्रदर्शन नहीं कर सकते’ वाला दावा सही है?

इस मामले में सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ था कि दिपके को एक साल तक किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा न लेने की शर्त पर छोड़ा गया था।
लेकिन उपलब्ध फैक्ट-चेक और दिपके के वकील के मुताबिक अदालत ने ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई थी। पुलिस के बयान में केवल शांति और अच्छे व्यवहार को बनाए रखने के लिए बॉन्ड का उल्लेख था। 

CJP का प्रदर्शन किस मुद्दे पर है?

CJP पिछले कुछ दिनों से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी शामिल है। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस के प्रदर्शन के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया और कथित रूप से निषेधाज्ञा के उल्लंघन को लेकर कई FIR दर्ज कीं।

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