यूपी की वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’, फिर चुनाव अधिकारी के जवाब पर बवाल; आखिर क्यों मांगनी पड़ी माफी?

यूपी MLC चुनाव की मतदाता सूची में 14.81 लाख प्रविष्टियों में 158 त्रुटियां मिलीं। संजय सिंह के सवालों पर आधिकारिक अकाउंट की टिप्पणी विवादों में आई, फिर CEO कार्यालय ने माफी मांगी।

UP Politics: MLC वोटर लिस्ट में 158 त्रुटियां सामने आईं। संजय सिंह के सवालों पर CEO कार्यालय के जवाब से विवाद बढ़ा, जिसके बाद माफी मांगी गई।

यूपी की वोटर लिस्ट में ‘राम ने यादव को मारा’, फिर चुनाव अधिकारी के जवाब पर बवाल; आखिर क्यों मांगनी पड़ी माफी?

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यूपी में मतदाता सूची की त्रुटियों पर विवाद के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सोशल मीडिया टिप्पणी की भाषा पर माफी मांगी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 27 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज एक अजीबोगरीब नाम से शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की सार्वजनिक माफी तक पहुंच गया है। मतदाता सूची में तकनीकी गड़बड़ी से एक व्यक्ति का नाम गलत दर्ज हुआ। इस पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसा जवाब दिया गया, जिसने विवाद और बढ़ा दिया।
मंगलवार, 27 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्वीकार किया कि उसके आधिकारिक अकाउंट से की गई टिप्पणियों की भाषा और लहजा उचित नहीं था। कार्यालय ने नाराज लोगों से माफी मांगते हुए आगे से मर्यादित और औपचारिक संवाद का आश्वासन दिया।

खबर में खास

  • यूपी MLC चुनाव की मतदाता सूची में कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में 158 नाम-संबंधी त्रुटियां मिलीं।
  • 'रामहित यादव' जैसे नाम का गलत सॉफ्टवेयर अनुवाद विवाद की वजह बना।

  • आप सांसद संजय सिंह ने चुनावी सूची और उसके संभावित राजनीतिक पक्षपात पर सवाल उठाए।

  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की सोशल मीडिया टिप्पणी की आलोचना हुई।

  • 27 अक्टूबर को कार्यालय ने सार्वजनिक माफी मांगी।

'रामहित यादव' कैसे बन गया 'राम ने यादव को मारा'?

इस विवाद की शुरुआत विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में गलत नाम दर्ज होने की शिकायतों से हुई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन में अंग्रेजी में दर्ज नामों को हिंदी में उनके उच्चारण के अनुसार लिखना था। लेकिन कुछ मामलों में सॉफ्टवेयर ने नाम का लिप्यंतरण करने के बजाय शब्दों का अर्थ के अनुसार अनुवाद कर दिया।
मसलन, 'Ramhit Yadav' जैसा नाम यदि 'Ram hit Yadav' के रूप में दर्ज हो गया, तो उसका गलत अनुवाद 'राम ने यादव को मारा' के रूप में सामने आया।
यह किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की वास्तविक घटना नहीं, बल्कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की तकनीकी त्रुटि थी।

संजय सिंह ने चुनाव आयोग से क्या सवाल पूछा?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए पूछा कि ऐसे गलत नाम किसी खास जाति से जुड़े क्यों दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कंप्यूटर सिस्टम में संभावित पक्षपात और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी सवाल किए।
हालांकि, किसी तकनीकी त्रुटि का सामने आना अपने-आप यह सिद्ध नहीं करता कि मतदाता सूची में जानबूझकर जातिगत भेदभाव किया गया था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के जवाब से क्यों बढ़ा विवाद?

संजय सिंह के सवालों का जवाब देते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक X अकाउंट ने कहा कि मतदाता सूची में 'राम ने शर्मा को मारा' जैसी गलत प्रविष्टि भी मौजूद है।
कार्यालय ने तर्क दिया कि सॉफ्टवेयर जाति देखकर गलती नहीं करता।
लेकिन जवाब में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ी एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की गई। इसी भाषा और लहजे को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई।
एक संवैधानिक चुनावी संस्था के आधिकारिक अकाउंट से इस तरह की टिप्पणी किए जाने पर सवाल उठे।

विवाद बढ़ा तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मांगी माफी

मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर स्पष्टीकरण जारी किया।
कार्यालय ने स्वीकार किया कि पिछली पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा, उसका भाव और तीखे शब्द आधिकारिक संवाद के अनुरूप नहीं थे।
कार्यालय ने कहा कि लोगों की नाराजगी को गंभीरता से लिया गया है। साथ ही भविष्य में सोशल मीडिया पर शालीन और औपचारिक भाषा अपनाने का भरोसा दिया गया।
यह माफी विशेष रूप से विवादित सोशल मीडिया टिप्पणी की भाषा को लेकर थी। इससे मतदाता सूची की सभी त्रुटियों के ठीक हो जाने की पुष्टि नहीं होती।

14.81 लाख नामों में 158 गलतियां, अधिकारियों से स्पष्टीकरण

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में कुल 14,81,310 प्रविष्टियां थीं।
इनमें 158 प्रविष्टियों में मतदाताओं या उनके संबंधियों के नाम असामान्य रूप में दर्ज पाए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसके लिए सॉफ्टवेयर संबंधी त्रुटियों और मानवीय लापरवाही का उल्लेख किया है। संबंधित निर्वाचन अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
हालांकि, इन 158 त्रुटियों के कारण कितने मतदाता मतदान से वंचित हुए, इसका पुष्ट आंकड़ा उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है। इसलिए इन त्रुटियों को 158 वोट काटे जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।

2027 चुनाव से पहले इस मामले का राजनीतिक महत्व

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विषय बनी हुई है।
मतदाता सूची में नाम गलत होने का सवाल केवल सॉफ्टवेयर से जुड़ा नहीं है। यह मतदान करने वाले नागरिकों के भरोसे और चुनाव प्रशासन की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है।
इस विवाद में चुनाव अधिकारी कार्यालय ने अपनी भाषा के लिए माफी मांगी है, जबकि मतदाता सूची में मिली गलतियों के संबंध में अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
अब सबसे अहम सवाल है—क्या सिर्फ विवादित पोस्ट पर माफी मांगना पर्याप्त है, या मतदाता सूची में गलत नाम दर्ज होने की पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए?

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