योगी के गोरखपुर में MLC चुनाव पर बवाल! सपा प्रत्याशी ने छोड़ी मतगणना, BJP और निर्दलीय में कांटे की टक्कर
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में सपा और निर्दलीय प्रत्याशी ने गड़बड़ी के आरोप लगाए। दूसरी वरीयता की मतगणना में BJP और निर्दलीय के बीच करीबी मुकाबला।
UP MLC Result 2026: गोरखपुर में मतगणना पर विवाद। सपा प्रत्याशी ने गड़बड़ी का आरोप लगाया, जबकि BJP और निर्दलीय के बीच करीबी मुकाबला जारी है।
योगी के गोरखपुर में MLC चुनाव पर बवाल! सपा ने छोड़ी मतगणना, BJP और निर्दलीय में कांटे की टक्कर; चुनाव अधिकारी से मांगा जवाब
गोरखपुर शिक्षक MLC मतगणना में सपा प्रत्याशी ने अनियमितता के आरोप लगाए, जबकि भाजपा और निर्दलीय के बीच करीबी मुकाबला रहा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | गोरखपुर/लखनऊ | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर से एक महत्वपूर्ण चुनावी विवाद सामने आया है। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी ने गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मतगणना का बहिष्कार कर दिया। निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव ने भी वोटों की गिनती पर सवाल उठाए।
विवाद के बीच भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय राजीव यादव के बीच मुकाबला बेहद करीबी बना हुआ है। पहली वरीयता के मतों की गणना में भाजपा उम्मीदवार 466 वोट से आगे रहे, लेकिन चुनाव का अंतिम परिणाम दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पर निर्भर है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर को मतगणना के बहिष्कार और अनियमितताओं संबंधी सोशल मीडिया पोस्टों पर तत्काल प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया।
खबर में खास
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC सीट पर मतगणना को लेकर विवाद हुआ।
सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी ने धांधली का आरोप लगाकर मतगणना छोड़ी।
निर्दलीय राजीव यादव ने भी मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
पहली वरीयता में भाजपा उम्मीदवार 466 वोट से आगे रहे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने रिटर्निंग ऑफिसर को शिकायतों पर प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया।
अंतिम आधिकारिक चुनाव परिणाम की पुष्टि का इंतजार है।
रातभर मतगणना, कभी निर्दलीय आगे तो कभी BJP
गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय में मंगलवार, 27 अक्टूबर को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना शुरू हुई थी।
पहले राउंड में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने 3,813 वोट हासिल किए, जबकि निर्दलीय राजीव यादव को 3,703 और समाजवादी पार्टी के डॉ. संजयन त्रिपाठी को 2,744 वोट मिले।
दूसरे राउंड के बाद मुकाबला पलट गया। राजीव यादव ने 7,457 वोट प्राप्त कर भाजपा उम्मीदवार को 33 मतों से पीछे छोड़ दिया।
तीसरे राउंड में निर्दलीय उम्मीदवार की बढ़त बढ़कर 376 वोट हो गई। उस समय राजीव यादव को 11,287 और भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी को 10,911 वोट मिले थे।
लेकिन चौथे राउंड के बाद भाजपा उम्मीदवार फिर आगे निकल गए। इसी बदलाव के बाद मतगणना को लेकर विवाद तेज हो गया।
चौथे राउंड में किसे कितने वोट मिले?
पहली वरीयता की गणना पूरी होने के बाद प्रमुख उम्मीदवारों की स्थिति इस प्रकार रही।
उम्मीदवार
पार्टी
वोट
ध्रुव कुमार त्रिपाठी
भाजपा
11,881
राजीव यादव
निर्दलीय
11,415
डॉ. संजयन त्रिपाठी
सपा
8,301
अजीत कुमार सिंह
निर्दलीय
4,406
अजय सिंह
निर्दलीय
2,503
इन आंकड़ों के अनुसार पहली वरीयता में भाजपा को 466 मतों की बढ़त मिली। लेकिन कोई उम्मीदवार आवश्यक मतसंख्या तक नहीं पहुंच सका, इसलिए अन्य वरीयताओं के मतों की गणना आगे बढ़ाई गई।
सपा प्रत्याशी ने क्यों किया बहिष्कार?
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. संजयन त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि शुरुआती तीन राउंड तक मतगणना सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन बाद में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में अचानक बढ़त दिखाई देने लगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से मतगणना नहीं करा रहा है।
इसके बाद सपा प्रत्याशी मतगणना स्थल से बाहर निकल गए। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
हालांकि, सपा प्रत्याशी के आरोपों की स्वतंत्र जांच में पुष्टि होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मतगणना में गड़बड़ी को सिद्ध तथ्य के बजाय राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निर्दलीय राजीव यादव ने भी उठाए गंभीर सवाल
निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव ने मतपत्रों पर दर्ज वरीयता के अंकों में कथित बदलाव का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि कुछ मतपत्रों पर दर्ज अंक एक को बदलकर चार किए जाने की आशंका है। उन्होंने मतगणना के राउंडवार आंकड़ों और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
राजीव यादव भी नाराज होकर मतगणना केंद्र से बाहर आए। हालांकि, उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि उनके मतगणना अभिकर्ता केंद्र के भीतर मौजूद हैं।
फिलहाल मतपत्रों में कथित हेरफेर की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव अधिकारी कार्यालय ने दिया जवाब देने का निर्देश
विवाद बढ़ने पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर को निर्देश दिया गया कि मतगणना में कथित अनियमितताओं और बहिष्कार से संबंधित सोशल मीडिया पोस्टों पर तत्काल जवाब दिया जाए।
इस निर्देश का उद्देश्य सामने आई शिकायतों पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी का पक्ष उपलब्ध कराना था।
हालांकि, इसे चुनाव आयोग द्वारा धांधली के आरोप स्वीकार करने या किसी अधिकारी को दोषी ठहराने की कार्रवाई नहीं माना जा सकता।
प्रशासन का क्या कहना है?
मतगणना विवाद पर उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों ने मतों की गणना निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रखने की बात कही है।
अधिकारियों ने प्रत्याशियों को समझाने का प्रयास भी किया।
मतगणना में किसी गड़बड़ी या मतपत्रों में कथित बदलाव से संबंधित अंतिम जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हुई है। इसलिए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
दूसरी वरीयता से क्यों बदल सकता है परिणाम?
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC निर्वाचन क्षेत्र में मतदान वरीयता आधारित प्रणाली से हुआ है।
इसमें मतदाता प्रत्याशियों के सामने अपनी पसंद का क्रम दर्ज करते हैं। पहली वरीयता के मतों से जरूरी मतसंख्या पूरी नहीं होने पर नियमानुसार अन्य वरीयताओं के आधार पर मतों का स्थानांतरण किया जाता है।
इसी कारण पहली वरीयता में केवल 466 मतों की बढ़त होने के बावजूद भाजपा की जीत तय नहीं मानी जा सकती।
बुधवार सुबह तक दूसरी वरीयता की गणना जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई थी। अंतिम परिणाम निर्वाचन अधिकारी की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
योगी के गृह क्षेत्र में चुनाव का राजनीतिक महत्व
गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र और उनका प्रमुख राजनीतिक आधार रहा है।
ऐसे में यहां किसी चुनाव में भाजपा को करीबी मुकाबले का सामना करना पड़े तो उस पर राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है।
लेकिन यह भी समझना आवश्यक है कि गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र केवल गोरखपुर शहर तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत अनेक जिलों के पंजीकृत शिक्षक मतदाता आते हैं।
इसलिए इस परिणाम को आगामी विधानसभा चुनाव में पूरे गोरखपुर या उत्तर प्रदेश की जनता की राजनीतिक पसंद का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता।
2027 से पहले किसके लिए क्या संदेश?
समाजवादी पार्टी मतगणना में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठा रही है। निर्दलीय राजीव यादव ने भी पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।
दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी पहली वरीयता की गणना में आगे रहे हैं।
इस स्थिति में चुनाव प्रशासन के लिए सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूरी मतगणना का विश्वसनीय विवरण उपलब्ध कराना और प्रत्याशियों की आपत्तियों का नियमानुसार समाधान करना है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में उठी आपत्तियों का संतोषजनक समाधान होगा और अंतिम परिणाम सभी पक्षों के सामने पारदर्शी तरीके से घोषित किया जा सकेगा?