Andhra Pradesh Election: जगन रेड्डी की पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से राहत! उम्मीदवारों पर हमले के आरोप, चुनाव आयोग को 24 घंटे में फैसला लेने का निर्देश

आंध्र प्रदेश के निकाय चुनाव में YSRCP उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है। राज्य चुनाव आयोग को 22 अक्टूबर तक फैसला करने और पुलिस को उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में जगन मोहन रेड्डी की YSRCP ने TDP समर्थकों पर उम्मीदवारों को धमकाने और नामांकन से रोकने के आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और DGP को निर्देश दिए हैं।

खबर में खास

  • YSRCP का आरोप—पार्टी उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के लिए धमकियाँ और हमले हुए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से 22 अक्टूबर तक फैसला करने को कहा।

  • उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन 25 अक्टूबर तक टालने का निर्देश।

  • पुलिस महानिदेशक को सुरक्षा और नामांकन केंद्रों पर CCTV व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश।

  • चुनाव आयोग को शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच करनी होगी।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/अमरावती | 21 अक्टूबर 2026

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आंध्र प्रदेश के निकाय चुनाव में नामांकन संबंधी शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और पुलिस को निर्देश दिए।
आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की YSR कांग्रेस (YSRCP) के बीच राजनीतिक टकराव सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। YSRCP ने आरोप लगाया है कि उसके कई उम्मीदवारों को धमकाकर नामांकन दाखिल करने से रोका गया। कुछ उम्मीदवारों के साथ मारपीट हुई और उनके नामांकन पत्र भी छीन लिए गए।
बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को शिकायतों पर फैसला करने और पुलिस महानिदेशक को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी करने की प्रक्रिया भी फिलहाल टाल दी है।
87 घटनाओं का दावा, 19 निकायों में गड़बड़ी के आरोप
जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने अदालत में दावा किया कि 100 शहरी स्थानीय निकायों में से 19 में उसके उम्मीदवारों को नामांकन के दौरान बाधाओं का सामना करना पड़ा।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने ऐसी 87 घटनाओं का हवाला दिया जिनमें उम्मीदवारों से मारपीट या उन्हें जबरन नामांकन करने से रोकने का आरोप लगाया गया।
YSRCP का आरोप है कि कुछ स्थानों पर लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किया गया। पार्टी ने सत्तारूढ़ TDP से जुड़े लोगों पर हिंसा और धमकाने का आरोप लगाया है।
हालांकि इन आरोपों पर न्यायिक जाँच का अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की विशेष पीठ ने आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को 22 अक्टूबर तक नामांकन अवधि बढ़ाने की मांग पर निर्णय लेने को कहा है।
अदालत ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग उम्मीदवारों की शिकायतों के साथ प्रस्तुत दस्तावेज और वीडियो जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जाँच करे।
अगर यह पाया जाता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण किसी उम्मीदवार को नामांकन से रोका गया, तो आयोग उसके लिए नामांकन अवधि बढ़ाने पर निर्णय ले सकता है।
अवधि बढ़ाने का फैसला होने पर संबंधित उम्मीदवारों को कम-से-कम 48 घंटे का अतिरिक्त अवसर देना होगा।
25 अक्टूबर तक अंतिम सूची जारी करने पर रोक
स्थानीय निकाय चुनाव के उम्मीदवारों की अंतिम सूची 21 अक्टूबर को प्रकाशित होनी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसका प्रकाशन 25 अक्टूबर तक स्थगित करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि वह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए और उम्मीदवारों की शिकायतों का समाधान करे।
यह आदेश चुनाव प्रक्रिया को स्थायी रूप से रोकने का फैसला नहीं है। इसका उद्देश्य नामांकन संबंधी शिकायतों की जाँच और पात्र उम्मीदवारों को उचित अवसर दिलाना है।

DGP को सुरक्षा और CCTV के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि नामांकन केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने CCTV निगरानी, पुलिस की तैनाती और नामांकन करने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
अदालत की चिंता यह थी कि यदि कोई उम्मीदवार डर या हिंसा के कारण नामांकन नहीं कर पाता, तो निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।

TDP सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में TDP गठबंधन की सरकार है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की YSRCP प्रमुख विपक्षी दल है।
ऐसे में निकाय चुनावों से पहले उम्मीदवारों को रोकने के आरोप राजनीतिक दृष्टि से गंभीर हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को TDP नेताओं के खिलाफ हिंसा के आरोप सिद्ध होने का फैसला नहीं माना जा सकता।
अब चुनाव आयोग की जाँच और पुलिस की कार्रवाई से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन को अनुपालन संबंधी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
इससे पहले 22 अक्टूबर तक आयोग का फैसला महत्वपूर्ण होगा। इसी से तय होगा कि किन क्षेत्रों में नामांकन के लिए अतिरिक्त अवसर दिया जाएगा।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: यदि कोई उम्मीदवार डर या हिंसा के कारण चुनाव में नामांकन ही नहीं कर पाए, तो क्या ऐसे चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष कहा जा सकता है?

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