₹500 करोड़ के कथित ऑडियो को लेकर मनोज जरांगे और एकनाथ शिंदे के बीच विवाद। शिवसेना ने फोरेंसिक और SIT जांच की मांग की। (AI सांकेतिक चित्र)
यूपी के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 10,470 मतदाता प्रविष्टियां अनियमित पाई गईं। बिना संबंधित आवेदन रिकॉर्ड के बदलाव मंजूर हुए। दो अधिकारियों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
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UP Voter List Controversy: पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में 10,470 अनियमित प्रविष्टियां मिलने पर दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज हुई। जानिए जांच में क्या सामने आया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/पीलीभीत | 23 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में जांच के दौरान 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में अनियमितता मिलने के बाद दो उपजिलाधिकारियों (SDM) और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
मामला तब सामने आया जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हजारों मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर वही बने रहे। शिकायत के बाद निर्वाचन विभाग ने जांच कराई और मतदाता विवरण में बदलाव से संबंधित हजारों आवेदनों के रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाए गए।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
खबर में खास
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पीलीभीत सदर में 10,470 मतदाता प्रविष्टियां अनियमित मिलीं।
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13,779 Form-8 आवेदन दर्ज किए गए थे।
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इनमें 10,470 आवेदन मंजूर और 3,309 खारिज हुए।
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दो SDM और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
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कांग्रेस ने 13,150 मतदाताओं के नाम बदले जाने का आरोप लगाया।
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अन्य मतदाता सूचियों की जांच और गलतियों को सुधारने के निर्देश दिए गए।
आखिर कैसे सामने आई 10,470 वोटरों की गड़बड़ी?
निर्वाचन विभाग की जांच में पता चला कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच पीलीभीत सदर के मतदाता पंजीकरण केंद्र में कुल 13,779 Form-8 आवेदन दर्ज किए गए थे।
Form-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज विवरण को सुधारने या बदलने के लिए किया जाता है।
इन आवेदनों में से 10,470 को मंजूरी दे दी गई, जबकि 3,309 आवेदन खारिज हुए। लेकिन जांच के दौरान संबंधित आवेदन पत्र और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले।
इसी वजह से मंजूर की गई 10,470 प्रविष्टियों को अनियमित माना गया। यह निष्कर्ष रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया में गड़बड़ी से संबंधित है; हर प्रविष्टि के पीछे जानबूझकर धोखाधड़ी हुई थी या नहीं, यह जांच का विषय है।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
पीलीभीत के जिलाधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, दो उपजिलाधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। वहीं कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है।
मामले में तीनों के खिलाफ FIR दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। संबंधित सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है
कांग्रेस ने 13,150 नाम बदलने का आरोप लगाया था
इस विवाद की शुरुआत कांग्रेस की शिकायत से हुई थी।
21 अक्टूबर को कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC और क्रमांक वही रहे।
कांग्रेस ने 804 मतदाताओं के नाम हटाए जाने और करीब 2,600 बाहरी लोगों के नाम जोड़े जाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और अन्य नेताओं ने इस मामले की व्यापक जांच की मांग की। समाजवादी पार्टी ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी पर सवाल उठाए।
हालांकि, कांग्रेस के 13,150 नाम बदले जाने के दावे और निर्वाचन विभाग की जांच में मिली 10,470 अनियमित प्रविष्टियां दो अलग-अलग आंकड़े हैं। इन्हें एक ही निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
2027 के चुनाव से पहले मामला क्यों महत्वपूर्ण?
पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री संजय गंगवार विधायक हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने करीब 6,920 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
यही वजह है कि मतदाता सूची में हजारों प्रविष्टियों की अनियमितता का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। हालांकि, 2022 का जीत का अंतर और 2026 में मिली अनियमितताओं का आंकड़ा सीधे तुलना करके किसी चुनाव परिणाम में बदलाव होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मतदाता सूची की शुद्धता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पात्र मतदाता का सही नाम और विवरण दर्ज होना मतदान प्रक्रिया की बुनियादी आवश्यकता है।
क्या पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की जांच होगी?
पीलीभीत की जांच के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदाता सूची से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए हैं।
पीलीभीत में संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा दर्ज Form-6 और Form-7 आवेदनों की भी जांच की जा रही है। Form-6 नए मतदाता का नाम जोड़ने और Form-7 नाम हटाने से संबंधित होता है।
इसके साथ ही Form-8 के जरिए हुई अनियमित प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
