अखिलेश बोले—चुनाव नहीं लड़ेंगे, सीधे CM की शपथ लेंगे! राजभर का तंज—‘नेता क्या जो चुनाव से भागे?’

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव के बयान पर सियासी तकरार। ओपी राजभर ने चुनाव लड़ने की चुनौती दी; जानिए बिना विधायक बने मुख्यमंत्री बनने का संवैधानिक नियम।

अखिलेश यादव के 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के संकेत पर ओम प्रकाश राजभर ने चुनौती दी। जानिए 2012 में अखिलेश कैसे मुख्यमंत्री बने थे और संविधान में क्या नियम है।

लखनऊ/वाराणसी | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अखिलेश यादव के चुनाव नहीं लड़ने संबंधी बयान पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच नई जुबानी जंग छिड़ गई है। अखिलेश ने वाराणसी में कहा कि वह विधानसभा चुनाव लड़े बिना सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना चाहेंगे। इस पर बुधवार को राजभर ने सवाल उठाया कि आखिर चुनावी मैदान में उतरे बिना नेतृत्व की चुनौती कैसे स्वीकार की जाएगी?

खबर में खास

  • अखिलेश ने 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का संकेत दिया।
  • 2012 में भी लोकसभा सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे अखिलेश।
  • राजभर ने उन्हें किसी एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
  • संविधान के अनुच्छेद 164(4) में बिना विधायक बने मंत्री बनने का प्रावधान है।
  • मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने में राज्य विधानमंडल का सदस्य बनना जरूरी है।

वाराणसी में अखिलेश ने क्या कहा?

मंगलवार, 3 नवंबर को वाराणसी दौरे पर पहुँचे अखिलेश यादव से पत्रकारों ने पूछा कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव किस सीट से लड़ेंगे।
इसके जवाब में उन्होंने अपने 2012 के मुख्यमंत्री बनने का उदाहरण दिया। अखिलेश ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह जब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं, तभी मुख्यमंत्री बनते हैं और अपने लिए शुभ रहने वाला रास्ता अपनाएंगे।
उन्होंने लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात भी कही।
हालांकि, यह पत्रकारों के सवाल पर दिया गया बयान था। इसे समाजवादी पार्टी की किसी औपचारिक उम्मीदवार सूची या चुनावी निर्णय की घोषणा नहीं समझना चाहिए।

राजभर बोले—चुनाव से क्यों भाग रहे हैं?

अखिलेश के बयान के अगले ही दिन सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर उन्हें चुनौती दी।
राजभर ने सवाल किया कि यदि अखिलेश चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो जनता के सामने सीधे मुकाबला क्यों नहीं करेंगे?
उन्होंने अखिलेश की शुभ-अशुभ वाली टिप्पणी पर भी कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि सपा प्रमुख चुनावी चुनौती से बच रहे हैं।
राजभर ने अखिलेश के 2012 में मुख्यमंत्री बनने को उनके राजनीतिक परिवार की पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। हालांकि, यह राजभर का राजनीतिक आकलन है, कोई स्थापित तथ्य नहीं कि अखिलेश किस कारण चुनाव नहीं लड़ना चाहते।

2012 में बिना विधानसभा चुनाव लड़े कैसे बने थे मुख्यमंत्री?

मार्च 2012 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब अखिलेश यादव कन्नौज से लोकसभा सांसद थे।
उन्होंने विधानसभा का चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बाद में लोकसभा सदस्यता छोड़ी और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने।
इसी पुराने घटनाक्रम का हवाला देकर उन्होंने 2027 के संबंध में टिप्पणी की है।

क्या बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनना संभव है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य न होते हुए भी मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है।
लेकिन पद पर बने रहने के लिए शपथ लेने के छह महीने के भीतर राज्य विधानसभा या, जहाँ विधान परिषद मौजूद हो, उस परिषद का सदस्य बनना आवश्यक है।
इसलिए विधानसभा का प्रत्यक्ष चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बनना संवैधानिक रूप से संभव है, लेकिन विधानमंडल की सदस्यता प्राप्त करने की शर्त पूरी करनी होती है।

अब 2027 को लेकर बड़ा सवाल

अखिलेश के बयान और राजभर की चुनौती ने यूपी में चुनावी नेतृत्व को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
एक तरफ सपा प्रमुख 2012 के अनुभव का हवाला दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजभर उन्हें सीधे चुनावी मैदान में उतरने को कह रहे हैं।
फिलहाल अखिलेश की विधानसभा सीट या चुनाव नहीं लड़ने के निर्णय का कोई औपचारिक पार्टी दस्तावेज सामने नहीं आया है। ऐसे में अंतिम स्थिति स्पष्ट होने के लिए आगे की घोषणा महत्वपूर्ण होगी।

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