UP Election 2027: ओवैसी को कांग्रेस ने उनके ही गढ़ में घेरा! पूछा—तेलंगाना की 119 सीटों में से सिर्फ 9 पर क्यों लड़े?

यूपी में मुस्लिम नेतृत्व बनाने की ओवैसी की अपील पर तेलंगाना कांग्रेस ने पलटवार किया। सवाल उठाया कि AIMIM ने 2023 में राज्य की 119 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 9 पर उम्मीदवार क्यों उतारे?

Owaisi vs Congress: यूपी में मुस्लिम नेतृत्व को लेकर दिए बयान पर तेलंगाना कांग्रेस ने AIMIM प्रमुख से सवाल किए। जानिए 2023 के विधानसभा चुनाव में 9 सीटों पर लड़ने की वजह को लेकर क्या विवाद है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | हैदराबाद/रामपुर | 23 अक्टूबर 2026
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उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेतृत्व को लेकर ओवैसी की अपील के बाद तेलंगाना कांग्रेस ने AIMIM की नौ सीटों वाली चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व को लेकर शुरू हुई बहस अब हैदराबाद तक पहुंच गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर की सभा में मुस्लिम युवाओं से दूसरों के लिए केवल राजनीतिक समर्थन जुटाने के बजाय खुद विधायक और सांसद बनने की अपील की थी। अब तेलंगाना कांग्रेस ने उनके इस बयान पर सवाल उठाते हुए AIMIM के अपने चुनावी रिकॉर्ड का हिसाब मांगा है।
कांग्रेस का सवाल है कि ओवैसी उत्तर प्रदेश में नए मुस्लिम नेतृत्व की बात करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में 119 में से सिर्फ 9 सीटों पर उम्मीदवार क्यों उतारे?
हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रभारी मोहम्मद वलीउल्लाह समीर ने आरोप लगाया कि AIMIM ने अपने पारंपरिक प्रभाव वाले इलाकों से बाहर नए राजनीतिक नेताओं को पर्याप्त अवसर नहीं दिए। यह बयान 22 अक्टूबर को सामने आया और 23 अक्टूबर को इसकी विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई।
खबर में खास
  • ओवैसी ने रामपुर में मुस्लिम युवाओं को अपना राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की बात कही थी।
  • तेलंगाना कांग्रेस ने AIMIM के चुनावी रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।

  • 2023 में AIMIM ने तेलंगाना की 119 में से 9 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था।

  • पार्टी ने उन 9 में से 7 सीटें जीती थीं।

  • कांग्रेस ने AIMIM पर सीमित क्षेत्रों तक नेतृत्व केंद्रित रखने का आरोप लगाया।

  • इन नए आरोपों पर ओवैसी की प्रतिक्रिया संबंधित रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं थी।

कांग्रेस ने ओवैसी से क्या पूछा?

कांग्रेस नेता मोहम्मद वलीउल्लाह समीर ने कहा कि ओवैसी जिस राजनीतिक मॉडल को उत्तर प्रदेश में अपनाने की बात कर रहे हैं, पहले उसका परिणाम अपने गृह राज्य तेलंगाना में बताएं।
समीर ने सवाल उठाया कि दशकों से हैदराबाद में प्रभाव रखने वाली AIMIM ने अपने पारंपरिक क्षेत्रों के बाहर कितने स्वतंत्र मुस्लिम नेता तैयार किए हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की जरूरत पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन यह देखना भी जरूरी है कि नए लोगों को वास्तविक अवसर कितने मिले।
कांग्रेस नेता के अनुसार, AIMIM को यह भी बताना चाहिए कि उसने अन्य विधानसभा क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं और पेशेवर लोगों को उम्मीदवार बनाने के लिए क्या प्रयास किए।
2023 में AIMIM ने कितनी सीटें जीती थीं?
तेलंगाना विधानसभा में कुल 119 सीटें हैं।
2023 के चुनाव में AIMIM ने नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से सात पर पार्टी को जीत मिली, जबकि राजेंद्रनगर और जुबली हिल्स में उसके उम्मीदवार हार गए।
पार्टी ने चारमीनार, चंद्रायनगुट्टा, बहादुरपुरा, मलकपेट, कारवां, याकूतपुरा और नामपल्ली सीटों पर जीत हासिल की थी।
इन परिणामों से हैदराबाद के पुराने शहर में AIMIM का मजबूत चुनावी आधार दिखाई देता है। लेकिन कांग्रेस का सवाल है कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद पार्टी ने पूरे राज्य में अपना नेतृत्व क्यों नहीं फैलाया।
BRS के समर्थन पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने AIMIM की उस चुनावी रणनीति की भी आलोचना की, जिसके तहत उसने 2023 में अपनी नौ सीटों के अलावा अन्य क्षेत्रों में तत्कालीन सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (BRS) का समर्थन किया था।
समीर ने आरोप लगाया कि इससे नए नेताओं को स्वतंत्र चुनावी अवसर देने के बजाय राजनीतिक समर्थन दूसरी पार्टी की ओर चला गया।
हालांकि, किसी पार्टी का सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना अपने आप में राजनीतिक प्रतिनिधित्व रोकने का प्रमाण नहीं है। उम्मीदवारों के चयन, संसाधनों और गठबंधन संबंधी रणनीति में कई कारण शामिल हो सकते हैं।

रामपुर में ओवैसी ने क्या कहा था?

रामपुर की सभा में ओवैसी ने नेहरू-गांधी और यादव परिवारों का नाम लेते हुए मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया था।
उनका कहना था कि मुस्लिम समाज के लोगों की भूमिका केवल दूसरे नेताओं के कार्यक्रमों में समर्थन जुटाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से विधायक, सांसद और दूसरे निर्वाचित पदों पर आगे आने की बात कही थी।
ओवैसी का यह बयान उत्तर प्रदेश में AIMIM के संगठन विस्तार और आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक चर्चा के बीच आया था।

अब विवाद का असली मुद्दा क्या है?

ओवैसी राजनीतिक नेतृत्व में नए चेहरों की भागीदारी बढ़ाने की बात कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस का सवाल है कि AIMIM ने अपने प्रभाव वाले राज्य में इस विचार को कितनी व्यापकता से लागू किया।
दोनों पक्षों के बयानों के बीच 2023 का चुनावी आंकड़ा महत्वपूर्ण है—AIMIM ने 119 में से नौ सीटों पर उम्मीदवार उतारे और सात जीतीं।
अब सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक नेतृत्व की बात करने वाली AIMIM आगामी चुनाव में कितने नए उम्मीदवारों को अवसर देती है। इसका वास्तविक आकलन पार्टी की घोषित उम्मीदवार सूची और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि के आधार पर किया जा सकेगा।

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