बिहार MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर सवाल, कॉलेज बोला—5 अनजान नाम जुड़े, 3 असली शिक्षक गायब

23 अक्टूबर को मतदान से पहले पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची पर कई कॉलेजों ने आपत्तियां जताई हैं। कुछ संस्थानों ने ऐसे नाम दर्ज होने की शिकायत की है जो उनके कर्मचारी नहीं हैं।

बिहार विधान परिषद चुनाव से तीन दिन पहले पटना शिक्षक सीट की मतदाता सूची पर विवाद सामने आया है। पटना साइंस कॉलेज समेत कई संस्थानों ने कथित गलत नाम दर्ज होने और पात्र शिक्षकों के नाम गायब होने की शिकायत की है। निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि आपत्तियों का नियमानुसार सत्यापन और निस्तारण किया गया है।

बिहार MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर सवाल, कॉलेज बोला—5 अनजान नाम जुड़े, 3 असली शिक्षक गायब

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बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गलत नामों को लेकर कई कॉलेजों ने शिकायत की है। तस्वीर सांकेतिक है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | पटना | 20 अक्टूबर 2026
बिहार विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची को लेकर विवाद सामने आया है। कई शैक्षणिक संस्थानों ने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर ऐसे लोगों को मतदाता बना दिया गया है जो संबंधित कॉलेजों में शिक्षक ही नहीं हैं। वहीं, कुछ वास्तविक शिक्षकों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए।
पटना साइंस कॉलेज ने निर्वाचन कार्यालय को बताया कि उसकी संस्था के नाम पर पांच ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं जिनका कॉलेज से संबंध नहीं है, जबकि तीन पात्र शिक्षकों के नाम सूची से गायब हैं।
23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले सामने आई इन शिकायतों ने मतदाता सूची तैयार करने और उसकी जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

खबर में खास

  • पटना साइंस कॉलेज ने पांच गलत नाम दर्ज होने की शिकायत की।
  • कॉलेज के तीन वास्तविक शिक्षकों के नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़े।
  • फुलवारी शरीफ के एक कॉलेज ने 32 नामों पर आपत्ति जताई।
  • नौबतपुर के एक संस्थान ने 20 नामों को गलत बताया।
  • निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण किया गया है।
  • बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है।

पटना साइंस कॉलेज ने क्या शिकायत की?

इंडियन एक्सप्रेस की 20 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना साइंस कॉलेज ने 13 अक्टूबर को निर्वाचन पंजीकरण कार्यालय को पत्र भेजा था।
कॉलेज ने बताया कि मतदाता सूची में पांच व्यक्तियों को उसके शिक्षक के रूप में दर्ज किया गया है, जबकि उनका संस्थान से कोई संबंध नहीं है।
कॉलेज प्रशासन ने तीन वास्तविक शिक्षकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने का अनुरोध भी किया।
कॉलेज की प्राचार्य अलका कुमारी के अनुसार, निर्वाचन कार्यालय को गलत नामों की सूचना पहले ही दे दी गई थी, लेकिन वास्तविक शिक्षकों के नाम यह कहकर नहीं जोड़े गए कि मतदाता सूची अंतिम रूप ले चुकी है।

फुलवारी शरीफ के कॉलेज में 32 नामों पर आपत्ति

पटना साइंस कॉलेज के अलावा दूसरे संस्थानों ने भी मतदाता सूची में गलत नाम होने की शिकायत की है।
फुलवारी शरीफ स्थित एसटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने 27 अगस्त को निर्वाचन कार्यालय को पत्र भेजा था।
कॉलेज प्रशासन ने दावा किया कि उसके नाम से मतदाता सूची में दर्ज 32 व्यक्ति न तो वर्तमान में संस्थान में काम करते हैं और न ही पहले वहां कार्यरत रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आपत्ति के बावजूद अंतिम सूची में इन नामों के बने रहने की बात सामने आई है।
हालांकि, संस्थानों की शिकायतों को किसी व्यक्ति के जानबूझकर चुनावी धोखाधड़ी करने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और पहचान का आधिकारिक सत्यापन जरूरी है।

नौबतपुर और मसौढ़ी से भी शिकायतें

नौबतपुर के जगतारण कुंवर प्राइवेट आईटीआई ने भी मतदाता सूची में दर्ज 20 नामों पर सवाल उठाए थे।
संस्थान ने अप्रैल में बताया था कि उसके नाम से पंजीकृत इन व्यक्तियों का रोजगार संबंधी विवरण सही नहीं है।
इसी तरह मसौढ़ी के अवधेश प्रसाद महाविद्यालय ने निर्वाचन कार्यालय को बताया था कि उसके केवल एक शिक्षक के पास मतदान की पात्रता है।
कॉलेज ने अपने नाम से जारी एक पत्र को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अंतिम मतदाता सूची में इस कॉलेज के नाम पर छह व्यक्ति दर्ज थे, जबकि कॉलेज ने उन व्यक्तियों के अपने कर्मचारी होने से इनकार किया है।

निर्वाचन अधिकारी ने क्या जवाब दिया?

पटना के प्रमंडलीय आयुक्त और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी राजेश कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची 30 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुई थी।
उनके मुताबिक, प्राप्त दावों और आपत्तियों को संबंधित जिलाधिकारियों तथा सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के पास भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन कर शिकायतों का निस्तारण किया।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, कई कॉलेजों की शिकायतें मतदाता सूची अंतिम रूप से तैयार होने के बाद सामने आईं।
हालांकि, संस्थानों द्वारा उठाई गई विशिष्ट आपत्तियों और आधिकारिक सत्यापन के निष्कर्षों में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है, यह सवाल अब भी महत्वपूर्ण है।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोट कौन दे सकता है?

बिहार विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सभी नागरिक मतदान नहीं कर सकते।
इसके लिए निर्धारित शैक्षणिक संस्थान में आवश्यक अवधि तक शिक्षण कार्य करने की पात्रता होनी चाहिए।
मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-19 का इस्तेमाल किया जाता है और सामान्यतः संबंधित पात्रता अवधि में कम-से-कम तीन वर्ष का शिक्षण अनुभव जरूरी होता है।
यही वजह है कि किसी संस्था के नाम पर गलत शिक्षक दर्ज होने की शिकायत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यदि कोई व्यक्ति आवश्यक पात्रता पूरी नहीं करता, तो उसके नाम का मतदाता सूची में होना जांच का विषय बन सकता है।

23 अक्टूबर को किन सीटों पर मतदान?

बिहार विधान परिषद की कुल आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है।
इनमें चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नालंदा और नवादा जिले आते हैं। इस सीट की मतदाता सूची में 11,719 नाम दर्ज होने की जानकारी प्रकाशित हुई है।
भाजपा के मौजूदा विधान परिषद सदस्य नवल किशोर यादव इस सीट से फिर चुनाव लड़ रहे हैं।
हालांकि, मतदाता सूची संबंधी शिकायतों से किसी उम्मीदवार या राजनीतिक दल की संलिप्तता स्वतः साबित नहीं होती। उपलब्ध रिपोर्ट में किसी उम्मीदवार द्वारा नाम गलत तरीके से जुड़वाने का प्रमाण स्थापित नहीं किया गया है।

क्या मतदाता सूची की फिर जांच होगी?

मतदान से पहले विभिन्न कॉलेजों की आपत्तियां सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित नामों की जांच किस स्तर तक की गई और संस्थानों के दस्तावेजों का मिलान कैसे हुआ।
निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
फिलहाल किसी व्यापक नए पुनरीक्षण या मतदान टालने की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं है।
इसलिए अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर चुनाव रद्द होने या पूरी मतदाता सूची को गलत घोषित किए जाने जैसी बात कहना उचित नहीं होगा।

इस मामले में आगे क्या महत्वपूर्ण है?

अब सबसे जरूरी सवाल यह है कि जिन संस्थानों ने गलत नामों की शिकायत की थी, उनके पत्रों और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की सत्यापन रिपोर्ट में क्या दर्ज है।
मतदान से पहले इन तथ्यों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने से वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।
फिलहाल पुष्टि यह है कि कई संस्थानों ने मतदाता सूची पर आपत्ति जताई है और निर्वाचन प्रशासन ने शिकायतों का निस्तारण होने की बात कही है। आरोपों की सत्यता और संभावित जिम्मेदारी के बारे में अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजी जांच पर निर्भर करेगा।

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