Punjab Politics: राज्यपाल से मिले सुखबीर बादल, CM भगवंत मान को हटाने की मांग! BJP से गठबंधन पर भी दिया बड़ा बयान
झोटा हत्याकांड को लेकर सुखबीर बादल ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री भगवंत मान को हटाने की मांग की। BJP से गठबंधन पर कहा—AAP और कांग्रेस के अलावा समान विचारधारा वाले दलों से समझौते के रास्ते खुले हैं।
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Punjab Election 2027: सुखबीर बादल ने राज्यपाल से मिलकर CM भगवंत मान को हटाने की मांग की। जानिए झोटा हत्याकांड पर अकाली दल की मांगें और BJP से गठबंधन पर उनका बयान।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | चंडीगढ़ | 23 अक्टूबर 2026
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात करके मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा से दोबारा गठबंधन की चर्चाओं पर भी अपनी पार्टी का रुख सामने रखा।
बादल ने कहा कि अकाली दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगा, लेकिन समान विचारधारा वाले अन्य दलों के साथ समझौते का विकल्प खुला है। उनका यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में अगली NDA सरकार बनने के दावे के एक दिन बाद आया है। हालांकि, दोनों दलों ने अब तक किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की है
खबर में खास
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सुखबीर बादल ने 23 अक्टूबर को पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात की।
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अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को हटाने की मांग की।
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मामला नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या से जुड़ा है।
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बादल ने कांग्रेस और AAP से गठबंधन की संभावना खारिज की।
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BJP के साथ दोबारा गठबंधन की चर्चा है, लेकिन समझौता घोषित नहीं हुआ।
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भाजपा और अकाली दल का पुराना गठबंधन कृषि कानूनों के विरोध में 2020 में टूट गया था।
राज्यपाल से मिलकर सुखबीर बादल ने क्या मांग रखी?
शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ स्थित पंजाब लोक भवन पहुंचा। इसका नेतृत्व सुखबीर सिंह बादल ने किया।
प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अकाली नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ और दलजीत सिंह चीमा भी शामिल थे।
मुलाकात का प्रमुख मुद्दा नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या और राज्य की कानून-व्यवस्था थी।
अकाली दल ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार नशे के कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण करने में विफल रही है। इसी आधार पर पार्टी ने राज्यपाल से मुख्यमंत्री को हटाने की मांग की।
झोटा हत्याकांड पर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
पंजाब के मानसा में 13 अक्टूबर को नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के बाद उनके परिवार और समर्थकों ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया।
परिवार ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक की जवाबदेही, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तथा स्वतंत्र जांच जैसी मांगें उठाईं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को मामले की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बावजूद परिवार ने अन्य मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा।
अकाली दल ने राज्यपाल के सामने क्या प्रस्ताव रखे?
रिपोर्टों के अनुसार, अकाली दल ने मुख्यमंत्री को हटाने के अलावा झोटा की विधवा मनप्रीत कौर को सरकारी नौकरी और मानवीय आधार पर ₹2 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई।
पार्टी ने नशे के कारोबार से कथित संरक्षण संबंधी आरोपों की जांच और कुछ अन्य घटनाओं को CBI जांच के दायरे में लाने का आग्रह भी किया।
हालांकि, ये अकाली दल की मांगें हैं। संबंधित नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच से सिद्ध नहीं हुए हैं।
BJP से गठबंधन पर सुखबीर बादल ने क्या कहा?
राज्यपाल से मुलाकात के बाद पत्रकारों ने बादल से अगले विधानसभा चुनाव में संभावित गठबंधन को लेकर सवाल किया।
बादल ने कहा कि अकाली दल के लिए पंजाब के हित सबसे पहले हैं। उन्होंने कांग्रेस और AAP को अपना राजनीतिक विरोधी बताते हुए दोनों से समझौते की संभावना खारिज की।
उन्होंने समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन का विकल्प खुला बताया।
हालांकि, सुखबीर बादल ने भाजपा के साथ गठबंधन तय होने की घोषणा नहीं की। इस तरह का रुख वह 10 अक्टूबर को भी व्यक्त कर चुके थे। आज उनके बयान की अहमियत अमित शाह की हालिया टिप्पणी और बदलते चुनावी घटनाक्रम के संदर्भ में है।
2020 में क्यों टूटा था BJP-अकाली गठबंधन?
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं। दोनों ने 1997, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों के बाद गठबंधन सरकारें बनाई थीं।
लेकिन सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए अकाली दल NDA से अलग हो गया।
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग लड़े। उस चुनाव में भाजपा ने दो और अकाली दल ने तीन सीटें जीती थीं।
क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?
फिलहाल गठबंधन को लेकर दो अलग बातें सामने हैं।
अमित शाह ने पंजाब में NDA सरकार बनाने का राजनीतिक दावा किया है। दूसरी ओर पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि पार्टी सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
अकाली दल ने भी कोई औपचारिक समझौता घोषित नहीं किया है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व पर सहमति बनी है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल स्थापित तथ्य यह है कि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को हटाने की मांग राज्यपाल तक पहुंचाई है और सुखबीर बादल ने राजनीतिक गठबंधन के विकल्प खुले रखे हैं। राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने से मुख्यमंत्री का पद स्वतः समाप्त नहीं होता। अब इन मांगों पर संवैधानिक प्रक्रिया और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
