BRICS Summit से पहले रूस की दो टूक—डॉलर हटाना लक्ष्य नहीं, अपनी करेंसी में कारोबार पर दिया बड़ा संदेश; भारत की भूमिका की तारीफ
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव बोले—रूस किसी स्वीकार्य भुगतान माध्यम के खिलाफ नहीं; दिल्ली सम्मेलन में सस्ते और आसान सीमा-पार भुगतान पर होगी चर्चा
नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit से पहले रूस ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार और डॉलर पर अपना रुख स्पष्ट किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस का उद्देश्य डॉलर को समाप्त करना नहीं, बल्कि सदस्य देशों को भुगतान के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है।
I से जुड़ सकती है नई व्यवस्था?
भारत का UPI, ब्राजील का Pix, रूस का SPFS और चीन का CIPS अपने-अपने देशों एवं क्षेत्रों में भुगतान या वित्तीय संदेश भेजने वाली महत्वपूर्ण प्रणालियां हैं। इन नेटवर्क को किसी रूप में जोड़ने की संभावना पर चर्चा जरूर है, लेकिन अभी तक किसी पूर्ण BRICS भुगतान प्रणाली की आधिकारिक शुरुआत की पुष्टि नहीं हुई है।
यदि भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनती है, तो सदस्य देशों के बीच व्यापारिक भुगतान में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है। पर्यटकों तथा छोटे कारोबारियों के लिए भी एक देश की भुगतान प्रणाली को दूसरे सदस्य देश में इस्तेमाल करना आसान हो सकता है।
लेकिन इसे लागू करने से पहले डेटा सुरक्षा, विनिमय दर, तकनीकी मानक, वित्तीय निगरानी और सदस्य देशों के कानूनों जैसे कई मुद्दों पर सहमति आवश्यक होगी।
भारत-रूस व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का बढ़ता इस्तेमाल
भारत और रूस के व्यापार में रुपये और रूबल सहित राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच करीब 96 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार का भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।
रूस के स्बेरबैंक से जुड़े अधिकारी ने दावा किया था कि भारत और रूस के बीच भुगतान का मजबूत ढांचा तैयार हो चुका है और अधिकांश लेन-देन बहुत कम समय में पूरे किए जा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों के व्यापार में असंतुलन अब भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल सहित कई वस्तुएं आयात करता है, जबकि रूस को भारतीय निर्यात तुलनात्मक रूप से कम है।
भारत की मेजबानी की रूस ने की सराहना
BRICS Summit की तैयारियों के बीच रूस ने भारत की अध्यक्षता और संगठन में उसकी भूमिका की सराहना की है। पेस्कोव के बयान से संकेत मिलता है कि मॉस्को को नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन से आर्थिक सहयोग और सीमा-पार भुगतान के क्षेत्र में ठोस प्रगति की उम्मीद है।
भारत वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। संगठन में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हैं।
भारत का रुख क्या है?
भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर को हटाना या उसके स्थान पर कोई नई वैश्विक मुद्रा खड़ी करना नहीं है। नई दिल्ली का जोर व्यापारिक भुगतान के विकल्प बढ़ाने, रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने और सीमा-पार भुगतान की लागत कम करने पर रहा है।
इसलिए दिल्ली सम्मेलन में होने वाली चर्चा को सीधे ‘डॉलर के अंत’ के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। वास्तविक मुद्दा सदस्य देशों के बीच ऐसी भुगतान व्यवस्था तैयार करना है, जिससे राजनीतिक या वित्तीय बाधाओं के बावजूद व्यापार सुचारु रूप से जारी रह सके।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि BRICS Summit में सदस्य देश केवल चर्चा तक सीमित रहते हैं या भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा और साझा रोडमैप भी घोषित करते हैं
