UP Politics: रामलीला मंच बना सियासी अखाड़ा! BJP विधायक और पूर्व विधायक के बेटे के समर्थक भिड़े, पुलिस से भी धक्का-मुक्की

सबहेडिंग: गोंडा के करनैलगंज में रामलीला समापन समारोह के दौरान भाजपा विधायक अजय कुमार सिंह और पूर्व विधायक लल्ला भैया के बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह के समर्थकों में विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

गोंडा के करनैलगंज में रामलीला के मंच पर BJP विधायक अजय कुमार सिंह और पूर्व विधायक लल्ला भैया के बेटे के समर्थक भिड़ गए। बीच-बचाव करने पहुँची पुलिस से भी धक्का-मुक्की हुई। जानिए 2022 के टिकट विवाद से जुड़ी इस राजनीतिक कहानी का पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | गोंडा | 21 अक्टूबर 2026
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करनैलगंज में रामलीला मंच पर नेताओं के समर्थकों में विवाद के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। (सांकेतिक चित्र)
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले गोंडा की करनैलगंज विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह कोई चुनावी सभा या राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि रामलीला के मंच पर हुआ हंगामा है। मंगलवार शाम आयोजित सम्मान समारोह में भाजपा विधायक अजय कुमार सिंह और पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह के समर्थक आमने-सामने आ गए। मंच पर चढ़ने को लेकर शुरू हुआ विवाद धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुँच गया।
स्थिति संभालने पहुँचे पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने की रिपोर्ट है।

खबर में खास

  • करनैलगंज की ऐतिहासिक रामलीला के समापन समारोह में हंगामा।
  • BJP विधायक और पूर्व विधायक के बेटे के समर्थक भिड़े।

  • विवाद रोकने पहुँचे पुलिसकर्मियों से भी धक्का-मुक्की।

  • 2022 के टिकट विवाद से दोनों राजनीतिक परिवारों की पुरानी प्रतिद्वंद्विता जुड़ी है।

रामलीला के मंच पर आखिर कैसे शुरू हुआ विवाद?

करनैलगंज की रामलीला कमेटी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर की शाम सम्मान समारोह का आयोजन किया था। कार्यक्रम में भाजपा विधायक अजय कुमार सिंह और पूर्व विधायक लल्ला भैया के बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह को आमंत्रित किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, समारोह के दौरान दोनों पक्षों के समर्थक मंच पर चढ़ने लगे। इसी बीच कथित तौर पर विधायक के एक समर्थक और दूसरे पक्ष के बाउंसर के बीच धक्का-मुक्की हुई।
आरोप है कि बाउंसर ने कुछ समर्थकों को मंच से नीचे धकेलना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग आपस में भिड़ गए और कार्यक्रम में अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस बीच-बचाव करने पहुँची, लेकिन मामला और बढ़ गया

विवाद की सूचना मिलते ही स्थानीय चौकी प्रभारी और करनैलगंज कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुँची।
पुलिसकर्मी जब लोगों को शांत कराने के लिए मंच पर चढ़े तो उनके साथ भी धक्का-मुक्की हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पुलिसकर्मी मंच से गिरते-गिरते बचे।
इसके बाद क्षेत्राधिकारी विनय कुमार सिंह मौके पर पहुँचे और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया।
सीओ के अनुसार, मंच पर समर्थकों के चढ़ने और एक बाउंसर के कथित धक्का देने के बाद विवाद शुरू हुआ था। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा दिया।
2022 में कटा था लल्ला भैया का टिकट, अब फिर दोनों परिवार चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे करनैलगंज की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी ध्यान देने योग्य है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तत्कालीन विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया का टिकट काटकर अजय कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया था।
उस समय लल्ला भैया अपने बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह के लिए भी टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया। इसके बाद लल्ला भैया समाजवादी पार्टी के समर्थन में आ गए थे।
इस पृष्ठभूमि के कारण वर्तमान और पूर्व विधायक के परिवारों के समर्थकों में हुआ टकराव राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। हालांकि मंगलवार के विवाद का प्रत्यक्ष कारण मंच पर चढ़ने को लेकर हुई कहासुनी बताया गया है। इसे बिना प्रमाण 2022 के टिकट विवाद का परिणाम नहीं कहा जा सकता।

2027 से पहले करनैलगंज की राजनीति में क्या संकेत?

करनैलगंज में स्थानीय नेताओं और राजनीतिक परिवारों का प्रभाव लंबे समय से चुनावी चर्चा का विषय रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समर्थकों के बीच इस तरह का सार्वजनिक विवाद स्थानीय राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल इस घटना में किसी नेता की व्यक्तिगत संलिप्तता या चुनावी साजिश का प्रमाण सामने नहीं आया है। प्रकाशित रिपोर्ट में पुलिस द्वारा मामला शांत कराने की पुष्टि है, लेकिन FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं दी गई है।
अब देखना होगा कि क्या दोनों पक्ष इस घटना पर औपचारिक बयान देते हैं और पुलिस आगे कोई कार्रवाई करती है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: रामलीला जैसे सार्वजनिक धार्मिक आयोजन में समर्थकों के बीच टकराव को रोकने की जिम्मेदारी राजनीतिक नेतृत्व और आयोजकों की कितनी है?

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