'कर्नाटक में SIR सही हुआ'—कांग्रेस मंत्री के बयान पर BJP ने राहुल गांधी को घेरा! अगले ही दिन दी सफाई, 99 लाख वोटरों पर विवाद

SIR Controversy 2026: कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली के बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। 30 अक्टूबर को मंत्री ने सफाई दी। कर्नाटक में मतदाता सूची से 99.32 लाख नाम कम होने का मुद्दा भी चर्चा में है।

'कर्नाटक में SIR सही हुआ'—कांग्रेस मंत्री के बयान पर BJP ने राहुल गांधी को घेरा! अगले ही दिन दी सफाई, 99 लाख वोटरों पर विवाद

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बेंगलुरु/नई दिल्ली | 30 अक्टूबर 2026
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SIR पर विवाद के बाद 30 अक्टूबर को कांग्रेस मंत्री सतीश जारकीहोली ने अपने बयान का स्पष्टीकरण दिया।

खबर में खास

  • कर्नाटक के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने राज्य में मतदाता सूची के SIR की प्रक्रिया को सही तरीके से किए जाने की बात कही थी।
  • भाजपा ने 29 अक्टूबर को उनका बयान साझा करके राहुल गांधी की SIR विरोधी राजनीति पर सवाल उठाए।

  • कांग्रेस के ही मंत्री प्रियांक खरगे ने फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई।

  • 30 अक्टूबर को जारकीहोली ने सफाई दी कि उन्होंने SIR का समर्थन नहीं किया था।

  • कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची में पहले की तुलना में 99.32 लाख नाम कम हुए हैं।

  • यह घटनाक्रम 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विपक्ष की रैली से ठीक पहले सामने आया है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई में अब कर्नाटक के एक मंत्री का बयान विवाद का कारण बन गया है।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि उनके राज्य में SIR की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की गई। उन्होंने इसका संबंध कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तैयारी और निगरानी से जोड़ा।
लेकिन इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जारकीहोली ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उनके पुराने बयान का गलत अर्थ निकाला गया है और उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को सही या वैध नहीं बताया था

कांग्रेस मंत्री ने पहले क्या कहा था?

सतीश जारकीहोली ने कहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया और मतदाता सूची पुनरीक्षण की निगरानी की, जिससे वहां प्रक्रिया बेहतर तरीके से हुई।
उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस को पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में SIR के तौर-तरीकों पर आपत्ति है।
जब उनसे मतदाता सूची से करीब एक करोड़ नाम हटने के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने मृत, स्थानांतरित और दोहराए गए नामों का उल्लेख किया।
उनकी इस टिप्पणी को राज्य में हुए मतदाता सूची संशोधन के समर्थन के रूप में देखा गया।

भाजपा ने राहुल गांधी को लेकर क्या कहा?

29 अक्टूबर को भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारकीहोली के बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
भाजपा का तर्क था कि कांग्रेस सरकार के मंत्री भी मतदाता सूची को सही रखने के लिए पुनरीक्षण की जरूरत स्वीकार कर रहे हैं, जबकि राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से SIR पर सवाल उठा रहे हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं के बयानों को विरोधाभासी बताया।
हालांकि, यह भाजपा की राजनीतिक व्याख्या थी। जारकीहोली ने अगले दिन स्पष्ट किया कि वह मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने का विरोध करते हैं।

कांग्रेस के प्रियांक खरगे ने भी उठाए सवाल

कर्नाटक सरकार के एक अन्य मंत्री प्रियांक खरगे ने जारकीहोली के शुरुआती आकलन पर सवाल उठाए।
खरगे ने आरोप लगाया कि चित्तापुर में एक बूथ पर एक ही समुदाय के लगभग 40 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 आवेदन किए गए थे।
उन्होंने विजयनगर नहीं, बल्कि विजयपुरा जिले का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि कुछ जीवित मतदाताओं को मृत बताकर उनके नाम हटाने के आवेदन दिए गए।
ये जांच की मांग से जुड़े आरोप हैं। उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं होता कि सभी आवेदन किसी संगठित राजनीतिक साजिश के तहत दाखिल किए गए थे।

अगले दिन सतीश जारकीहोली ने क्या सफाई दी?

30 अक्टूबर को जारकीहोली ने सोशल मीडिया मंच X पर स्पष्टीकरण जारी किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में फॉर्म-7 का इस्तेमाल करके कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हुई थी, जिसका उनकी पार्टी ने विरोध किया।
जारकीहोली ने कहा कि उनके बयान का उद्देश्य राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के प्रयासों का उल्लेख करना था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया को सही बताना उनका उद्देश्य नहीं था और वह पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ हैं।

कर्नाटक में 99 लाख नाम कम कैसे हुए?

रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची में कर्नाटक के मतदाताओं की संख्या करीब 5.54 करोड़ से घटकर 4.55 करोड़ रह गई।
इस प्रकार लगभग 99.32 लाख नामों की कमी दर्ज की गई।
लेकिन इतने नाम कम होने का अर्थ यह नहीं कि सभी 99.32 लाख मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाए गए। मृत, स्थानांतरित और दोहरे पंजीकरण वाले नामों का सुधार वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
दूसरी ओर, किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया हो तो उसे नियमानुसार दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार 

1 नवंबर की दिल्ली रैली से क्या संबंध?

राहुल गांधी और विपक्षी INDIA गठबंधन ने मतदाता सूची से जुड़े आरोपों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली प्रस्तावित की है।
ऐसे समय में कांग्रेस के मंत्री का बयान, भाजपा की प्रतिक्रिया और फिर स्पष्टीकरण राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
अब मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में पात्र और अपात्र मतदाताओं का अंतर कितनी पारदर्शिता से स्पष्ट किया जाएगा।
इस मामले में जारकीहोली का शुरुआती बयान, भाजपा की प्रतिक्रिया और मंत्री का नया स्पष्टीकरण तीन अलग-अलग घटनाक्रम हैं। इन्हें एक साथ समझना जरूरी है।

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