ममता बनर्जी या बागी गुट, असली TMC किसकी? 25 अक्टूबर तक सबूत, 30 को चुनाव आयोग में सुनवाई
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद में चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट को 25 अक्टूबर तक दस्तावेज देने को कहा। 30 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे सुनवाई होगी। मूल चुनाव चिह्न अभी फ्रीज है।
TMC Symbol Dispute: ममता बनर्जी और बागी गुट से 25 अक्टूबर तक सबूत मांगे गए हैं। जानिए 30 अक्टूबर की सुनवाई, फूल-घास चुनाव चिह्न और दोनों गुटों के दावे।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद में ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के दावों की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर असली अधिकार किसका होगा, इस सवाल का जवाब जानने के लिए अब दो तारीखें महत्वपूर्ण हो गई हैं। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के गुटों को 25 अक्टूबर तक अपने दावों से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा है। इसके बाद 30 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे दोनों पक्षों की सुनवाई होगी।
विवाद केवल पार्टी के नाम तक सीमित नहीं है। TMC के पुराने 'फूल-घास' चुनाव चिह्न, संगठनात्मक नियंत्रण और पार्टी से जुड़े संसाधनों पर भी दोनों पक्षों के दावे हैं।
खबर में खास
चुनाव आयोग ने दोनों TMC गुटों से 25 अक्टूबर तक दस्तावेज और हलफनामे मांगे।
30 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे दिल्ली में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी।
ममता गुट को फिलहाल 'फुटबॉल खिलाड़ी' और बागी गुट को 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है।
सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन महीने में विवाद निपटाने का निर्देश दिया है।
25 अक्टूबर तक दोनों गुटों को क्या देना होगा?
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों से अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज, कानूनी तर्क और समर्थकों के हलफनामे जमा करने को कहा है।
इन दस्तावेजों के आधार पर आयोग दोनों पक्षों के संगठनात्मक समर्थन और पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से जुड़े दावों की जांच करेगा।
इस विवाद में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तृणमूल कांग्रेस की मूल पहचान और उसके संगठन पर अधिकार किस गुट का माना जाए।
दोनों पक्ष स्वयं को वैध TMC बताने का दावा कर रहे हैं।
30 अक्टूबर को चुनाव आयोग में क्या होगा?
दोनों गुटों के प्रतिनिधियों और कानूनी सलाहकारों को 30 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
इस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें और जमा किए गए दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि, 30 अक्टूबर को सुनवाई होने का मतलब यह नहीं है कि उसी दिन अंतिम फैसला भी घोषित कर दिया जाएगा।
आयोग दस्तावेजों के परीक्षण और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद निर्णय दे सकता है।
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी का दावा क्या है?
ममता बनर्जी का गुट पार्टी के पुराने नेतृत्व और संगठनात्मक निरंतरता के आधार पर मूल तृणमूल कांग्रेस पर अपना दावा पेश कर रहा है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट भी खुद को असली TMC बता रहा है। इस गुट को अरूप रॉय जैसे नेताओं का समर्थन मिला है।
पार्टी में यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई अंदरूनी टूट से जुड़ा है।
दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक पदाधिकारियों, पार्टी की संपत्तियों और संसाधनों को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं।
ममता बनर्जी का 'फूल-घास' चुनाव चिह्न क्यों फ्रीज हुआ?
सितंबर 2026 में चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और पारंपरिक 'फूल-घास' चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई थी।
यह व्यवस्था 6 अक्टूबर के उपचुनावों से पहले की गई थी।
इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया गया।
ऋतब्रत बनर्जी के गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम तथा 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
ये अंतरिम व्यवस्थाएं हैं। मूल नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार अभी तय नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज पूरे करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।
इसके बाद अदालत ने चुनाव आयोग को अगले तीन महीनों में नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मूल विवाद का निपटारा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचने पर जोर दिया था।
अब असली TMC का फैसला कब होगा?
25 अक्टूबर की दस्तावेज जमा करने की समयसीमा और 30 अक्टूबर की सुनवाई इस विवाद के अगले महत्वपूर्ण चरण हैं।
इसके बाद चुनाव आयोग को यह निर्धारित करना होगा कि मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न पर किस गुट का वैध दावा है।
फिलहाल ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों गुटों के बीच विवाद जारी है। अंतिम फैसला आने तक मूल चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक और अलग-अलग चुनावी पहचान का संदर्भ महत्वपूर्ण बना रहेगा।