JDU से निकाले गए अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत रद्द, 1 दिसंबर तक सरेंडर का आदेश

मोकामा विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाल ही में JDU ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था।

Anant Singh Supreme Court News: मोकामा विधायक अनंत सिंह की दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने 1 दिसंबर तक सरेंडर और बिहार पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। जानिए पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/पटना | 30 अक्टूबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया।

खबर में खास

  • सुप्रीम कोर्ट ने आज, 30 अक्टूबर को अनंत सिंह की जमानत पर रोक लगाई।
  • मोकामा विधायक को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करना होगा।

  • बिहार पुलिस को चार महीने में हत्या के मामले की जांच पूरी करने का निर्देश।

  • 24 अक्टूबर को JDU ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निकाला था।

  • अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी JDU ने विधानसभा अध्यक्ष से की है।
  • हत्या का मामला 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई दुलारचंद यादव की मौत से जुड़ा है।

बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को एक सप्ताह के भीतर दूसरा बड़ा झटका लगा है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निष्कासित किए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत पर रोक लगा दी है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। साथ ही बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने में पूरी करने के निर्देश दिए।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अनंत सिंह को हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में JDU से निष्कासित किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत क्यों रोकी?

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और अनंत सिंह के पुराने आपराधिक मामलों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी और अनंत सिंह को आत्मसमर्पण करने के लिए समय दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, अनंत सिंह की ओर से बेटी की शादी का हवाला देकर तत्काल सरेंडर से राहत मांगी गई थी। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर तक का समय दिया।

आखिर क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?

यह मामला ठीक एक साल पहले, 30 अक्टूबर 2025 का है।
बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा क्षेत्र में दुलारचंद यादव की मौत हुई थी। वह पूर्व में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े रहे थे और उस समय जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय थे।
चुनाव प्रचार के दौरान दो राजनीतिक समूहों के बीच टकराव हुआ था। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि दुलारचंद यादव को पहले गोली मारी गई और फिर वाहन से कुचला गया।
इस मामले में अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया और नवंबर 2025 की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्णय अभी नहीं हुआ है।

जेल में रहते हुए चुनाव जीते थे अनंत सिंह

2025 बिहार विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने JDU के टिकट पर मोकामा सीट से चुनाव लड़ा था।
हत्या के मामले में गिरफ्तार होने के बावजूद उन्होंने चुनाव जीता। उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी को 28,206 मतों से हराया था।
इसके बाद 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
लेकिन दुलारचंद यादव के परिवार ने इस राहत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर आज महत्वपूर्ण आदेश आया है।

छह दिन पहले नीतीश कुमार की पार्टी ने क्यों निकाला?

24 अक्टूबर को JDU की बिहार इकाई ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक नीलम देवी, को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था।
पार्टी का आरोप था कि अनंत सिंह ने बिहार विधान परिषद चुनाव में अपने ही दल के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया।
JDU ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार को प्रत्याशी बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया।
पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी निर्देशों का उल्लंघन बताया।
JDU ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है। हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधानसभा सदस्यता समाप्त होना अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।

अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता का क्या होगा?

अनंत सिंह के सामने फिलहाल दो अलग मामले हैं।
पहला दुलारचंद यादव हत्याकांड का आपराधिक मामला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगाई है।
दूसरा JDU द्वारा की गई कार्रवाई और विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग से जुड़ा मामला है।
सिर्फ जमानत रद्द होने से किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। सदस्यता का सवाल संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होगा।
फिलहाल पुष्टि यह है कि अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। हत्या के मामले में अभी दोषसिद्धि नहीं हुई है और आगे की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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