राहुल गांधी की ‘इंसाफ रैली’ के दिन BJP ने उठाया 1984 का मुद्दा! भगवंत मान के गढ़ में कांग्रेस की चुनौती, CM का भी पलटवार

पंजाब में एक ही दिन दो बड़े राजनीतिक कार्यक्रम। संगरूर से कांग्रेस का चुनाव अभियान, चंडीगढ़ में BJP का ‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन; भगवंत मान ने राहुल की रैली पर पहले ही कसा था तंज।

पंजाब में राहुल गांधी की संगरूर रैली और उसी दिन भाजपा का 1984 के सिख-विरोधी दंगों पर सम्मेलन। जानिए भगवंत मान की प्रतिक्रिया, कांग्रेस के मुद्दे और पीड़ितों की न्याय की लड़ाई।

चंडीगढ़/संगरूर | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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पंजाब में राहुल गांधी की संगरूर ‘इंसाफ रैली’ के दिन भाजपा ने चंडीगढ़ में 1984 के सिख-विरोधी दंगों पर सम्मेलन आयोजित किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कांग्रेस की रैली पर प्रतिक्रिया दी।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बुधवार को राज्य में दो बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर हलचल तेज है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में ‘इंसाफ रैली’ के जरिए कांग्रेस के चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। वहीं भाजपा ने उसी दिन चंडीगढ़ में 1984 के सिख-विरोधी दंगों पर ‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन आयोजित किया है। इससे पंजाब की राजनीति में मौजूदा सरकार के कामकाज के साथ चार दशक पुराना न्याय का सवाल भी चर्चा में आ गया है।

खबर में खास

  • राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की संगरूर में ‘इंसाफ रैली’ निर्धारित।
  • मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राहुल की रैली पर पहले ही तंज कसा था।
  • भाजपा का चंडीगढ़ में 1984 के सिख-विरोधी दंगों पर विशेष सम्मेलन।
  • पीड़ित, प्रत्यक्षदर्शी, पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता कार्यक्रम के लिए आमंत्रित।
  • कांग्रेस ने नशा, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाने की तैयारी की।

भगवंत मान के गृह जिले में ही राहुल की रैली क्यों?

कांग्रेस ने पंजाब में चुनाव अभियान शुरू करने के लिए संगरूर को चुना है। यह मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है और आम आदमी पार्टी की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को अपने ‘हिसाब मांगो’ अभियान से जोड़ा है। पार्टी की ओर से प्रदेश के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
रैली में पंजाब में नशे की समस्या, युवाओं के रोजगार, किसानों की परेशानियों और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाए जाने की तैयारी है।
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि AAP सरकार पंजाब के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकी है। हालांकि आम आदमी पार्टी इन राजनीतिक आरोपों से सहमत नहीं है।

भगवंत मान बोले—ट्रंप को भी बुला लें!

राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले सप्ताह टिप्पणी करते हुए कहा था कि कांग्रेस चाहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बुला ले, इससे फर्क नहीं पड़ेगा।
उनकी यह टिप्पणी राहुल की रैली की घोषणा के बाद आई थी।
कांग्रेस संगरूर से आम आदमी पार्टी की सरकार को चुनौती देना चाहती है, जबकि मुख्यमंत्री मान ने रैली के राजनीतिक प्रभाव को लेकर कांग्रेस के दावों को महत्व नहीं दिया।

राहुल की रैली वाले दिन BJP ने 1984 का मुद्दा क्यों उठाया?

भाजपा ने चार नवंबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में ‘जख्म 84 दे’ नाम से सम्मेलन रखा है।
यह कार्यक्रम 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई सिख-विरोधी हिंसा, पीड़ितों की न्यायिक लड़ाई और पुनर्वास के प्रश्नों पर केंद्रित है।
भाजपा का कहना है कि नई पीढ़ी को उस हिंसा और पीड़ित परिवारों के संघर्ष की जानकारी मिलनी चाहिए।
पार्टी ने इससे पहले एक नवंबर को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस और विपक्ष की रैली के समय को लेकर भी सवाल उठाए थे।

1984 के पीड़ितों की आवाज कौन उठाएगा?

भाजपा के कार्यक्रम में निरप्रीत कौर सहित हिंसा के प्रत्यक्षदर्शियों, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसएन ढींगरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को शामिल किए जाने की घोषणा हुई है।
निरप्रीत कौर कांग्रेस नेता रहे सज्जन कुमार से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण गवाह रही हैं।
सम्मेलन में जांच में हुई देरी, दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास पर चर्चा निर्धारित है।
हालांकि, आयोजन में उठाए जाने वाले राजनीतिक आरोपों और अदालतों में स्थापित निष्कर्षों के बीच अंतर रखना जरूरी है।

पंजाब की राजनीति में अब क्या महत्वपूर्ण है?

कांग्रेस की रैली का प्रमुख निशाना पंजाब की मौजूदा AAP सरकार है। दूसरी ओर भाजपा 1984 के सिख-विरोधी दंगों के ऐतिहासिक और न्यायिक सवालों को सार्वजनिक चर्चा में ला रही है।
फिलहाल इन दोनों कार्यक्रमों के राजनीतिक प्रभाव के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
महत्वपूर्ण यह रहेगा कि राहुल गांधी रैली में कौन-से ठोस मुद्दे और घोषणाएँ सामने रखते हैं, AAP सरकार उनका क्या जवाब देती है और भाजपा के सम्मेलन में पीड़ित परिवार न्याय तथा पुनर्वास से संबंधित कौन-से सवाल उठाते हैं।

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