UP Politics: सपा नेता राजकुमार भाटी ने बदल लिया धर्म? 22 प्रतिज्ञाओं का वीडियो वायरल, BJP के सवालों पर दिया जवाब

दिल्ली के बौद्ध दीक्षा समारोह में शामिल होने के बाद सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के धर्म परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई। भाजपा और रालोद नेताओं ने सवाल उठाए तो भाटी ने कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म नहीं छोड़ा और धर्म परिवर्तन का कोई इरादा नहीं है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का बौद्ध दीक्षा समारोह में 22 प्रतिज्ञाओं से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। BJP और RLD के सवालों पर भाटी ने धर्म परिवर्तन के दावों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा।

खबर में खास

  • दिल्ली के अंबेडकर भवन में 20 अक्टूबर को आयोजित बौद्ध दीक्षा समारोह में शामिल हुए राजकुमार भाटी।
  • डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।

  • भाजपा और रालोद नेताओं ने सपा पर सवाल उठाए।

  • राजकुमार भाटी ने 21 अक्टूबर को धर्म परिवर्तन के दावे खारिज किए।
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    बौद्ध दीक्षा समारोह के वायरल वीडियो पर सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने धर्म परिवर्तन की चर्चाओं को खारिज किया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी के एक वायरल वीडियो ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली में आयोजित बौद्ध दीक्षा समारोह का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि भाटी ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया है।

 

वीडियो को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। हालांकि, राजकुमार भाटी ने बुधवार को सामने आकर धर्म परिवर्तन की चर्चाओं को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनका धर्म बदलने का कोई इरादा नहीं है।
आखिर किस कार्यक्रम से शुरू हुआ पूरा विवाद?
20 अक्टूबर को दिल्ली के रानी झांसी मार्ग स्थित अंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह आयोजन बौद्ध धम्म दीक्षा से संबंधित था।
राजकुमार भाटी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएँ दोहराई गईं। वायरल वीडियो में भाटी भी मंच पर अन्य लोगों के साथ इन प्रतिज्ञाओं को दोहराते दिखाई दिए।
इन प्रतिज्ञाओं में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा और धार्मिक परंपराओं के संबंध में कुछ घोषणाएँ भी शामिल हैं। वीडियो सामने आते ही इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।

BJP और RLD ने क्यों उठाए सवाल?

वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने समाजवादी पार्टी की धार्मिक और राजनीतिक विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या सपा नेतृत्व भी ऐसे विचारों का समर्थन करता है।
दूसरी ओर भाजपा के हरनाथ सिंह यादव और राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े नेताओं की ओर से भी इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक टिप्पणियाँ सामने आईं।
इन नेताओं की आपत्तियों का मुख्य विषय वीडियो में सुनाई दे रही धार्मिक प्रतिज्ञाएँ और राजकुमार भाटी की कार्यक्रम में भागीदारी थी। हालांकि, किसी धार्मिक समारोह में मौजूद रहने या प्रतिज्ञाओं का वीडियो सामने आने मात्र से किसी व्यक्ति के औपचारिक धर्म परिवर्तन का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
राजकुमार भाटी ने साफ कहा—धर्म परिवर्तन नहीं किया
विवाद बढ़ने पर राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो संदेश जारी किया।
उन्होंने बताया कि वह विभिन्न धर्मों और समुदायों के कार्यक्रमों में अतिथि के रूप में शामिल होते हैं। उनके अनुसार, गुरुद्वारों, मुस्लिम समुदाय के आयोजनों और हिंदू धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है।
भाटी ने कहा कि उन्हें गौतम बुद्ध की शिक्षाओं और बाबा साहब आंबेडकर के विचारों से गहरा लगाव है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उन्होंने अपना धर्म बदल लिया है।
उन्होंने भाजपा के आईटी सेल पर उनके धर्म परिवर्तन के संबंध में गलत प्रचार करने का आरोप लगाया। यह आरोप भाटी का है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएँ क्या हैं?
डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म स्वीकार करते समय अपने अनुयायियों को 22 प्रतिज्ञाएँ दिलाई थीं।
इनमें बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को अपनाने, समानता, करुणा और सामाजिक भेदभाव के विरोध से संबंधित संकल्प शामिल हैं। कुछ प्रतिज्ञाएँ हिंदू धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धतियों से अलग बौद्ध पहचान स्थापित करने से जुड़ी हैं।
इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण बौद्ध दीक्षा कार्यक्रमों में इन प्रतिज्ञाओं का विशेष स्थान है।
हालांकि, राजकुमार भाटी ने इस विशेष कार्यक्रम के संबंध में स्पष्ट किया है कि वह औपचारिक धर्म परिवर्तन करने नहीं गए थे।

2027 के चुनाव से पहले विवाद के राजनीतिक मायने

उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच धार्मिक पहचान, सामाजिक न्याय और संविधान जैसे विषयों पर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है।
अखिलेश यादव की पार्टी पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को साथ लाने के लिए PDA की राजनीति पर जोर देती रही है। वहीं भाजपा अक्सर सपा की धार्मिक और सामाजिक नीतियों पर सवाल उठाती है।
ऐसे माहौल में सपा के एक प्रमुख प्रवक्ता से जुड़ा वायरल वीडियो राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
लेकिन अभी तक इस विवाद का किसी चुनावी समीकरण पर ठोस प्रभाव सामने नहीं आया है। इसे सपा की आधिकारिक धार्मिक नीति में बदलाव के रूप में भी नहीं देखा जा सकता।

अब आगे क्या?

भाटी की सफाई के बाद धर्म परिवर्तन के दावे को स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर भाजपा और रालोद नेताओं के सवालों से यह स्पष्ट है कि वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण अंतर वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि और संबंधित व्यक्ति द्वारा स्वयं घोषित धार्मिक पहचान के बीच है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: क्या किसी धार्मिक कार्यक्रम में भागीदारी के आधार पर व्यक्ति का धर्म परिवर्तन मान लेना उचित है, या इस बारे में संबंधित व्यक्ति का स्पष्ट बयान सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए 

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