आंखों के सामने गंगा में समाया 150 साल पुराना शिव मंदिर, रोते रहे ग्रामीण; मालदा का भयावह Video वायरल

तेज जलधारा और भीषण कटाव से कुछ ही सेकेंड में ढह गया मंदिर; 100 से ज्यादा घर बहने की खबर, 1,700 से अधिक लोग राहत शिविरों में

मालदा में गंगा के कटाव से नदी में समाता करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा के भीषण कटाव की चपेट में आकर करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया। मंदिर ढहने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। प्रभावित गांवों से लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है।

मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उफनती गंगा ने एक ऐतिहासिक शिव मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया। रतुआ इलाके में स्थित करीब 150 साल पुराना मंदिर नदी किनारे हो रहे भीषण कटाव के कारण देखते ही देखते गंगा में समा गया।

मंदिर के ढहने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में नदी किनारे खड़ा मंदिर धीरे-धीरे एक तरफ झुकता है और कुछ ही सेकेंड में पूरी इमारत गंगा की तेज धारा में गिर जाती है। वहां मौजूद ग्रामीण बेबस होकर इस पूरे घटनाक्रम को देखते रहे।

स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा था। मंदिर को आंखों के सामने गिरता देखकर कई ग्रामीण भावुक हो गए।

पिछले साल से मंदिर पर मंडरा रहा था खतरा

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पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा के भीषण कटाव की चपेट में आकर करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर नदी में समा गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नदी किनारे लगातार हो रहे कटाव के कारण पिछले साल से ही शिव मंदिर पर खतरा मंडरा रहा था। गंगा की धारा धीरे-धीरे मंदिर के पास की जमीन काट रही थी।

हाल के दिनों में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने से कटाव अचानक तेज हो गया। मंदिर की नींव के नीचे की मिट्टी कमजोर होने के बाद पूरी इमारत गंगा में गिर गई।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना मालदा के रतुआ क्षेत्र में हुई है और मंदिर के नदी में गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

वीडियो देखकर भावुक हुए लोग

वायरल वीडियो में मंदिर के आसपास कई ग्रामीण खड़े दिखाई देते हैं। जैसे ही मंदिर गंगा में गिरता है, मौके पर मौजूद लोगों के बीच चीख-पुकार मच जाती है।

कई ग्रामीण धार्मिक नारे लगाते हुए दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां इस मंदिर में पूजा करती आई थीं। कटाव के कारण मंदिर को बचाने की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं।

सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद लोग मंदिर के नष्ट होने पर दुख जता रहे हैं। कई यूजर्स ने नदी किनारे बने गांवों और ऐतिहासिक इमारतों को बचाने के लिए स्थायी कटावरोधी व्यवस्था की मांग की है।

फरक्का बैराज से पानी छोड़े जाने का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरक्का बैराज से करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का बहाव और जलस्तर बढ़ा। इसके कारण नदी किनारे हो रहा कटाव और गंभीर हो गया।

हालांकि, मंदिर गिरने के लिए बैराज से छोड़े गए पानी को सीधे जिम्मेदार ठहराने वाली कोई विस्तृत आधिकारिक तकनीकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। नदी का कटाव जलस्तर, मिट्टी की स्थिति, धारा की दिशा और लंबे समय से हो रहे भू-क्षरण जैसे कई कारणों से प्रभावित हो सकता है।

100 से ज्यादा घर बहने की खबर

मालदा के रतुआ इलाके में गंगा का कटाव केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। श्रीकांतटोला, जित्तूटोला और मुनीरामटोला जैसे क्षेत्रों में 100 से अधिक घर नदी में बहने या बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की खबर है।

कई परिवार समय रहते अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए, जबकि कुछ लोगों को अपनी संपत्ति और घर छोड़ना पड़ा। नदी के किनारे बने अन्य मकानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक संरचनाओं पर भी खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों को डर है कि गंगा का जलस्तर और बढ़ने पर कटाव आबादी वाले नए इलाकों तक पहुंच सकता है। प्रभावित गांवों के लोग प्रशासन से स्थायी तटबंध और पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।

1,725 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया

रिपोर्टों के अनुसार, रतुआ क्षेत्र के लगभग 1,725 प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया है। वहीं 63 परिवारों को खसकोल हाई स्कूल में बनाए गए अस्थायी आश्रय स्थल में ठहराया गया है।

प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम स्थिति पर नजर रख रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों और केंद्रीय बलों को भी तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। भूटनी द्वीप तक संपर्क बहाल करने के लिए अस्थायी रास्ता तैयार करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

तटबंध टूटने से बढ़ी ग्रामीणों की चिंता

मालदा के भूटनी इलाके में गंगा का जलस्तर बढ़ने और रिंग बांध क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश करने के बाद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।

कुछ स्थानों पर तटबंध की मरम्मत और वैकल्पिक रास्ते बनाने का काम चल रहा है। लेकिन गंगा की तेज धारा और लगातार कटाव के कारण राहत कार्यों में परेशानी आ रही है।

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

ऐतिहासिक मंदिर के साथ यादें भी बह गईं

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह शिव मंदिर करीब 150 साल पुराना था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसकी आयु लगभग 175 साल भी बताई गई है। मंदिर की सही निर्माण तिथि से संबंधित कोई प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।

इसके बावजूद मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र था। यहां धार्मिक अनुष्ठान और स्थानीय आयोजन होते थे। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के साथ उनके परिवारों और गांव की कई पुरानी यादें भी गंगा में समा गईं।

कटाव ने फिर खड़े किए बड़े सवाल

मालदा में गंगा का कटाव नई समस्या नहीं है। प्रत्येक वर्ष बरसात और बाढ़ के दौरान नदी किनारे बसे गांवों में जमीन, मकान तथा खेती को नुकसान पहुंचता है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि खतरे की जानकारी पहले से होने के बावजूद मंदिर और आसपास के घरों को सुरक्षित करने के लिए समय रहते पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए? स्थानीय लोगों की मांग है कि अस्थायी मरम्मत के बजाय वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी कटावरोधी व्यवस्था बनाई जाए।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय, भोजन और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के साथ खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों को समय रहते निकालने की है। मालदा में बिगड़ती बाढ़ की स्थिति पर रिपोर्ट

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