Punjab Politics: विधानसभा में AAP-कांग्रेस के बीच हंगामा! कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा पूरे सत्र से सस्पेंड, नशे और कानून-व्यवस्था पर घमासान
पंजाब विधानसभा में नशे और कानून-व्यवस्था पर हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को शेष सत्र से निलंबित कर दिया गया। AAP सरकार ने असंसदीय व्यवहार का आरोप लगाया, खैरा ने कार्रवाई को राजनीतिक बदला बताया।
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Punjab Assembly News: कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को विधानसभा के शेष सत्र से निलंबित किया गया। वित्त मंत्री हरपाल चीमा के प्रस्ताव के बाद कार्रवाई हुई। जानिए AAP-कांग्रेस विवाद।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | चंडीगढ़ | 23 अक्टूबर 2026
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। नशे, गैंगस्टरवाद और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर कांग्रेस विधायकों के विरोध प्रदर्शन के बीच विधानसभा ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैरा के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के आसन के प्रति असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई।
इस कार्रवाई के बाद खैरा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निलंबन के बावजूद वह पंजाब के मुद्दे उठाते रहेंगे।
खबर में खास
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23 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा में AAP और कांग्रेस विधायकों के बीच हंगामा हुआ।
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कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया।
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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने निलंबन का प्रस्ताव पेश किया।
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कांग्रेस ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर सरकार से जवाब मांगा।
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प्रस्ताव पारित होते समय कांग्रेस विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।
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खैरा ने निलंबन को राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
आखिर विधानसभा में कैसे शुरू हुआ विवाद?
शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की।
कांग्रेस विधायक नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब चाहते थे। विरोध के दौरान कुछ विधायक सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इसी बीच वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के बीच तीखी बहस हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेता एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर आरोप-प्रत्यारोप करते दिखाई दिए। बढ़ते हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया
सुखपाल खैरा को किस आरोप में सस्पेंड किया गया?
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि खैरा ने बार-बार चेतावनी के बावजूद विधानसभा की मर्यादा का पालन नहीं किया।
चीमा ने आरोप लगाया कि खैरा ने आसन के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और कार्यवाही बाधित की।
उन्होंने पंजाब विधानसभा के प्रक्रिया संबंधी नियमों का हवाला देकर कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।
प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद खैरा को वर्तमान सत्र की शेष अवधि तक सदन की कार्यवाही में भाग लेने से निलंबित कर दिया गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्ताव पारित होते समय कांग्रेस विधायक वॉकआउट के कारण सदन में मौजूद नहीं थे।
निलंबन के बाद खैरा ने AAP को क्या जवाब दिया?
सुखपाल सिंह खैरा ने निलंबन के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि अगर पंजाब के मुद्दे उठाना, परविंदर सिंह झोटा के लिए न्याय मांगना और सरकार से जवाबदेही की मांग करना अपराध है, तो वह ऐसे सवाल आगे भी उठाते रहेंगे।
खैरा ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के दबाव में उन्हें निलंबित किया।
उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी सरकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया।
हालांकि, यह खैरा का राजनीतिक आरोप है। विधानसभा की ओर से निलंबन का घोषित आधार सदन की कार्यवाही में बाधा और कथित असंसदीय व्यवहार बताया गया है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या पर क्यों हो रहा विवाद?
पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को हत्या हुई थी।
इस घटना के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई।
दूसरी ओर पंजाब सरकार मामले में जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कहती रही है। हत्या की जिम्मेदारी या किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका का निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा सकता।
पहले दिन सिर्फ नौ मिनट चली थी विधानसभा
पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र गुरुवार, 22 अक्टूबर को शुरू हुआ था।
पहले दिन परविंदर सिंह झोटा और अन्य दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि देने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही स्थगित कर दी थी। सदन की बैठक करीब नौ मिनट ही चली।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार नशे और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने स्पष्ट किया था कि श्रद्धांजलि के बाद कार्यवाही स्थगित करना सदन की परंपरा के अनुरूप उनका निर्णय था।
पंजाब की राजनीति में आगे क्या होगा?
