AAP के 3 विधायक BJP में गए, लेकिन विधानसभा में भाजपा की सीटें नहीं बढ़ीं! तीन सीटें खाली, मान सरकार के पास अब 91 विधायक

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले तीन नेताओं ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा। अब तीन विधानसभा सीटें रिक्त हैं और AAP के विधायकों की संख्या 94 से घटकर 91 हो गई है।

पंजाब में AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए तीन पूर्व विधायकों के इस्तीफे स्वीकार। समाना, सनौर और अमृतसर उत्तर की सीटें खाली। जानिए भाजपा की विधानसभा सीटें क्यों नहीं बढ़ीं और मान सरकार पर क्या असर पड़ा।

चंडीगढ़ | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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पंजाब के तीन पूर्व AAP नेता चेतन सिंह जौड़ामाजरा, हरमीत सिंह पठानमाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह 2 नवंबर को दिल्ली में भाजपा में शामिल हुए। उनके विधानसभा इस्तीफे स्वीकार होने के बाद तीन सीटें रिक्त हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आम आदमी पार्टी में राजनीतिक बदलाव का नया घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तीन नेताओं के विधानसभा से इस्तीफे स्वीकार हो गए हैं। इसके साथ ही समाना, सनौर और अमृतसर उत्तर की सीटें खाली हो गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि तीनों नेता BJP में शामिल हुए, लेकिन विधानसभा में भाजपा की सदस्य संख्या नहीं बढ़ी। आखिर ऐसा क्यों हुआ?

खबर में खास

  • AAP छोड़कर तीन नेताओं ने 2 नवंबर को BJP की सदस्यता ली।
  • तीनों के विधानसभा से इस्तीफे स्वीकार, तीन सीटें रिक्त।
  • पंजाब विधानसभा में AAP की संख्या 94 से घटकर 91 हुई।
  • 40 उम्मीदवारों की पहली सूची आने के बाद हुआ यह राजनीतिक घटनाक्रम।
  • AAP और BJP ने नेताओं के पार्टी बदलने पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।

कौन हैं AAP छोड़ने वाले तीन नेता?

भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में समाना से पूर्व विधायक और पंजाब के पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा, सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा और अमृतसर उत्तर से पूर्व विधायक व पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल हैं।
तीनों ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली।
इस मौके पर भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया और प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों मौजूद थे।

तीसरा इस्तीफा स्वीकार होते ही क्या बदला?

सबसे पहले हरमीत सिंह पठानमाजरा और कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया। अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार करके उनकी सीटें 2 नवंबर से रिक्त घोषित कर दीं।
चेतन सिंह जौड़ामाजरा के मामले में स्थिति अलग थी। उन्होंने पहले AAP की सदस्यता छोड़ी थी, लेकिन विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया था।
इसके बाद AAP की मुख्य सचेतक बलजिंदर कौर ने उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, जौड़ामाजरा ने बाद में विधायक पद से भी इस्तीफा दे दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे 3 नवंबर को स्वीकार कर समाना सीट रिक्त घोषित कर दी।

BJP में जाने पर सीटें भाजपा को क्यों नहीं मिलीं?

यही इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण संवैधानिक पहलू है।
जब कोई विधायक दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो दल-बदल कानून के तहत उसकी सदस्यता पर सवाल उठ सकता है। लेकिन इन तीनों नेताओं ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और अध्यक्ष ने इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
इसलिए वे विधानसभा में भाजपा के विधायक नहीं बने। उनकी पुरानी सीटें रिक्त हो गईं।
अर्थात भाजपा में तीन नेताओं का शामिल होना और विधानसभा में भाजपा की तीन सीटें बढ़ना, दोनों अलग बातें हैं।

क्या भगवंत मान सरकार पर खतरा है?

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। तीन इस्तीफों के बाद आम आदमी पार्टी की संख्या 94 से घटकर 91 रह गई है।
सरकार बनाने के लिए पूर्ण 117 सदस्यीय सदन में बहुमत का आँकड़ा 59 है।
इसलिए तीन विधायकों के इस्तीफे से भगवंत मान सरकार का विधानसभा बहुमत खतरे में नहीं पड़ा है। हालांकि, चुनाव से पहले नेताओं का पार्टी बदलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

BJP में शामिल होकर क्या आरोप लगाए?

कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे और बेरोजगारी की समस्या उठाई।
हरमीत सिंह पठानमाजरा ने AAP नेतृत्व पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
वहीं चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य व्यवस्था और औद्योगिक विकास पर सवाल उठाए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने तीनों का स्वागत किया और पार्टी के विस्तार की बात कही।
दूसरी ओर AAP प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि ये नेता पहले से पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में थे और उनके जाने से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ये दोनों दलों के राजनीतिक दावे हैं; सभी प्रशासनिक आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं।

क्या तीनों सीटों पर फिर चुनाव होगा?

AAP ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है।
वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होना है। तीन सीटें रिक्त होने के बावजूद उपचुनाव की कोई नई तारीख घोषित नहीं हुई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन तीन पूर्व विधायकों की आगे क्या राजनीतिक भूमिका रहती है और भाजपा तथा AAP आगामी चुनाव के लिए इन क्षेत्रों में किन उम्मीदवारों को मैदान में उतारती हैं।

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