Supreme Court: ED को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत, पिनराई विजयन को 7 दिन की राहत; भ्रष्टाचार केस में FIR फिर भी बरकरार
CMRL-Exalogic भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केरल CM पिनराई विजयन और उनके परिवार को सात दिन की राहत दी है। अदालत ने ED की अधिकार-सीमा पर सवाल उठाए, लेकिन FIR रद्द नहीं की।
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सुप्रीम कोर्ट ने पिनराई विजयन, उनकी बेटी और दामाद के खिलाफ CMRL मामले की विजिलेंस जांच सात दिन रोकी। ED को कानूनी अधिकार-सीमा में रहने की नसीहत दी गई, लेकिन FIR बरकरार है।
खबर में खास
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सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़ी विजिलेंस जांच सात दिन के लिए रोकी।
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पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास को अंतरिम राहत।
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अदालत ने ED के अधिकार और राज्य की जाँच एजेंसी की भूमिका में अंतर स्पष्ट किया।
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FIR रद्द नहीं हुई; केरल हाईकोर्ट में अपील का रास्ता खुला।
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CPI(M) ने राहत का स्वागत किया, भाजपा ने कहा कि इसे क्लीन चिट नहीं माना जा सकता।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 21 अक्टूबर 2026
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है। CMRL-Exalogic भ्रष्टाचार मामले में सर्वोच्च अदालत ने उनके, उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद पीए मोहम्मद रियास से संबंधित FIR की विजिलेंस जांच सात दिन के लिए रोक दी है।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि FIR बरकरार रहेगी। इस फैसले के साथ प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कानूनी अधिकार-सीमा और राज्य की जाँच एजेंसियों की स्वतंत्र भूमिका पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ सामने आई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्या फैसला सुनाया?
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की विशेष पीठ ने केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ के 15 अक्टूबर के आदेश को निरस्त कर दिया।
इस आदेश में पिनराई विजयन और उनके परिवार को एकल न्यायाधीश के उस निर्णय के खिलाफ अपील की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसमें FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षों को इस आदेश को चुनौती देने का अवसर मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से सात दिनों के लिए राज्य विजिलेंस जांच पर रोक लगाई गई है।
ED को अदालत ने क्यों दी नसीहत?
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने ED की भूमिका पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए।
अदालत का कहना था कि ED अपने अधिकारों के अंतर्गत मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर सकती है, लेकिन दूसरी जाँच एजेंसियों के वैधानिक क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
मुद्दा यह था कि धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत ED से जानकारी मिलने पर क्या राज्य पुलिस के लिए सीधे FIR दर्ज करना अनिवार्य हो जाता है।
अदालत ने संकेत दिया कि राज्य की एजेंसी को संबंधित कानून के अनुसार जानकारी और जाँच की आवश्यकता पर विचार करने का अधिकार है।
CMRL-Exalogic विवाद क्या है?
यह मामला Cochin Minerals and Rutile Limited यानी CMRL और पिनराई विजयन की बेटी वीणा से जुड़ी Exalogic Solutions कंपनी के बीच कथित भुगतान से संबंधित है।
ED का आरोप है कि कंपनी को आईटी सेवाओं के नाम पर धनराशि दी गई, जबकि वास्तव में संबंधित सेवाएँ उपलब्ध नहीं कराई गईं।
आरोपों के आधार पर ED ने राज्य पुलिस से जानकारी साझा की थी। बाद में केरल हाईकोर्ट ने नौ अक्टूबर को विजिलेंस विभाग को FIR दर्ज करके जाँच करने का निर्देश दिया।
ये अभी जाँच और कानूनी कार्यवाही से जुड़े आरोप हैं। संबंधित व्यक्तियों का अपराध किसी अंतिम न्यायिक फैसले से सिद्ध नहीं हुआ है।
क्या पिनराई विजयन को क्लीन चिट मिल गई?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने न तो FIR रद्द की है और न ही भ्रष्टाचार के आरोपों को गलत घोषित किया है।
अदालत ने केवल यह सुनिश्चित किया कि विजयन और अन्य संबंधित लोग हाईकोर्ट की खंडपीठ के सामने अपना पक्ष रख सकें।
ED की अलग धनशोधन संबंधी जाँच पर भी इस अंतरिम आदेश से स्वतः प्रतिबंध नहीं लगा है।
CPI(M) और BJP ने क्या कहा?
फैसले के बाद CPI(M) नेता और केरल के पूर्व कानून मंत्री पी. राजीव ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम बताया।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के. सुरेंद्रन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी आरोपी को क्लीन चिट नहीं दी है और FIR अब भी बरकरार है।
दोनों दल अदालत के अंतरिम आदेश की अलग-अलग राजनीतिक व्याख्या कर रहे हैं।
अब सात दिन बाद क्या होगा?
