UP Police Encounter: 'ऑपरेशन लंगड़ा' पर सवाल! 650 मामलों का रिकॉर्ड, हाईकोर्ट की टिप्पणी और यूपी पुलिस का जवाब

AP की नई रिपोर्ट में यूपी में कथित गो-तस्करी के आरोपियों से जुड़े करीब 650 गोलीबारी मामलों का रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस ने आत्मरक्षा का पक्ष रखा, जबकि हाईकोर्ट की पुरानी टिप्पणी ने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

UP Police Encounter Operation Langda News and Allahabad High Court Remarks

UP Police Encounter News: AP की पड़ताल में कथित गो-तस्करी से जुड़े करीब 650 पुलिस गोलीबारी मामलों का रिकॉर्ड सामने आया। जानिए पुलिस का जवाब, हाईकोर्ट की टिप्पणी और आंकड़ों का पूरा सच।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/मेरठ | 23 अक्टूबर 2026
up-police-encounter-operation-langda-650-cases-high-court.webp (2)
यूपी पुलिस के कथित 'ऑपरेशन लंगड़ा' पर उठे सवाल! 650 मामलों का रिकॉर्ड, हाईकोर्ट की टिप्पणी और पुलिस का जवाब चर्चा में।
उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। अब अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Associated Press (AP) की 23 अक्टूबर को प्रकाशित नई पड़ताल में पुलिस मुठभेड़ों से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।
इस रिपोर्ट में वर्ष 2020 से कथित गो-तस्करी के आरोपियों पर पुलिस गोलीबारी की करीब 650 घटनाओं का रिकॉर्ड सामने रखा गया है। इनमें बड़ी संख्या में आरोपियों के पैरों में गोली लगी थी। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई है।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि पुलिसकर्मी आत्मरक्षा में गोली चलाते हैं और अपराधियों के पैरों को निशाना बनाने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।
खबर में खास
  • AP ने 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश पुलिस की गोलीबारी से जुड़ी नई पड़ताल प्रकाशित की।
  • एक शोध संगठन ने 2020 से कथित गो-तस्करी से जुड़े करीब 650 मामलों का रिकॉर्ड जुटाया।

  • AP ने इनमें से 200 से अधिक घटनाओं के नमूने की स्वतंत्र समीक्षा की।

  • पहचान संबंधी जानकारी वाले 627 मामलों में लगभग 93% घायल संदिग्ध मुस्लिम थे।

  • यूपी पुलिस ने कहा कि आत्मरक्षा में ही गोली चलाने के निर्देश हैं।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट जनवरी 2026 में पैरों पर गोली चलाने की घटनाओं पर सवाल उठा चुका है।

आखिर 650 मामलों का आंकड़ा कहां से आया?

AP की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका स्थित शोध संगठन Center for the Study of Organized Hate ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2020 से पुलिस गोलीबारी में घायल कथित गो-तस्करी आरोपियों के करीब 650 मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया।
यह रिकॉर्ड सार्वजनिक पुलिस सूचनाओं और संबंधित घटनाओं पर आधारित था। AP ने इसमें से 200 से अधिक मामलों के नमूने की स्वतंत्र समीक्षा की।
कई घटनाओं में एक समान बात सामने आई—घायल आरोपियों के पैरों, विशेषकर घुटने के नीचे, गोली लगी थी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि करीब 650 का आंकड़ा सभी प्रकार की पुलिस मुठभेड़ों का कुल सरकारी आंकड़ा नहीं है। यह एक विशेष श्रेणी की घटनाओं पर शोध संगठन द्वारा संकलित रिकॉर्ड है।
93 प्रतिशत का आंकड़ा क्या बताता है?
शोध संगठन ने जिन 627 मामलों में घायल व्यक्तियों की पहचान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होने की बात कही, उनमें लगभग 93 प्रतिशत मुस्लिम पाए गए।
इस आंकड़े को लेकर संगठन ने भेदभाव की आशंका जताई है।
हालांकि, यह प्रतिशत सिर्फ अध्ययन में शामिल पहचान योग्य मामलों से संबंधित है। इससे अपने आप यह सिद्ध नहीं होता कि हर घटना में धार्मिक आधार पर गोली चलाई गई थी।
इस निष्कर्ष के लिए हर मुठभेड़ की परिस्थितियों, पुलिस रिकॉर्ड, स्वतंत्र साक्ष्यों और कानूनी जांच की जरूरत होगी।

यूपी पुलिस ने आरोपों पर क्या कहा?

उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ यश ने AP को दिए जवाब में कहा कि पुलिसकर्मियों को केवल आत्मरक्षा की स्थिति में गोली चलाने के निर्देश हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के पैरों में गोली मारने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि घटनाओं में चोट के समान स्वरूप को लेकर उचित शिकायत आती है, तो उसकी जांच कराई जा सकती है।
पुलिस का पक्ष है कि सख्त कानून-व्यवस्था नीति से अपराधियों में डर बढ़ा है और आम नागरिकों की सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
इसलिए पुलिस के आधिकारिक पक्ष और शोध रिपोर्ट में उठाई गई आशंकाओं के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी में क्या कहा था?
इस नई रिपोर्ट से पहले 30 जनवरी 2026 के एक न्यायिक आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस मुठभेड़ों के दौरान आरोपियों के पैरों पर गोली चलने की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी की थी।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा था कि इस तरह की घटनाएं नियमित प्रवृत्ति बनती दिखाई दे रही हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि किसी आरोपी को दंड देने का अधिकार न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं।
साथ ही पुलिस अधिकारियों से मुठभेड़ की जांच, FIR और घायल आरोपी के बयान दर्ज करने जैसी कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर जानकारी मांगी गई थी।
यह आदेश विशिष्ट मामलों की सुनवाई के दौरान आया था। इसे सभी 650 घटनाओं पर दिया गया सामूहिक न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।
2017 से अक्टूबर 2026 तक कितनी मुठभेड़ें हुईं?
AP को उपलब्ध कराए गए उत्तर प्रदेश पुलिस के व्यापक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2017 से 13 अक्टूबर 2026 के बीच पुलिस मुठभेड़ों में 316 संदिग्ध व्यक्तियों की मौत हुई।
इसी अवधि में 12,890 संदिग्ध घायल हुए। ड्यूटी के दौरान 18 पुलिसकर्मियों की मौत और 1,953 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी भी दर्ज की गई।
ये पूरे राज्य की मुठभेड़ों से संबंधित आंकड़े हैं, जबकि करीब 650 मामलों वाला अध्ययन कथित गो-तस्करी से जुड़ी एक अलग श्रेणी पर केंद्रित है। दोनों आंकड़ों को जोड़कर या एक-दूसरे का हिस्सा मानकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
योगी सरकार की कानून-व्यवस्था नीति पर क्या सवाल हैं?
उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है।
पुलिस का दावा है कि 'जीरो टॉलरेंस' नीति से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ता और कानूनी विशेषज्ञ कहते हैं कि अपराध नियंत्रण के साथ प्रत्येक पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा भी आवश्यक है।
यही मुद्दा अब नई AP रिपोर्ट से दोबारा सामने आया है।
सवाल केवल अपराधियों के खिलाफ सख्ती का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का भी है कि पुलिस द्वारा बल का इस्तेमाल कानून के अनुसार हो और हर गंभीर घटना की निष्पक्ष जांच की जाए।
फिलहाल रिपोर्ट ने घटनाओं का रिकॉर्ड और कई सवाल सार्वजनिक किए हैं। हर मामले में अपराध या पुलिस के अनुचित आचरण की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी संबंधित जांच तथा अदालत के निष्कर्षों से ही तय होगी।

 

About The Author

Advertisement

LatestNews

UP Politics: लखनऊ में राकेश टिकैत की महापंचायत, गन्ने का भाव ₹600 करने की मांग! गेट पर धरने के बाद प्रशासन ने खोला रास्ता
UP Police Encounter: 'ऑपरेशन लंगड़ा' पर सवाल! 650 मामलों का रिकॉर्ड, हाईकोर्ट की टिप्पणी और यूपी पुलिस का जवाब
Uttarakhand UCC News: धामी सरकार ने बदले समान नागरिक संहिता के नियम! SC-ST छात्रों की फ्री कोचिंग के लिए आय सीमा ₹8 लाख, कैबिनेट के कई बड़े फैसले
Andhra Pradesh Election: सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 100 निकायों के चुनाव टले! 4 जगह फिर खुला नामांकन, TDP-YSRCP में विवाद
Punjab Politics: राज्यपाल से मिले सुखबीर बादल, CM भगवंत मान को हटाने की मांग! BJP से गठबंधन पर भी दिया बड़ा बयान
Punjab Politics: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल की जांच की मांग! पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पास, भगवंत मान ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप
Maharashtra MLC Election: स्पाई कैमरे वाले पेन से वोट रिकॉर्ड कर पैसे बांटने का आरोप! सुप्रिया सुले ने BJP को घेरा, फडणवीस का जवाब