हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर महिला स्टाफ को हटाने का आरोप, हड़ताल से बंद हुआ Eiffel Tower; BAPS ने दी सफाई
करीब 100 सदस्यों के निजी दौरे के बाद कर्मचारियों में नाराजगी; एफिल टावर प्रबंधन ने गलती मानकर मांगी माफी, पेरिस प्रशासन ने शुरू कराई जांच
पेरिस के एफिल टावर पर BAPS से जुड़े हिंदू प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कथित रूप से कार्यस्थल से हटाने का मामला सामने आया है। विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल की, जिससे एफिल टावर पर्यटकों के लिए बंद रहा। BAPS ने जानबूझकर किसी को अलग करने से इनकार करते हुए खेद जताया है।
पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस का विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर एक धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के निजी दौरे के बाद विवादों में आ गया। आरोप है कि हिंदू धार्मिक संस्था BAPS के प्रतिनिधियों के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थलों से हटाकर कुछ स्थानों पर पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया।
इस घटना से नाराज एफिल टावर के कर्मचारियों ने सोमवार, 7 सितंबर को हड़ताल कर दी। इसके कारण एफिल टावर को पर्यटकों के लिए बंद रखना पड़ा। कर्मचारियों ने प्रबंधन से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में किसी भी प्रतिनिधिमंडल के लिए महिला कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार न किया जाए।
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने स्वीकार किया कि दौरे से जुड़ी कुछ शर्तों को मानना गलत था। वहीं BAPS ने जानबूझकर महिलाओं को अलग रखने की बात से इनकार किया और घटना से किसी को हुई परेशानी या दुख के लिए माफी मांगी है।
कब और कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह मामला शनिवार, 5 सितंबर 2026 को BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था से जुड़े करीब 100 लोगों के निजी दौरे से जुड़ा है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पेरिस के पास बनाए गए एक नए हिंदू मंदिर के उद्घाटन से संबंधित धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए फ्रांस पहुंचे थे। बड़ी संख्या को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल के लिए एफिल टावर के नियमित रूप से खुलने से पहले विशेष दौरे की व्यवस्था की गई थी।
कर्मचारी यूनियन के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल के गुजरने से पहले कुछ महिला कर्मचारियों को अपनी पोस्ट छोड़ने और दूसरे स्थान पर जाने के निर्देश दिए गए। कुछ स्थानों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुषों को तैनात करने का आरोप भी लगाया गया है।
महिला कर्मचारियों ने क्या आरोप लगाए?
यूनियन प्रतिनिधि डायने डावोइन के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को उन क्षेत्रों से हटाया गया, जहां से प्रतिनिधिमंडल को गुजरना था। कुछ महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर दौरा समाप्त होने तक विशेष क्षेत्रों में प्रवेश नहीं करने के लिए कहा गया।
कर्मचारियों का कहना है कि केवल महिला होने के कारण उन्हें अलग करना अपमानजनक और लैंगिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ था। घटना की जानकारी अन्य कर्मचारियों तक पहुंचने के बाद सामूहिक बैठक बुलाई गई और हड़ताल का फैसला किया गया।
हड़ताल के कारण सोमवार को एफिल टावर पर्यटकों के लिए बंद रहा। इससे वहां पहुंचे हजारों पर्यटकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। रॉयटर्स की विस्तृत रिपोर्ट
प्रबंधन ने स्वीकार की अपनी गलती
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने से जुड़ा अनुरोध किया गया था।
कंपनी ने स्वीकार किया कि इस प्रकार की शर्त को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। प्रबंधन ने इसे अपनी संस्था के मूल्यों और फ्रांस में महिला-पुरुष समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया।
SETE के अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में डालना स्वीकार्य नहीं है। प्रबंधन ने महिला कर्मचारियों और अन्य स्टाफ से माफी मांगते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा नहीं होने देने का भरोसा दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने प्रबंधन से स्पष्ट नियम बनाने और किसी धार्मिक या निजी प्रतिनिधिमंडल के लिए लैंगिक आधार पर कर्मचारियों को अलग नहीं करने की मांग की है।
BAPS ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद BAPS ने बयान जारी कर कहा कि एफिल टावर के दौरे की व्यवस्था टावर प्रबंधन के सहयोग से नियमित समय से पहले की गई थी। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आए प्रतिनिधियों के कारण दूसरे पर्यटकों को होने वाली असुविधा को कम करना था।
संस्था ने दावा किया कि उसकी जानकारी में किसी व्यक्ति को एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। BAPS ने महिलाओं को जानबूझकर कार्यस्थल से हटाने या उनके साथ भेदभाव करने की बात से इनकार किया।
हालांकि, संस्था ने कहा कि यदि इस व्यवस्था से किसी कर्मचारी को दुख, परेशानी या अपमान महसूस हुआ है तो वह उसके लिए ईमानदारी से माफी मांगती है। BAPS ने आपसी सम्मान, सेवा और सद्भाव के मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
फ्रांस सरकार के नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटना पर फ्रांस के कई राजनीतिक नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने कर्मचारियों की नाराजगी को उचित बताते हुए मामले की तत्काल जांच कराने की घोषणा की।
फ्रांस की लैंगिक समानता मंत्री ऑरोर बर्गे ने कहा कि फ्रांस में महिलाओं से पीछे हटने या सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई न देने के लिए नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई भी धार्मिक विश्वास या परंपरा फ्रांस के कानून और महिला-पुरुष समानता से ऊपर नहीं है।
फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे और पूर्व प्रधानमंत्री गेब्रियल अटाल ने भी घटना की आलोचना की। नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ समान व्यवहार फ्रांस के गणतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या टावर दोबारा खोल दिया गया?
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एफिल टावर सोमवार को बंद रहा। प्रबंधन से बातचीत और मामले की जांच के आश्वासन के बाद इसे मंगलवार, 8 सितंबर को पर्यटकों के लिए दोबारा खोलने की तैयारी की गई।
कर्मचारियों ने मांग की है कि भविष्य में निजी अथवा धार्मिक दौरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था स्वीकार न की जाए, जिससे महिला कर्मचारियों को उनके पद से हटना पड़े या उनकी आवाजाही सीमित हो।
जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
पेरिस प्रशासन की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि महिला कर्मचारियों को हटाने का निर्देश किस स्तर पर दिया गया था। यह भी देखा जाएगा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से वास्तव में क्या अनुरोध किया गया और प्रबंधन ने उसे किस आधार पर स्वीकार किया।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि क्या संबंधित निर्देश एफिल टावर प्रबंधन ने अपनी तरफ से दिए थे या प्रतिनिधिमंडल की मांग पर दिए गए। फिलहाल कर्मचारियों के आरोप, SETE की स्वीकारोक्ति और BAPS की सफाई—तीनों पक्ष सामने हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विवाद ने फ्रांस में धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
