‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी पर राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, रद्द नहीं होगा समन; सुप्रीम कोर्ट जाने को मिले 6 हफ्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2018 में की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है मामला, हाईकोर्ट ने कहा—मजिस्ट्रेट के आदेश में कोई कानूनी खामी नजर नहीं आती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित ‘कमांडर-इन-थीफ’ टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने समन रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।
इन-थीफ’ विवाद?
यह मामला वर्ष 2018 में राजस्थान में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से की गई टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2018 को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो भी साझा किया था, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को लेकर यही टिप्पणी की गई थी। हालांकि, ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इन पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।
किसने दर्ज कराया था मानहानि का मामला?
राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा से जुड़े महेश श्रीश्रीमाल ने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि राहुल गांधी की टिप्पणी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और पार्टी से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन और शिकायत को चुनौती देते हुए वर्ष 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।
वर्ष 2021 से राहुल गांधी को मिली हुई थी राहत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नवंबर 2021 में मजिस्ट्रेट अदालत को मामले की कार्यवाही स्थगित रखने का निर्देश दिया था। इस अंतरिम आदेश के कारण राहुल गांधी को निचली अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं थी। उनकी याचिका पर अलग-अलग तारीखों में सुनवाई होती रही और अंतरिम राहत भी बढ़ाई जाती रही।
फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए समन को बरकरार रखा है।
क्या अब राहुल गांधी को अदालत में पेश होना पड़ेगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि मामले की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। हालांकि, राहुल गांधी को फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए छह सप्ताह की सुरक्षा दी गई है। यदि वह इस अवधि में सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं, तो आगे की कानूनी स्थिति शीर्ष अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।
फिलहाल इस मामले में राहुल गांधी को दोषी नहीं ठहराया गया है। हाईकोर्ट ने केवल मानहानि की शिकायत और समन को शुरुआती स्तर पर रद्द करने से इनकार किया है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला मुकदमे की सुनवाई और पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर होगा।
