UP Election 2027: BJP के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा, हत्या मामले में दोषी पूर्व नेता को हाईकोर्ट से राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाई। राय ने निर्दलीय या BJP के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक फैसला चर्चा में है। 2017 के हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व भाजपा नेता नंदलाल राय को अदालत से राहत मिली है। हालांकि, पार्टी ने उन्हें टिकट देने की कोई घोषणा नहीं की है और उनकी अपील पर अंतिम फैसला भी बाकी है।
UP Election 2027: BJP के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा, हत्या मामले में दोषी पूर्व नेता को हाईकोर्ट से राहत
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | प्रयागराज/लखनऊ | 20 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। वाराणसी के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व भाजपा नेता नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा पर अदालत ने रोक लगा दी है।
नंदलाल राय ने अदालत में कहा था कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर BJP के टिकट पर लड़ना चाहते हैं। न्यायालय ने उनकी अपील पर सुनवाई के दौरान उन्हें जमानत भी दी है।
खबर में खास
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हत्या के मामले में नंदलाल राय को 2025 में उम्रकैद की सजा मिली थी।
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हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई।
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राय ने BJP या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया।
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BJP ने राय को उम्मीदवार बनाने की घोषणा नहीं की है।
क्या है पूरा हत्या मामला?
यह मामला जनवरी 2017 में वाराणसी के सिगरा इलाके में प्रमोद कुमार निगम की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। निगम राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे थे और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे।
मामले में पुलिस जांच के बाद नंदलाल राय और शेषनाथ शर्मा को आरोपी बनाया गया। वाराणसी की अदालत ने 15 अप्रैल 2025 को दोनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी।
अदालत में नंदलाल राय ने क्या दलील दी?
राय की ओर से दलील दी गई कि शुरुआती FIR में उनका नाम दर्ज नहीं था। करीब 17 दिन बाद गवाहों के बयान के आधार पर उनका नाम मामले में सामने आया।
बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि निचली अदालत ने पर्याप्त आधार के बिना उन्हें दोषी ठहराया। साथ ही बताया गया कि राय पहले BJP के सक्रिय कार्यकर्ता थे और आगे चुनाव लड़ना चाहते हैं।
ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं। इनसे निचली अदालत की दोषसिद्धि स्वतः गलत साबित नहीं हो जाती।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने 5 अक्टूबर के आदेश में नंदलाल राय की दोषसिद्धि और सजा पर अपील के निस्तारण तक रोक लगाने का फैसला दिया।
अदालत ने 2023 में अफजाल अंसारी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया। इसमें चुनाव लड़ने के अवसर पर दोषसिद्धि के प्रभाव को विशेष परिस्थितियों में विचार करने योग्य माना गया था।
न्यायालय ने राय के सह-आरोपी शेषनाथ शर्मा को भी राहत दी।
क्या अब BJP से चुनाव लड़ेंगे बबलू राय?
