UP Politics: लखनऊ में राकेश टिकैत की महापंचायत, गन्ने का भाव ₹600 करने की मांग! गेट पर धरने के बाद प्रशासन ने खोला रास्ता
लखनऊ के गन्ना संस्थान में किसानों ने गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने और बकाया भुगतान की मांग उठाई। महापंचायत से पहले गेट बंद होने पर राकेश टिकैत धरने पर बैठ गए थे।
On
UP Farmers Protest: लखनऊ में राकेश टिकैत की किसान महापंचायत हुई। गन्ने का भाव ₹600 करने, बकाया भुगतान और जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग उठी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 23 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले गन्ने की कीमत को लेकर किसान संगठनों और राज्य सरकार के बीच फिर दबाव बढ़ रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ के गन्ना संस्थान में भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने किसान महापंचायत आयोजित की। इसमें राकेश टिकैत समेत कई किसान नेताओं ने सरकार से गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने और चीनी मिलों पर बकाया भुगतान जल्द दिलाने की मांग उठाई।
लेकिन इस महापंचायत से पहले गुरुवार शाम गन्ना संस्थान का गेट बंद मिलने पर विवाद हो गया था। किसान नेता राकेश टिकैत अपने समर्थकों के साथ गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि किसानों की बैठक पहले से तय थी, इसके बावजूद तैयारियों का सामान अंदर नहीं ले जाने दिया जा रहा था।
विरोध प्रदर्शन के बाद संस्थान का गेट खोल दिया गया और शुक्रवार को महापंचायत आयोजित हुई
खबर में खास
-
लखनऊ में 23 अक्टूबर को BKU की किसान महापंचायत आयोजित हुई।
-
गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई गई।
-
चीनी मिलों से बकाया भुगतान दिलाने की मांग की गई।
-
महापंचायत से पहले राकेश टिकैत ने गेट बंद होने पर धरना दिया।
-
जमीन अधिग्रहण का मुआवजा और धान खरीद के मुद्दे भी उठे।
-
नए गन्ना मूल्य पर राज्य सरकार के फैसले की प्रतीक्षा है।
गन्ना संस्थान के गेट पर क्यों बैठ गए राकेश टिकैत?
लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान में 23 अक्टूबर को किसान महापंचायत का कार्यक्रम निर्धारित था।
गुरुवार शाम जब किसान नेता तैयारियों के लिए पहुंचे तो संस्थान का मुख्य गेट बंद मिला। महापंचायत के लिए टेंट और अन्य सामान अंदर ले जाने की अनुमति नहीं मिलने से किसान नाराज हो गए।
राकेश टिकैत ने कहा कि यदि किसानों को परिसर में बैठक करने की जगह नहीं दी गई तो वे सड़क पर ही पंचायत करेंगे।
करीब दो से तीन घंटे चले विरोध प्रदर्शन के बाद गेट खोल दिया गया। टिकैत ने इस दौरान चेतावनी दी थी कि महापंचायत रोकने पर आंदोलन जिला मुख्यालयों तक फैलाया जाएगा।
₹600 प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग क्यों?
भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरी की लागत बढ़ने से गन्ने की खेती पहले से अधिक खर्चीली हो गई है।
किसान संगठन 2026–27 के पेराई सत्र के लिए राज्य सरकार से गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) राज्य सरकार निर्धारित करती है। यह केंद्र सरकार के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) से अलग व्यवस्था है।
गौरव टिकैत ने महापंचायत में कहा कि खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत के अनुपात में दाम नहीं मिल रहा। किसान नेताओं ने सरकार से नए पेराई सत्र के लिए लाभकारी मूल्य घोषित करने की मांग की।
चीनी मिलों का बकाया भुगतान भी बना मुद्दा
किसान संगठनों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाने के साथ पिछले पेराई सत्र के बकाया भुगतान पर भी सवाल उठाए।
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि कई किसानों को अब तक उनका पूरा भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से चीनी मिलों के बकाए का शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की।
इसके अलावा किसानों ने सरकारी धान खरीद केंद्रों की व्यवस्था में सुधार और भूमि अधिग्रहण के लिए उचित मुआवजे का मुद्दा उठाया।
टिकैत ने पुराने सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा निर्धारित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, प्रदेश में कुल लंबित गन्ना भुगतान की अद्यतन आधिकारिक राशि इस महापंचायत की रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
RLD और कांग्रेस भी उठा चुके हैं गन्ने का मुद्दा
गन्ना मूल्य की मांग सिर्फ किसान संगठनों तक सीमित नहीं है।
राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के विधायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर गन्ने का मूल्य बढ़ाने का मुद्दा उठा चुके हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी किसानों को अधिक कीमत दिलाने की मांग की है।
अब भारतीय किसान यूनियन ने लखनऊ में महापंचायत करके राज्य सरकार के सामने अपनी मांगें दोहराई हैं।
इससे गन्ने की कीमत का मुद्दा राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, अलग-अलग संगठनों की मांगों को किसी औपचारिक संयुक्त राजनीतिक आंदोलन की घोषणा नहीं माना जा सकता।
अब योगी सरकार के सामने क्या सवाल है?
