'रिजीम चेंज' पर धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी को घेरा, CJP आंदोलन को बताया साजिश
CJP आंदोलन पर धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन वाले बयान पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
Dharmendra Pradhan News: CJP के रिजीम चेंज विवाद में धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर आरोप लगाए। जानिए प्रशांत भूषण का बयान और कांग्रेस का जवाब।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
CJP के सत्ता परिवर्तन विवाद में धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस ने चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कही।
CJP के विरोध प्रदर्शन और 'रिजीम चेंज' वाले बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। अब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और CJP आंदोलन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बन गया है।
इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार बताया था। कांग्रेस का कहना है कि वह चुनाव के जरिए सरकार बदलना चाहती है।
खबर में खास
धर्मेंद्र प्रधान ने CJP आंदोलन को छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की कथित साजिश बताया।
राहुल गांधी पर जनादेश और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाया।
प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार बताया था।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि विपक्ष चुनाव के जरिए सरकार बदलना चाहता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने CJP आंदोलन पर क्या कहा?
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर CJP और विपक्षी नेताओं पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि देशहित, व्यवस्था सुधार और छात्रों के अधिकारों के नाम पर शुरू हुए आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य अब सामने आ गया है।
प्रधान ने कहा कि खुले तौर पर सत्ता परिवर्तन और बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरणा लेने की बातें छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने तथा राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कथित साजिश की ओर इशारा करती हैं।
उन्होंने विदेशी ताकतों के सहारे सत्ता हासिल करने की कोशिश का भी आरोप लगाया।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में किसी विदेशी साजिश के स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप
धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनावी नतीजे अपने पक्ष में नहीं आने पर जनता के जनादेश पर सवाल उठाते हैं।
प्रधान ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए ही हो सकता है।
उन्होंने राहुल गांधी की संविधान को लेकर की जाने वाली राजनीति की भी आलोचना की।
प्रशांत भूषण के किस बयान से शुरू हुआ विवाद?
15 अक्टूबर को दिल्ली में CJP की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात कही थी।
उन्होंने कहा था कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं और लोकतंत्र में ऐसी मांग करना गलत नहीं है।
भूषण ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
इस दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और छात्र नेता नेहा बोरा सहित अन्य लोग मौजूद थे।
भूषण के बयान के बाद भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया, स्मृति ईरानी और किरेन रिजिजू समेत कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन पर क्या सफाई दी?
इसी राजनीतिक विवाद में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आरोपों का जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के माध्यम से वर्तमान सरकार को हराना और सत्ता परिवर्तन करना है।
खेड़ा ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है।
कांग्रेस की इस प्रतिक्रिया और धर्मेंद्र प्रधान के आरोपों के बीच मुख्य मतभेद आंदोलन के उद्देश्य और उसे अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर है।
आखिर CJP आंदोलन का मुख्य मुद्दा क्या है?
CJP और विपक्षी संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
वहीं, चुनाव आयोग प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए पक्षपात के आरोपों का खंडन करता रहा है।
इस विवाद से संबंधित कानूनी सवाल भी अदालत में उठाए गए हैं।
क्या सत्ता परिवर्तन की मांग करना गैरकानूनी है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार प्राप्त हैं। इन अधिकारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की मांग और हिंसा अथवा गैरकानूनी तरीके से सत्ता परिवर्तन की कोशिश में अंतर है।
फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के बयान ने राजनीतिक विवाद को आगे बढ़ाया है। लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगाए गए साजिश संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।