राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर BJP का बड़ा सवाल, 'सत्ता परिवर्तन' के बयान से मचा घमासान; कांग्रेस ने किया पलटवार

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने संजय राउत के 'रेजीम चेंज' वाले बयान पर राहुल गांधी से जुड़े सवाल उठाए। विपक्ष की मांगों की तुलना रावण के दस सिरों से की, तो कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की विदेश यात्रा और संजय राउत के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान पर सवाल उठाए। विपक्ष की मांगों की तुलना रावण से करने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जवाब दिया।

खबर में खास

  • सुधांशु त्रिवेदी ने संजय राउत के बयान को लेकर सवाल उठाए।
  • भाजपा ने कुछ विपक्षी ताकतों पर देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया।

  • त्रिवेदी ने बार-बार उठने वाली मांगों की तुलना रावण के दस सिरों से की।

  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा और RSS पर पलटवार किया।

  • आरोपों से किसी विदेशी साजिश के सिद्ध होने का प्रमाण सामने नहीं आया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
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सुधांशु त्रिवेदी के आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जवाब दिया।
देश की राजनीति में दशहरे के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच नया जुबानी टकराव शुरू हो गया है। भाजपा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए आशंका जताई कि कुछ ताकतें सार्वजनिक मांगों की आड़ में देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं।
इन आरोपों के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान में विश्वास रखने वालों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
संजय राउत के बयान से क्यों भड़की BJP?
सुधांशु त्रिवेदी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत के उस कथित बयान का उल्लेख किया, जिसमें राहुल गांधी के वियतनाम से लौटने के बाद सत्ता परिवर्तन की बात कही गई थी।
त्रिवेदी ने पूछा कि राउत के पास राहुल गांधी से संबंधित ऐसी कौन-सी जानकारी है, जिसके बारे में कांग्रेस के अन्य नेताओं को भी जानकारी नहीं है।
उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के बाद दिए जाने वाले राजनीतिक बयानों पर भी सवाल उठाए और कुछ अज्ञात ताकतों की भूमिका होने की आशंका जताई।
हालांकि ये भाजपा प्रवक्ता के राजनीतिक आरोप हैं। किसी विदेशी संस्था द्वारा भारत में हिंसक सत्ता परिवर्तन की साजिश रचे जाने का स्वतंत्र प्रमाण संबंधित रिपोर्टों में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

विपक्ष की मांगों की तुलना रावण के दस सिरों से

सुधांशु त्रिवेदी ने दशहरे के संदर्भ में विपक्ष पर हमला करते हुए रावण का उदाहरण दिया।
उनका तर्क था कि कुछ विपक्षी समूह एक मुद्दा उठाते हैं और उसके समाधान के बाद दूसरा मुद्दा सामने ले आते हैं।
उन्होंने LIC, HAL, SBI, SEBI, वैक्सीन, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और मतदाता सूची जैसे मुद्दों पर उठाए गए सवालों का उल्लेख किया।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि अलग-अलग आंदोलनों में इस्तेमाल होने वाली समान भाषा के पीछे राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का उद्देश्य हो सकता है।
देश को अस्थिर करने के तीन एजेंडे गिनाए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयादशमी संबोधन का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने ऐसे तत्वों के तीन कथित एजेंडे गिनाए।
उन्होंने निजी लाभ के लिए सत्ता और संसाधनों का इस्तेमाल, समाज में विभाजन पैदा करना और भारतीय संस्कृति तथा धर्म के प्रति विरोध को इन एजेंडों में शामिल बताया।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कुछ समूह सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का उपयोग अपनी वास्तविक मंशा छिपाने के लिए कर रहे हैं।
हालांकि किसी मुद्दे पर सरकार या संवैधानिक संस्था से जवाब मांगना अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि या साजिश का प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस के पवन खेड़ा ने क्या जवाब दिया?
सुधांशु त्रिवेदी के आरोपों पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा और RSS को निशाने पर लिया।
खेड़ा का कहना था कि भाजपा उन लोगों की तुलना रावण से कर रही है, जो संविधान में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि RSS की विचारधारा संविधान के मूल्यों के विपरीत है।
कांग्रेस ने भाजपा की राजनीतिक व्याख्या को खारिज किया। इस तरह विवाद अब विदेश यात्रा और सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान से आगे बढ़कर संविधान और राजनीतिक विरोध के अधिकार तक पहुँच गया है।
क्या 'सत्ता परिवर्तन' की बात करना साजिश है?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव के जरिए सरकार बदलने की मांग करना राजनीतिक अधिकार का हिस्सा है।
दूसरी ओर हिंसा, गैरकानूनी गतिविधियों या किसी वास्तविक आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जाँच आवश्यक होती है।
इन दोनों परिस्थितियों में स्पष्ट अंतर है। केवल किसी नेता के बयान या राजनीतिक आशंका के आधार पर विदेशी साजिश को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

अब किस बात पर टिकी नजर?

भाजपा ने इस विवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा, संस्थाओं की विश्वसनीयता और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जोड़ा है। कांग्रेस इसे राजनीतिक विरोध की आवाज दबाने का प्रयास बता रही है।
अब देखना होगा कि संजय राउत अपने बयान के संदर्भ में कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण देते हैं या भाजपा अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने रखती है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: सरकार से सवाल करना, चुनाव में सत्ता परिवर्तन की मांग करना और गैरकानूनी साजिश रचना—इनके बीच की सीमा सार्वजनिक राजनीतिक बहस में कितनी स्पष्ट रखी जानी चाहिए?

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