NLSIU दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत बोले- असहमति हो, लेकिन किसी की गरिमा से इनकार नहीं

बेंगलुरु में NLSIU के 34वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत ने कानून के छात्रों से स्वतंत्र सोच, निष्पक्षता और अलग विचार रखने वालों के सम्मान को पेशेवर जीवन का आधार बनाने की अपील की।

CJI सूर्यकांत ने NLSIU के 34वें दीक्षांत समारोह में कानून के छात्रों से कहा कि किसी से असहमति हो सकती है, लेकिन उसकी गरिमा को नकारना उचित नहीं। उन्होंने सुनने, निष्पक्ष रहने और स्वतंत्र सोच विकसित करने पर जोर दिया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बेंगलुरु | 17 अक्टूबर 2026
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NLSIU के 34वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत ने छात्रों से स्वतंत्र सोच, निष्पक्षता और असहमति में गरिमा बनाए रखने की अपील की।
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के 34वें दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश और विश्वविद्यालय के Chancellor जस्टिस सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को पेशेवर जीवन के लिए अहम संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में केवल कानून की धाराएं जानना पर्याप्त नहीं है। एक अच्छे वकील और न्यायविद के लिए स्वतंत्र सोच, निष्पक्षता, धैर्य और दूसरे व्यक्ति के नजरिए को सुनने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।

खबर में खास

  • NLSIU का 34वां दीक्षांत समारोह बेंगलुरु में आयोजित
  • CJI सूर्यकांत ने Chancellor के रूप में समारोह की अध्यक्षता की
  • छात्रों से स्वतंत्र सोच और निष्पक्षता विकसित करने की अपील
  • “सुनो, फिर निर्णय करो” जैसे सिद्धांतों पर जोर
  • असहमति में भी दूसरे व्यक्ति की गरिमा बनाए रखने की बात
  • कानूनी शिक्षा को केवल criminal और constitutional law तक सीमित न मानने का संदेश

CJI सूर्यकांत ने छात्रों से क्या कहा?

CJI सूर्यकांत ने कहा कि कानून के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के लिए intellectual independence बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे किसी भी व्यक्ति या विचार के बारे में निर्णय लेने से पहले उसकी बात सुनें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति और उसके विचार को अलग-अलग समझना चाहिए और असहमति की स्थिति में भी उसकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
उनका संदेश था कि न्यायिक और कानूनी पेशे में निष्पक्षता केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार का हिस्सा होनी चाहिए।

कानून की पढ़ाई सिर्फ धाराओं तक सीमित नहीं

CJI ने कहा कि legal education का उद्देश्य केवल criminal law या constitutional law के सिद्धांतों को सीखना नहीं है।
उनके अनुसार law school वह जगह है जहां अलग-अलग विचार आपस में टकराते हैं, धारणाओं की परीक्षा होती है और संवाद की संस्कृति विकसित होती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे ऐसे लोगों से बातचीत करें जिनके विचार उनसे अलग हों। 

ईमानदारी से बनेगी पेशेवर पहचान

अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि कानूनी पेशे में व्यक्ति की प्रतिष्ठा केवल उसकी सफलता से नहीं, बल्कि उसकी ईमानदारी से बनती है।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे पेशेवर जीवन में honesty और fairness को प्राथमिकता दें। उनके मुताबिक लंबे समय में यही गुण किसी वकील या न्यायविद की विश्वसनीयता तय करते हैं। 

दीक्षांत समारोह को लेकर पहले भी हुआ था विवाद

NLSIU का यह दीक्षांत समारोह पहले 12 सितंबर को होना था, लेकिन विश्वविद्यालय ने इसे उस समय रद्द कर दिया था।
उस समय कुछ छात्रों और alumni ने CJI सूर्यकांत और अन्य आमंत्रित अतिथियों की प्रस्तावित उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी। बाद में समारोह को 17 अक्टूबर के लिए फिर से निर्धारित किया गया। Bar and Bench - Indian Legal news
अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने इस पृष्ठभूमि की ओर संकेत करते हुए कहा कि कुछ “external forces” की वजह से समारोह को लेकर अनिश्चितता बनी थी। उन्होंने छात्रों की भागीदारी और आयोजन के सफल होने की सराहना की। यह टिप्पणी CJI के अपने संबोधन का हिस्सा थी। 

34वें दीक्षांत समारोह में कौन-कौन शामिल हुआ?

NLSIU के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार CJI सूर्यकांत ने Chancellor के रूप में समारोह की अध्यक्षता की।
विश्वविद्यालय के Vice-Chancellor प्रो. सुधीर कृष्णास्वामी ने annual report प्रस्तुत की, जबकि रंगकर्मी अरुंधति नाग मुख्य अतिथि थीं। समारोह में डिग्री, मेडल और पुरस्कार भी प्रदान किए गए। National Law School of India University

छात्रों के लिए क्या रहा मुख्य संदेश?

CJI सूर्यकांत के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि कानून के पेशे में प्रवेश करने वाले युवाओं को केवल technically competent नहीं, बल्कि intellectually independent और socially responsible भी होना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे असहमति से डरें नहीं, लेकिन असहमति को अपमान में भी न बदलें। न्याय और लोकतांत्रिक संवाद के लिए यह संतुलन जरूरी है।

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