'कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी राज में बिक रहे!' IDBI के ₹52,878 करोड़ के सौदे पर राहुल गांधी का हमला, सरकार ने दिया जवाब

IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की Fairfax को बेचने के फैसले पर राहुल गांधी ने सवाल उठाए हैं। वित्त मंत्रालय ने बोली और मूल्यांकन प्रक्रिया का बचाव किया है।

IDBI Bank Sale News: राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर को IDBI बैंक के ₹52,878 करोड़ के सौदे पर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कर्मचारियों की नौकरी और आरक्षण पर चिंता जताई। वित्त मंत्रालय ने बताया कि दूसरी बोली प्रक्रिया से सौदे का मूल्य ₹3,917 करोड़ बढ़ा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक के कर्मचारियों के समर्थन में पत्र साझा किया।

खबर में खास

  • राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर को IDBI बैंक कर्मचारियों के समर्थन में खुला पत्र साझा किया।
  • केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडा की Fairfax से जुड़ी कंपनी को बेचने की मंजूरी दी थी।

  • सौदे की घोषित कीमत लगभग ₹52,878 करोड़ है।

  • राहुल गांधी ने नौकरियों, कर्मचारी सेवा शर्तों और SC/ST/OBC आरक्षण पर सवाल उठाए।

  • वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर रात स्पष्ट किया कि दूसरी बोली में रिजर्व प्राइस घटाया नहीं गया था।

  • सरकार के मुताबिक संशोधित बोली प्रक्रिया से सौदे का मूल्य लगभग ₹3,917 करोड़ बढ़ा।
देश के एक बड़े बैंकिंग सौदे को लेकर शुक्रवार, 30 अक्टूबर को केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने IDBI बैंक की बहुमत हिस्सेदारी कनाडा की Fairfax समूह से जुड़ी कंपनी को बेचने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घेरा है।
राहुल गांधी ने IDBI बैंक के कर्मचारियों के नाम लिखे पत्र में सवाल उठाया कि जब बैंक घाटे से उबरकर मुनाफा कमाने लगा है, तो उसकी बहुमत हिस्सेदारी निजी निवेशक को क्यों बेची जा रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस और भाजपा सरकारों की बैंकिंग नीतियों की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में संस्थान बनाए गए, जबकि मौजूदा सरकार उन्हें बेच रही है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक दिन पहले ही IDBI सौदे की मूल्यांकन और बोली प्रक्रिया पर उठे सवालों का विस्तृत जवाब जारी किया था।

राहुल गांधी ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में क्या कहा?

राहुल गांधी ने बताया कि पिछले साल मार्च में IDBI बैंक के कुछ कर्मचारी उनसे संसद भवन में मिले थे। कर्मचारियों ने बैंक के निजीकरण और अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई थी।
कांग्रेस नेता के अनुसार, उन्होंने लोकसभा में भी सरकार से पूछा था कि मुनाफे वाले बैंक को बेचने का कारण क्या है और कर्मचारियों तथा जमाकर्ताओं के हित कैसे सुरक्षित रखे जाएंगे।
राहुल ने दावा किया कि सात साल पहले घाटे में चल रहा IDBI बैंक पिछले वित्त वर्ष में ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाने लगा है।
उन्होंने बैंक की आर्थिक स्थिति में सुधार का श्रेय कर्मचारियों की मेहनत को दिया और कहा कि वह उनकी मांगों का समर्थन करते हैं।
हालांकि, मुनाफे का आंकड़ा राहुल गांधी के पत्र में दिया गया है।

आखिर ₹52,878 करोड़ में कितना बैंक बेचा जाएगा?

केंद्र सरकार की 14 अक्टूबर की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए कनाडा के Fairfax Financial Holdings समूह से जुड़ी कंपनी को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी गई है।

IDBI बैंक सौदे के प्रमुख आंकड़े

कुल घोषित सौदा

₹52,878 करोड़

बेची जाने वाली हिस्सेदारी

60.72%

सरकार की हिस्सेदारी बिक्री

30.48%

LIC की हिस्सेदारी बिक्री

30.24%

स्रोत: भारत सरकार, वित्त मंत्रालय की 14 अक्टूबर 2026 की आधिकारिक घोषणा।
इस सौदे के बाद भारत सरकार की लगभग 15 प्रतिशत और LIC की लगभग 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बचेगी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 34 प्रतिशत रह जाएगी।
सरकार और LIC की हिस्सेदारी पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, लेकिन प्रस्तावित 60.72 प्रतिशत की खरीद के बाद नियंत्रण में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा।
यह सौदा नियामकीय औपचारिकताओं के अधीन है। इसलिए खरीदार को मंजूरी मिलने और पूरा लेन-देन संपन्न हो जाने में अंतर है।

सरकारी बैंक के कर्मचारियों की नौकरी और आरक्षण का क्या होगा?

राहुल गांधी ने पत्र में आरोप लगाया कि बहुमत हिस्सेदारी निजी हाथों में जाने से कर्मचारियों की सेवा शर्तों और भविष्य की भर्तियों में आरक्षण संबंधी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण पर विशेष चिंता व्यक्त की।
हालांकि, मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी समाप्त करने या आरक्षण की किसी विशेष व्यवस्था को खत्म करने का नया आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं है।
इसलिए राहुल गांधी की आशंकाओं को तय परिणाम की तरह नहीं लिखा जा सकता।

मोदी सरकार ने IDBI बैंक की बिक्री पर क्या सफाई दी?

वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर की रात 9:54 बजे जारी बयान में बैंक की बोली और मूल्यांकन प्रक्रिया का बचाव किया।
सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पहले दौर की बोलियां निर्धारित रिजर्व प्राइस से कम थीं, इसलिए उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
इसके बाद अधिक कीमत हासिल करने के उद्देश्य से दूसरे दौर की बोलियां मंगाई गईं।
मंत्रालय ने कहा कि दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों ने बैंक का मूल्यांकन किया था। इनके आधार पर औसत बेंचमार्क ₹75.99 प्रति शेयर बना, जबकि सफल बोली ₹81 प्रति शेयर की थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक नई प्रक्रिया से सौदे का मूल्य करीब ₹3,917 करोड़ बढ़ गया। सरकार ने यह भी कहा कि पुरानी रिजर्व प्राइस को घटाया या बढ़ाया नहीं गया था।
महत्वपूर्ण अंतर: सरकार का स्पष्टीकरण 29 अक्टूबर को आया था। यह राहुल गांधी के 30 अक्टूबर को सार्वजनिक किए गए पत्र के बाद जारी नया जवाब नहीं है।

सरकार निजी निवेशक को बैंक क्यों सौंप रही है?

वित्त मंत्रालय का तर्क है कि IDBI बैंक की वित्तीय स्थिति पहले कमजोर थी और बैंक में सरकार तथा LIC को पूंजी डालनी पड़ी थी।
2017 में RBI ने खराब ऋणों और घाटे के कारण बैंक पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे। वित्तीय स्थिति सुधरने के बाद मार्च 2021 में उन प्रतिबंधों को शर्तों के साथ हटाया गया।
सरकार का मानना है कि रणनीतिक निवेशक से नई पूंजी, आधुनिक तकनीक और प्रबंधन क्षमता मिलेगी। इससे बैंक का कारोबार बढ़ाने में मदद हो सकती है।
मंत्रालय ने इसे रणनीतिक पुनर्गठन बताया है।
एक अन्य तथ्य यह भी है कि RBI ने 2019 से IDBI को नियामकीय उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया था। हालांकि, उस समय भी बैंक में सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी बहुत अधिक थी।

क्या IDBI बैंक के ग्राहकों का पैसा प्रभावित होगा?

30 अक्टूबर तक उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में इस सौदे के कारण ग्राहकों की जमा राशि जब्त करने, बैंक खाते बंद करने या मौजूदा ऋणों को तत्काल बदलने की कोई घोषणा नहीं है।
बैंक RBI के नियमन के अधीन है और प्रस्तावित खरीदार को भी नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी।
इसलिए किसी ग्राहक को केवल इस राजनीतिक विवाद के आधार पर अपना पैसा निकालने या खाता बदलने की आवश्यकता होने का निष्कर्ष नहीं निकलता।

अब आगे क्या होगा?

सरकार के अनुसार रणनीतिक खरीदार को RBI के सामने आवश्यक दस्तावेज और नियामकीय शर्तों को पूरा करने की योजना प्रस्तुत करनी होगी।
इसके बाद ही सौदे को पूर्ण रूप दिया जा सकेगा।
राहुल गांधी कर्मचारियों और आरक्षण के मुद्दे उठा रहे हैं, जबकि सरकार बैंक के वित्तीय भविष्य और मूल्यांकन प्रक्रिया का पक्ष रख रही है।
इस विवाद का केंद्रीय सवाल है—बैंक की बहुमत हिस्सेदारी निजी हाथों में जाने के बाद कर्मचारियों, नए उम्मीदवारों और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित होगी?

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