मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की आहट: किसका बढ़ेगा कद, किसकी होगी छुट्टी? 12 पद खाली
परफॉर्मेंस, युवा और महिला प्रतिनिधित्व के साथ 2027 के विधानसभा चुनाव बन सकते हैं बदलाव का आधार; सहयोगी दलों के समीकरण पर भी नजर
मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज है। मंत्रियों का प्रदर्शन, युवा और महिला चेहरों को मौका, क्षेत्रीय संतुलन, NDA सहयोगियों की मांग और 2027 के विधानसभा चुनाव इस बदलाव का आधार बन सकते हैं। हालांकि अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मोदी कैबिनेट में बदलाव की चर्चा क्यों हुई तेज?
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में बड़े कैबिनेट फेरबदल और मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव होने के बाद अब सबकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद पर टिकी है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि मोदी सरकार में किन मंत्रियों का कद बढ़ेगा, किसके विभाग में बदलाव होगा और किन नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
माना जा रहा है कि संभावित बदलाव केवल खाली पदों को भरने तक सीमित नहीं होगा। मंत्रियों की परफॉर्मेंस, युवा नेतृत्व, महिला प्रतिनिधित्व, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन, NDA के सहयोगी दल तथा आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जा सकता है। India Today की रिपोर्ट
मंत्रिपरिषद में 12 स्थान खाली
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की मंत्रिपरिषद में कुल 69 सदस्य बताए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। इस हिसाब से अभी 12 और नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल करने की गुंजाइश है।
हालांकि, फेरबदल का फैसला केवल खाली पदों की संख्या देखकर किए जाने की संभावना नहीं है। सरकार कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदल सकती है, कुछ नेताओं का प्रमोशन हो सकता है और कामकाज उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने पर कुछ मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है।
परफॉर्मेंस बनेगी सबसे बड़ी कसौटी?
संभावित कैबिनेट फेरबदल में मंत्रियों का अब तक का प्रदर्शन सबसे बड़ा आधार बन सकता है। अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाओं की प्रगति, लंबित परियोजनाएं, सरकारी कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने की क्षमता और जनता के बीच मंत्रालय की उपलब्धियां पहुंचाने के प्रयासों का आकलन किया जा सकता है।
इसके साथ मंत्रियों की संसद में उपस्थिति, अपने मंत्रालय पर पकड़, विवादों से दूरी, सोशल मीडिया पर सक्रियता और राजनीतिक प्रभाव को भी देखा जा सकता है।
लेकिन सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से मंत्रियों की किसी आधिकारिक मूल्यांकन रिपोर्ट अथवा संभावित फेरबदल की सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
युवा और महिला नेताओं को मिल सकता है अवसर
बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में बड़ी संख्या में नए चेहरों को जिम्मेदारी दी है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम में 51 नए चेहरे शामिल किए गए। इसे बीजेपी के संगठन में पीढ़ीगत बदलाव और 2027 के चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
इसी तर्ज पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में भी युवा सांसदों और महिला नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी ऐसे नेताओं को अवसर दे सकती है जो संगठन में सक्रिय रहे हों, अपने क्षेत्र में मजबूत प्रभाव रखते हों और भविष्य के चुनावों में मतदाताओं के अलग-अलग वर्गों को जोड़ सकें।
हालांकि किसी विशेष सांसद या विधायक को मंत्री बनाने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
उत्तर प्रदेश सहित इन राज्यों पर रहेगा फोकस
वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां लोकसभा की 80 सीटें हैं।
संभावित कैबिनेट फेरबदल में उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का ध्यान रखा जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड के प्रतिनिधित्व के साथ पिछड़े, दलित, युवा तथा महिला नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है।
गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों के नेताओं को लेकर भी चर्चा चल रही है। अंतिम निर्णय आगामी चुनावों, संगठन की जरूरत और सरकार की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग
केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री अभी एक से अधिक मंत्रालय संभाल रहे हैं। इनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और मनसुख मांडविया जैसे नाम शामिल हैं।
माना जा रहा है कि फेरबदल होने पर इनमें से कुछ मंत्रियों का कार्यभार कम करते हुए उनके अतिरिक्त विभाग नए चेहरों को दिए जा सकते हैं। इससे मंत्रालयों के काम का बेहतर तरीके से बंटवारा किया जा सकेगा।
रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे अश्विनी वैष्णव के पास भी कई जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में उनके विभागों के बंटवारे को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
किन पदों के खाली होने से बदला समीकरण?
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से पिछले कुछ समय में हुई तीन प्रमुख विदाई के कारण भी फेरबदल की चर्चा को बल मिला है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई में मंत्रिमंडल छोड़ा था और उनके विभाग का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया। इसके अलावा रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ दिया था।
इन खाली जिम्मेदारियों के कारण सरकार के सामने नए मंत्रियों को शामिल करने और विभागों का दोबारा वितरण करने की जरूरत मानी जा रही है।
नितिन गडकरी को लेकर क्या चर्चा है?
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मोदी सरकार के सबसे अनुभवी और चर्चित मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह 2014 से लगातार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे हैं।
सरकार की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उनके मंत्रालय की प्रमुख भूमिका रही है। सोशल मीडिया पर भी गडकरी की मजबूत पहुंच बताई जाती है। इसीलिए उनके नाम को कैबिनेट फेरबदल से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुखता मिल रही है।
फिलहाल नितिन गडकरी का मंत्रालय बदले जाने या उन्हें कोई दूसरी जिम्मेदारी दिए जाने की आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसलिए इस संबंध में सामने आ रहे दावों को अभी अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
NDA सहयोगियों को मिल सकता है बड़ा हिस्सा
संभावित फेरबदल में बीजेपी के सहयोगी दलों की मांग भी महत्वपूर्ण होगी। महाराष्ट्र और पंजाब के बदलते राजनीतिक समीकरणों के साथ उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सहयोगी दलों के प्रतिनिधित्व पर भी विचार किया जा सकता है।
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को केंद्र सरकार में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा है। श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित मंत्री के रूप में लिया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरएलडी नेता एवं केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी की जिम्मेदारी बढ़ने की संभावना भी राजनीतिक चर्चाओं में है। उत्तर प्रदेश चुनाव और पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच उनकी पार्टी के प्रभाव को देखते हुए उनका महत्व बढ़ सकता है।
इसी तरह लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जेडीयू और दूसरे NDA सहयोगी भी अपने राजनीतिक प्रभाव के अनुसार बेहतर प्रतिनिधित्व की अपेक्षा रख सकते हैं।
क्या कुछ बड़े मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी?
फिलहाल किसी मंत्री को हटाए जाने की आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्टों में परफॉर्मेंस के आधार पर कुछ बदलावों की संभावना जरूर जताई गई है, लेकिन बिना सरकारी घोषणा किसी मंत्री का नाम संभावित तौर पर हटने वालों में लिखना उचित नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी मंत्रियों के कामकाज और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते रहे हैं। इसलिए यदि फेरबदल होता है तो खराब प्रदर्शन, राजनीतिक उपयोगिता, क्षेत्रीय समीकरण और भविष्य की जिम्मेदारियों जैसे कई पहलुओं को देखकर निर्णय लिया जा सकता है।
2027 से 2029 तक की रणनीति
संभावित फेरबदल को केवल सरकार के कामकाज तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा। इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव की बड़ी रणनीति भी हो सकती है।
बीजेपी की कोशिश ऐसे मंत्रिमंडल की हो सकती है जिसमें अनुभव और युवा नेतृत्व के साथ अलग-अलग राज्यों, समुदायों और सहयोगी दलों को पर्याप्त जगह मिल सके। सरकार को अपनी योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों की भी जरूरत होगी जो मंत्रालय संभालने के साथ जनता के बीच प्रभावी राजनीतिक संदेश पहुंचा सकें।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी पुराने और अनुभवी चेहरों पर भरोसा बनाए रखेंगे या आने वाले चुनावों से पहले सरकार में नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारी देंगे।
आपके अनुसार मोदी कैबिनेट में किस नेता को शामिल किया जाना चाहिए और किस मंत्री का विभाग बदला जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
